हाईलाइट्स:
• भ्रष्टाचार पर फूटा गुस्सा: विकासखंड सीयर के शाहपुर टिटिहा गांव में मनरेगा घोटाले की जांच करने पहुंची टीम का स्थानीय महिलाओं ने किया तीखा विरोध।
• फर्जीवाड़े का आरोप: कागजों पर 154 दिन की हाजिरी दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट का आरोप; धरातल पर महिलाओं ने एक दिन भी नहीं किया था काम।
• अधिकारियों की घेराबंदी: जांच में लीपा-पोती करने और बिना बयान लिए भागने का आरोप लगाकर आक्रोशित महिलाओं ने घेरी अधिकारियों की गाड़ी; वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
सीयर/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत विकासखंड सीयर से भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बंदरबांट का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। क्षेत्र के शाहपुर टिटिहा गांव में मनरेगा के तहत हुए कथित बड़े फर्जीवाड़े की जांच करने पहुंची सरकारी अधिकारियों की टीम को स्थानीय ग्रामीण महिलाओं के भारी और तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच टीम मामले में लीपा-पोती कर भ्रष्ट तंत्र को बचाने का प्रयास कर रही थी, जिससे आक्रोशित होकर महिलाओं ने अधिकारियों की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
कागजों पर 154 दिन की हाजिरी, धरातल पर काम शून्य!
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की शिकायत आजाद अधिकार सेना के प्रदेश महासचिव सिंहासन चौहान द्वारा की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शाहपुर टिटिहा गांव में एक 120 मीटर लंबे और 3.5 मीटर चौड़े चक मार्ग के निर्माण के नाम पर भारी वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़ा किया गया है।
आरोप है कि विभाग और ग्राम स्तर पर सांठगांठ करके कागजों पर कुल 154 दिनों की फर्जी मस्टररोल (हाजिरी) भरकर सरकारी बजट को ठिकाने लगा दिया गया। जबकि हकीकत यह है कि गांव की किसी भी महिला श्रमिक ने इस मार्ग पर एक दिन भी मजदूरी नहीं की थी। इस गंभीर शिकायत का संज्ञान लेते हुए बलिया के जिला अधिकारी (DM) ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया था।
"बिना लिखित बयान दर्ज किए जाने नहीं देंगे", गाड़ी के आगे डटीं महिलाएं
सोशल मीडिया पर जो वीडियो तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है, उसमें साफ देखा जा सकता है कि जांच के लिए गांव पहुंची टीम की गाड़ी को दर्जनों ग्रामीण महिलाओं ने रोक रखा है। महिलाओं का सीधा और स्पष्ट आरोप है कि अधिकारी मौके पर आकर केवल औपचारिकता निभा रहे हैं और पीड़ितों व ग्रामीणों का वास्तविक बयान दर्ज किए बिना ही वापस खिसकने की फिराक में थे।
वीडियो में महिलाएं अपने हक और न्याय के लिए गाड़ी के आगे मजबूती से डटी नजर आ रही हैं। उनका साफ कहना था कि जब तक प्रशासन उनकी पूरी बात नहीं सुनेगा और मौके पर उनका लिखित बयान दर्ज नहीं करेगा, तब तक वे सरकारी वाहन को गांव से बाहर नहीं जाने देंगी। ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा के नाम पर यहां लंबे समय से बड़ा खेल चल रहा है, जिसकी उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी बेहद जरूरी है।
पहले भी फर्जी आख्या प्रस्तुत करने का आरोप
शिकायतकर्ता सिंहासन चौहान का कहना है कि इससे पूर्व में भी खंड विकास अधिकारी (BDO) सीयर द्वारा इस मामले में एक मनगढ़ंत और फर्जी आख्या (रिपोर्ट) प्रस्तुत कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि ताजा जांच के दौरान जब गांव के पुरुषों और महिलाओं ने खुलकर सच उजागर किया कि किसी महिला ने वहां काम नहीं किया, तो अधिकारियों ने उस सच को नजरअंदाज कर अपनी मनमर्जी की रिपोर्ट बनाने की कोशिश की, जिससे ग्रामीणों का धैर्य टूट गया।
अब क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि ग्रामीण महिलाओं के इस भारी आक्रोश और जमीनी विरोध के बाद जिला प्रशासन इस घोटाले का सच सामने लाएगा या फिर भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों के कारनामों पर पर्दा डाल दिया जाएगा।

