हाईलाइट्स:
- चंदा चोरी पर तीखा प्रहार: घोसी के पूर्व सांसद अतुल राय ने राम मंदिर चंदा चोरी मामले को बताया 'सबसे घृणित और निकृष्ट कार्य', कहा—दर्ज हो चुका है 8 लोगों पर मुकदमा।
- इस्तीफे पर बड़ा दावा: चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद ही दर्ज हुई एफआईआर; एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर हुई विधिक कार्रवाई।
- २०२७ में बसपा सरकार की वापसी: अतुल राय बोले— 'इधर-उधर की बातों' से डाइवर्ट हुआ वोट बैंक अब बहन जी के पास वापस लौटा, २०२७ में बनेगी पूर्ण बहुमत की सरकार।
गाजीपुर (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद में स्वामी सहजानंद सरस्वती की ७६वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मऊ (घोसी) के पूर्व सांसद अतुल राय ने सूबे की सियासत और अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर बेहद तीखा और बड़ा बयान दिया है। पूर्व सांसद ने जहाँ एक तरफ भगवान के नाम पर चंदा चोरी करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए इसे सबसे निकृष्ट कार्य बताया, वहीं दूसरी तरफ २०२७ के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती की सरकार बनने का विधिक व राजनीतिक दावा ठोक कर विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है।
"चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद दर्ज हुई एफआईआर" — अतुल राय
गाजीपुर में मीडियाकर्मियों से विधिक व राजनैतिक वार्ता करते हुए पूर्व सांसद अतुल राय ने अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "भगवान के पवित्र नाम पर चंदे में चोरी करने से ज्यादा घृणित और निकृष्ट कार्य इस सृष्टि में कुछ दूसरा नहीं हो सकता।" इस संवेदनशील मामले में विधिक प्रगति की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अब तक इस पूरे प्रकरण में आठ कूट-रचित लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
ट्रस्ट के चंपत राय और अनिल मिश्रा के विधिक इस्तीफे के सवाल पर राय ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि दोनों पदाधिकारियों ने पहले ही अपने विधिक पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद ही पुलिस प्रशासन द्वारा प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। उन्होंने आगे बताया कि पूर्व में शासन द्वारा इस पूरे घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। निश्चित रूप से एसआईटी की विधिक रिपोर्ट के आधार पर ही यह प्राथमिकी दर्ज हुई होगी, जिसमें प्राथमिक जांच के तहत इन दोनों के नाम शामिल नहीं आए होंगे।
२०१७ के बाद डाइवर्ट हुआ बसपा का वोट बैंक अब घर वापस लौटा
आगामी विधानसभा चुनाव २०२७ को लेकर विपक्ष के हमलावर रुख और सोशल मीडिया पर चल रही विधिक बहसों के सवाल पर पूर्व सांसद अतुल राय ने आत्मविश्वास से लबरेज होकर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का हमलावर होना स्वाभाविक है, क्योंकि अब विरोधी दलों को धरातल पर यह समझ में आ रहा है कि बहुजन समाज पार्टी का पारंपरिक कैडर वोट और सर्व समाज का जमीनी समर्थन अब तेजी से हाथी के साथ वापस आ रहा है।
अतुल राय ने विपक्षी दलों पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष २०१७ से लेकर २०२४ के चुनावों तक जनता के इस बहुमूल्य वोट बैंक को 'इधर-उधर की भ्रामक बातों' और कूट-रचित नैरेटिव से दूसरी ओर डाइवर्ट कर दिया गया था। उन्होंने हाल ही में संपन्न हुई बसपा सुप्रीमो मायावती की विशाल रैली का उदाहरण देते हुए कहा कि उस रैली में किसी बाहरी भीड़ को नहीं, बल्कि केवल समर्पित कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था, जिसने यह विधिक रूप से साबित कर दिया है कि २०२७ में उत्तर प्रदेश के भीतर भारी बहुमत के साथ 'बहन जी' (मायावती) की सरकार बनने जा रही है।