हाईलाइट्स:
- बिना कागजात नहीं चलेंगे वाहन: एआरटीओ अरुण कुमार राय के सख्त निर्देश— वैध परमिट, फिटनेस और बीमा के बिना किसी भी स्कूल वाहन का संचालन नहीं होगा।
- सुरक्षा मानक अनिवार्य: प्रत्येक स्कूल बस व वैन में सीसीटीवी, जीपीएस ट्रैकिंग, पैनिक बटन, स्पीड गवर्नर और फर्स्ट एड बॉक्स का चालू रहना जरूरी।
- १५ वर्ष पुराने वाहन होंगे बाहर: आयु सीमा पूरी कर चुके अनुपयोगती वाहनों का पंजीकरण होगा निरस्त; चालकों-परिचालकों का होगा विधिक चरित्र सत्यापन।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर आगामी शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बलिया परिवहन विभाग पूरी तरह मुस्तैद और सख्त नजर आ रहा है। स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा को ध्यान में रखते हुए एआरटीओ अरुण कुमार राय ने जनपद के सभी निजी व सरकारी स्कूल संचालकों तथा वाहन स्वामियों के लिए एक बेहद कड़ा और विधिक दिशा-निर्देश जारी किया है। एआरटीओ ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि बिना विधिक परमिट, फिटनेस और वैध बीमा के किसी भी स्कूल वाहन को सड़क पर दौड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही सभी स्कूल वाहनों का पूरा विवरण यूपी आईएसवीएनपी (UPISVNP) पोर्टल पर तत्काल अद्यतन (अपडेट) करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीसीटीवी, जीपीएस और पैनिक बटन की होगी विधिक जांच
प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, एआरटीओ ने स्कूल वाहनों के लिए निर्धारित सुप्रीम कोर्ट और परिवहन विभाग की सभी सुरक्षा गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत पालन अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि प्रत्येक स्कूली वाहन में अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण जैसे सीसीटीवी कैमरा, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, पैनिक बटन, स्पीड गवर्नर (गति नियंत्रक यंत्र), फर्स्ट एड बॉक्स (प्राथमिक चिकित्सा किट) और वर्किंग कंडीशन में अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) का होना विधिक रूप से आवश्यक है। इन मानकों में किसी भी स्तर पर पाई गई ढिलाई को बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ माना जाएगा।
१५ वर्ष की आयु पूरी कर चुके अनुपयोगी वाहनों का कटेगा विधिक पत्ता
एआरटीओ अरुण कुमार राय ने स्कूल प्रबंधन को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि जिन स्कूल वाहनों के विधिक दस्तावेज अधूरे हैं या जो सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते, उनका संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाए। सभी स्कूल प्रशासन अपने वाहनों की भौतिक स्थिति की तकनीकी जांच कराकर आवश्यक मरम्मत सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त, जो वाहन अब संचालन योग्य नहीं रह गए हैं, अनुपयोगी हो चुके हैं अथवा अपनी १५ वर्ष की विधिक आयु सीमा पूरी कर चुके हैं, उनकी विधिक औपचारिकताएं पूरी करते हुए तत्काल प्रभाव से आरटीओ कार्यालय में पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) निरस्त कराया जाए।
चालकों का होगा चरित्र सत्यापन, ओवरलोडिंग पर होगी विधिक कार्रवाई
सुरक्षा व्यवस्था को त्रिस्तरीय बनाने के लिए एआरटीओ ने निर्देश दिए हैं कि स्कूल वाहनों को चलाने वाले सभी चालकों एवं परिचालकों के ड्राइविंग लाइसेंस (DL) की विधिक जांच के साथ-साथ स्थानीय पुलिस थाने से उनका चरित्र सत्यापन (Police Verification) अनिवार्य रूप से कराया जाए। उन्होंने स्कूल प्रबंधकों को दो टूक शब्दों में कहा कि मुनाफे या जल्दबाजी के चक्कर में किसी भी वाहन में निर्धारित विधिक क्षमता से अधिक छात्र-छात्राओं को न बैठाया जाए। यदि चेकिंग अभियान के दौरान किसी भी स्कूल वाहन में ओवरलोडिंग, यातायात नियमों का उल्लंघन या सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई, तो संबंधित स्कूल प्रशासन और वाहन संचालक के विरुद्ध सुसंगत विधिक धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
