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फतेहपुर कलेक्ट्रेट में हाई वोल्टेज ड्रामा: मकान पर कब्जे से परेशान महिला ने खुद पर डीजल डालकर किया आत्मदाह का प्रयास, दफ्तरों में मचा हड़कंप


 हाईलाइट्स:

• कलेक्ट्रेट में सनसनी: फतेहपुर जिला मुख्यालय परिसर में महिला फरियादी ने अचानक अपने ऊपर उड़ेल लिया डीजल; कर्मचारियों ने तत्परता दिखाकर बचाई जान।

• सगे भाई पर गंभीर आरोप: खागा तहसील की पीड़िता का दावा— भाई वीरेंद्र ने 6 लाख रुपये लेकर उसके मकान पर किया अवैध कब्जा, दर-दर भटकने को मजबूर।

• सिस्टम से हारी: साल 2024 से लगातार अधिकारियों और दफ्तरों की चौखट खटखटा रही थी महिला; सुनवाई न होने पर उठाया आत्मघाती कदम।

फतेहपुर (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद से इस वक्त की एक बेहद सनसनीखेज और प्रशासनिक अमले को हिला देने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। फतेहपुर कलेक्ट्रेट (जिलाधिकारी कार्यालय) परिसर में उस समय अचानक चीख-पुकार और हड़कंप मच गया, जब न्याय न मिलने से हताश एक महिला फरियादी ने अधिकारियों के दफ्तरों के ठीक सामने अपने ऊपर डीजल डालकर आत्महत्या करने का आत्मघाती प्रयास किया। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद सजग आम लोगों और कलेक्ट्रेट कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए महिला को समय रहते पकड़ लिया, जिससे एक बहुत बड़ा हादसा होने से टल गया।

सगे भाई ने 6 लाख रुपये लेकर हड़प लिया मकान!

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आत्मदाह का प्रयास करने वाली पीड़ित महिला जनपद के खागा तहसील क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है। कलेक्ट्रेट परिसर में रोती-बिलखती पीड़ित महिला ने अपने सगे भाई पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि उसके सगे भाई वीरेंद्र ने उससे करीब 6 लाख रुपये की मोटी रकम भी ले ली और उसके बावजूद उसके एकमात्र आशियाने (मकान) पर दबंगई के बल पर जबरन कब्जा कर लिया। अपना खुद का घर छिन जाने के बाद से पीड़ित महिला दाने-दाने को मोहताज है और बेहद दयनीय स्थिति में किराए के मकान में रहकर जीवन यापन करने को मजबूर है।

साल 2024 से काट रही थी चक्कर, नहीं पसीजा अधिकारियों का दिल

सिस्टम की बेरुखी और लापरवाही को बयां करते हुए पीड़िता ने बताया कि वह कोई पहली बार कलेक्ट्रेट नहीं आई है। वर्ष 2024 से लेकर अब तक (पिछले दो सालों से) वह न्याय की गुहार लेकर पुलिस कप्तान से लेकर खागा तहसील और जिला कलेक्ट्रेट के विभिन्न अधिकारियों व सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काट चुकी है। हर बार उसे केवल आश्वासन का झुनझुना थमा दिया जाता था। लगातार लिखित शिकायतों के बावजूद भी जब दोषी भाई के खिलाफ कोई कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो सिस्टम से पूरी तरह टूट चुकी महिला ने जिलाधिकारी कार्यालय में ही जान देने का खौफनाक फैसला कर लिया।

प्रशासनिक अमले के फूले हाथ-पांव, जांच का दिया भरोसा

कलेक्ट्रेट जैसी अति सुरक्षित जगह पर महिला द्वारा आत्मदाह के प्रयास की खबर जैसे ही शीर्ष अधिकारियों तक पहुंची, प्रशासनिक अमले और पुलिस महकमे के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक मैजिस्ट्रेट ने महिला को हिरासत में लेकर शांत कराया और उसे पानी पिलाया। अधिकारियों ने महिला की पूरी दर्दभरी शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए तत्काल मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उसका मकान वापस दिलाने का कड़ा आश्वासन दिया है।

बहरहाल, कलेक्ट्रेट परिसर में हुई इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने एक बार फिर स्थानीय थानों, तहसीलों और फरियादियों की समस्याओं के त्वरित समाधान (आईजीआरएस) के बड़े-बड़े दावों व प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

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