हाईलाइट्स:
- न्यायाधीश के निर्देश पर आयोजन: जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार झा के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राजकीय बाल गृह (बालिका) में लगा जागरूकता शिविर।
- संविधान ने दिया है बड़ा अधिकार: सचिव चंद्र प्रकाश तिवारी बोले— अनुच्छेद २३(१) के तहत मानव तस्करी पर है पूर्ण प्रतिबंध, पीड़ितों को मिलता है सीधा विधिक उपचार।
- अवैध गतिविधियों पर चोट: यौन शोषण के विरुद्ध सुरक्षा को बताया अनुच्छेद २१ और २३ का हिस्सा; संदिग्ध गतिविधियों की सूचना अधिकारियों को देने की अपील।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (लखनऊ) के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में तथा माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलिया श्री अनिल कुमार झा के कुशल व विधिक मार्गदर्शन में सोमवार २९ जून २०२६ को एक महत्वपूर्ण विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा यह विशेष जागरूकता शिविर निधरिया स्थित राजकीय बाल गृह (बालिका) के परिसर में 'मानव तस्करी एवं यौन शोषण के खिलाफ अधिकार' विषय पर आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य बालिकाओं को उनके विधिक अधिकारों के प्रति सजग और सशक्त बनाना है।
अनुच्छेद २३(१) मानव तस्करी पर लगाता है पूर्ण विधिक प्रतिबंध: सचिव
इस विधिक कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलिया के सचिव श्री चन्द्र प्रकाश तिवारी ने की। शिविर में उपस्थित बालिकाओं, शिक्षिकाओं और संस्थान के कर्मचारियों को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए सचिव श्री तिवारी ने भारतीय संविधान के विधिक पहलुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २३(१) मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) पर पूरी तरह विधिक प्रतिबंध लगाता है। यह देश के प्रत्येक व्यक्ति का एक ऐसा मजबूत मौलिक अधिकार है, जो देश के नागरिकों और गैर-नागरिकों दोनों को समान रूप से विधिक सुरक्षा प्रदान करता है। इसके उल्लंघन की स्थिति में पीड़ित को सरकार एवं निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी तत्काल कड़ा विधिक व कानूनी उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
अनुच्छेद २१ और २३ के तहत यौन शोषण के विरुद्ध सुरक्षा अनिवार्य
सचिव चन्द्र प्रकाश तिवारी ने बालिकाओं को सुरक्षा कवच की विधिक जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि यौन शोषण के विरुद्ध सुरक्षा पाना भी हमारे संविधान के अनुच्छेद २१ (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) एवं अनुच्छेद २३ के अंतर्गत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का एक अभिन्न हिस्सा है। विधिक शिविर के दौरान उपस्थित स्टाफ और बच्चियों को मानव तस्करी, बाल श्रम और यौन शोषण से जुड़े विभिन्न दंडात्मक कानूनी प्रावधानों और अधिनियमों की सरल भाषा में विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही समाज में या आसपास होने वाली इस प्रकार की किसी भी अवैध व संदिग्ध गतिविधि की तुरंत विधिक सूचना संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को देने के लिए सभी को जागरूक व प्रेरित किया गया।
प्रभारी अधीक्षिका श्रीमती रूचि सहित कई विधिक कर्मी रहे उपस्थित
इस विशेष विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर के अवसर पर राजकीय बाल गृह (बालिका) की प्रभारी अधीक्षिका श्रीमती रूचि, विधिक सेवा प्राधिकरण के श्री व्यास मुनि पाण्डेय, संस्थान के अन्य जिम्मेदार अधिकारी, सुरक्षा कर्मचारी तथा भारी संख्या में संस्था की बालिकाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के अंत में राजकीय बाल गृह प्रशासन ने बालिकाओं को कानून के प्रति जागरूक करने और उन्हें विधिक संबल प्रदान करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए आभार प्रकट किया।
