हाईलाइट्स:
- न्यायालय का बड़ा आदेश: सीजेएम (CJM) कोर्ट बलिया के कड़े रुख के बाद उभांव थाना पुलिस ने तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव समेत तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज की एफआईआर।
- सफेदा लगाकर धोखाधड़ी: सगे पिता पर मौसी (दूसरी पत्नी) के साथ मिलकर परिवार रजिस्टर से वैध वारिसों का नाम हटाने और संपत्ति से बेदखल करने की विधिक कूट-रचना का आरोप।
- तत्कालीन सचिव की सफाई: आरोपी पूर्व सचिव मृत्युंजय राय ने सभी विधिक आरोपों को बताया निराधार; कहा— "मेरे पास पर्याप्त साक्ष्य, विवेचना में पुलिस को सौंपूंगा।"
बेल्थरा रोड/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत उभांव थाना क्षेत्र के विकास खंड सीयर की ग्राम पंचायत पतनारी कीर्तूपुर से एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाला विधिक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहाँ एक कलयुगी पिता द्वारा अपनी दूसरी पत्नी और तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव के साथ मिलकर सरकारी परिवार रजिस्टर में 'सफेदा' (व्हाइटनर) लगाकर अपनी पहली पत्नी और सगे बेटे का नाम गायब करने का दुस्साहसिक खेल खेला गया। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) बलिया के विधिक आदेश के बाद उभांव थाना पुलिस ने तत्कालीन सचिव, पिता और उसकी दूसरी पत्नी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है।
बिजली की तरह कौंधा कूट-रचना का खेल, मौसी से शादी के बाद शुरू हुआ विवाद
पूरे सनसनीखेज मामले का विधिक विवरण साझा करते हुए मुकदमा वादी यशराज शुक्ला उर्फ शुभम (निवासी ग्राम कीर्तूपुर) ने अपनी दी गई तहरीर में बताया कि उनकी माता मीरा शुक्ला की विधिक शादी १९ मई १९९६ को विपिन शुक्ला के साथ संपन्न हुई थी। इस संसर्ग से ५ नवंबर १९९8 को बड़ी बहन सुरभि शुक्ला और ०१ जनवरी २००० को स्वयं वादी यशराज शुक्ला का जन्म हुआ। शुरुआत में सब कुछ ठीक था और राजकीय नियमानुसार पूरे परिवार का नाम ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में विधिक रूप से अंकित था।
वादी का आरोप है कि उनके पिता विपिन शुक्ला का मऊ शहर के सहादतपुरा स्थित उनके ननिहाल में लगातार आना-जाना था। इसी दौरान पिता ने वादी की सगी मौसी मधु शुक्ला को अपने प्रेम जाल में फंसाकर अप्रैल २००२ में उनसे दूसरी विधिक शादी कर ली। इसके बाद से ही पहली पत्नी मीरा शुक्ला और उनके बच्चों को पैतृक संपत्ति से पूरी तरह बेदखल करने और अलग करने का कुचक्र रचा जाने लगा।
क्रम संख्या 8 और १० पर सफेदा लगाकर नाम बदलने का विधिक आरोप
मुकदमा वादी यशराज शुक्ला का सीधा और गंभीर आरोप है कि उनके पिता विपिन शुक्ला ने तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव मृत्युंजय राय के साथ विधिक साठगांठ की। इसके बाद परिवार रजिस्टर के क्रम संख्या 8 पर विधिक रूप से अंकित पहली पत्नी मीरा शुक्ला के नाम के ऊपर 'सफेदा' लगवाकर वहां दूसरी पत्नी मधु शुक्ला का नाम अवैध रूप से अंकित करवा दिया।
जालसाजी की हद यहीं नहीं रुकी; ऐसा ही दूसरा घिनौना कृत्य करते हुए परिवार रजिस्टर के क्रम संख्या १० पर विधिक रूप से दर्ज प्रार्थी (यशराज शुक्ला) के नाम को सफेदा से मिटाकर, दूसरी पत्नी मधु शुक्ला की पुत्री अनुष्का शुक्ला का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करा दिया गया। वादी ने विधिक साक्ष्य के तौर पर बताया कि उनके पास अगस्त २००२ में जारी कराए गए परिवार रजिस्टर की विधिक और प्रमाणित प्रति (नकल) आज भी सुरक्षित मौजूद है।
थानों के चक्कर काटने के बाद कोर्ट से मिला विधिक न्याय, उपनिरीक्षक को जांच
पीड़ित यशराज शुक्ला के अनुसार, जब उन्हें इस विधिक अधिकारों के हनन और जालसाजी की भनक लगी, तो उन्होंने ग्राम पंचायत सचिव से नई नकल लेने का प्रयास किया, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने विधिक प्रति देने से साफ इनकार कर दिया। अपनी पैतृक संपत्ति और ग्राम पंचायत की विधिक नागरिकता की रक्षा के लिए पीड़ित अपनी फरियाद लेकर उभांव थाने से लेकर जिले के उच्च पुलिस अधिकारियों तक अनेकों बार दौड़ा। जब खाकी से विधिक न्याय नहीं मिला, तो हताश होकर पीड़ित को माननीय न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
अब सीजेएम कोर्ट के विधिक निर्देश पर उभांव पुलिस ने तत्कालीन सचिव मृत्युंजय राय, पिता विपिन शुक्ला और दूसरी पत्नी मधु शुक्ला के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा ३१८(४), ३३8, ३३६(३), ३४०(२) और ६१(२) के तहत धोखाधड़ी और कूट-रचना का मुकदमा दर्ज कर लिया है। उभांव थाना प्रभारी ने मामले की अग्रिम विधिक विवेचना उपनिरीक्षक (SI) सूर्यप्रकाश दूबे को सौंप दी है। दूसरी तरफ, दूरभाष पर पूछे जाने पर तत्कालीन सचिव मृत्युंजय राय ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उनके पास निर्दोष होने के विधिक प्रमाण मौजूद हैं, जिन्हें वे विवेचना के दौरान जांच अधिकारी के समक्ष विधिक रूप से प्रस्तुत करेंगे।
