हाईलाइट्स:
- खाकी पर गंभीर दाग: बैरिया थाना प्रभारी (SHO) राजेंद्र प्रसाद सिंह पर सोशल वर्कर अजय कुमार सिंह को थाने में बुलाकर गाली-गलौज और अमानवीय मारपीट करने का आरोप।
- फर्जी शांतिभंग का दावा: अधिवक्ता का आरोप— रानीगंज बाजार में मारपीट की झूठी कहानी गढ़कर पुलिस ने अपनी गलती छिपाने के लिए पीड़ित का कराया 'निल' मेडिकल।
- न्यायालय जाने की चेतावनी: पीड़ित पक्ष ने पुलिस अधीक्षक (SP) से लगाई न्याय की गुहार; SHO को ३० दिनों का लीगल नोटिस जारी, संतोषजनक जवाब न मिलने पर दर्ज होगा मुकदमा।
बैरिया/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत बैरिया थाना क्षेत्र से खाकी को शर्मसार करने वाली और कानून-व्यवस्था के रखवालों पर ही गंभीर विधिक सवाल खड़े करने वाली एक बेहद चौंकाने वाली वारदात सामने आई है। क्षेत्र के प्रतिष्ठित सोशल वर्कर (सामाजिक कार्यकर्ता) अजय कुमार सिंह ने बैरिया थाना प्रभारी (SHO) राजेंद्र प्रसाद सिंह पर पद का दुरुपयोग कर बेरहमी से मारपीट करने, गाली-गलौज देने और विधिक रूप से फर्जी मुकदमे में फंसाने के संगीन आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने बलिया पुलिस अधीक्षक (SP) को शिकायती पत्र सौंपकर विधिक न्याय की मांग की है, वहीं पीड़ित के अधिवक्ता ने थाना प्रभारी को विधिक नोटिस भेजकर ३० दिनों के भीतर जवाब तलब किया है।
पैसों के लेनदेन के विवाद में पुलिसिया रसूख का इस्तेमाल
पूरे सनसनीखेज मामले का विधिक खुलासा करते हुए पीड़ित अजय कुमार सिंह के वरिष्ठ अधिवक्ता गणेशानंद मिश्रा ने बताया कि इस पूरे विवाद की शुरुआत एक साधारण पैसों के लेनदेन से हुई थी। अजय कुमार सिंह ने एक व्यक्ति का बिजली बिल जमा करने के उद्देश्य से ७५,००० रुपये विधिक रूप से लिए थे। कार्य समय पर न हो पाने के कारण अजय ने वह पूरी धनराशि चेक (Cheek) के माध्यम से संबंधित व्यक्ति को वापस लौटा दी।
परंतु, बैंक खाते में केवाईसी (KYC) संबंधी अचानक आई तकनीकी समस्या के कारण चेक क्लीयरेंस में कुछ विधिक देरी हो गई। आरोप है कि इसी बात को लेकर विपक्षी दल ने बैरिया थाना प्रभारी पर अपना राजनीतिक व व्यावहारिक दबाव बनाया, जिसके बाद पुलिस ने पीड़ित अजय को लगातार प्रताड़ित करने की नीयत से थाने बुलाना शुरू कर दिया।
"रानीगंज बाजार की फर्जी कहानी गढ़कर किया चालान, मेडिकल रिपोर्ट भी प्रभावित की"
अधिवक्ता गणेशानंद मिश्रा का सीधा और गंभीर आरोप है कि बीते १८ जून २०२६ को जब अजय कुमार सिंह विधिक रूप से अपना पक्ष रखने बैरिया थाने पहुंचे, तो उनके साथ अत्यंत अमानवीय व्यवहार किया गया। पीड़ित का आरोप है कि SHO राजेंद्र प्रसाद सिंह ने अपनी वर्दी का धौंस दिखाते हुए अजय को गंदी-गंदी गालियां दीं और लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा।
हद तो तब हो गई जब पुलिस ने अपनी इस विधिक गलती और मारपीट को छिपाने के लिए अजय पर धारा १०७/१६ और १५१ (शांतिभंग) के तहत फर्जी विधिक चालान की कार्रवाई कर दी। एफआईआर में यह झूठी कहानी दर्ज की गई कि अजय ने रानीगंज बाजार में कोई मारपीट की थी, जबकि पीड़ित का दावा है कि वैसी कोई घटना धरातल पर घटित ही नहीं हुई थी। आरोप यह भी है कि पुलिस ने आनन-फानन में पीड़ित को सोनबरसा अस्पताल ले जाकर विधिक मेडिकल कराया और अपने प्रभाव से रिपोर्ट 'निल' (Nil) लिखवा दी, जबकि पीड़ित के गाल और शरीर पर चोट के साफ विधिक निशान मौजूद थे।
सीसीटीवी और सीडीआर जांच की मांग, कोर्ट जाने की तैयारी
इस अमानवीय घटनाक्रम के बाद से सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार सिंह गहरे मानसिक सदमे में हैं और उन्होंने बैरिया पुलिस से अपनी जान-माल का घोर खतरा जताया है। पीड़ित पक्ष ने निष्पक्षता के लिए १८ जून की बैरिया थाने की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और संबंधित पुलिस अधिकारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की उच्च स्तरीय विधिक जांच कराने की मांग एसपी बलिया से की है।
अधिवक्ता गणेशानंद मिश्रा ने टुडे९ उत्तरप्रदेश को बताया कि थाना अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद सिंह को इस विधिक प्रताड़ना के खिलाफ पंजीकृत लीगल नोटिस तामील करा दिया गया है। उन्हें विधिक जवाब दाखिल करने के लिए ३० दिनों की समय-सीमा दी गई है। यदि निर्धारित समय के भीतर पुलिस प्रशासन या थाना प्रभारी द्वारा संतोषजनक व विधिक उत्तर नहीं मिलता है, तो पीड़ित न्याय के लिए माननीय न्यायालय (Court) की शरण लेगा और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ धारा १५६(३) के तहत विधिक मुकदमा दर्ज कराकर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित कराएगा।
