हाईलाइट्स:
- एनकाउंटर पर भारी आक्रोश: समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद गिरी ने भाजपा सरकार को घेरा; भरत तिवारी की तुलना शहीद भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद से की।
- शीर्ष नेतृत्व पर विधिक सवाल: सपा नेता का बड़ा आरोप— "एनकाउंटर के नाम पर हत्या हो रही है, इसमें सिर्फ पुलिस नहीं बल्कि मुख्यमंत्री और डीजीपी भी धारा ३०२ के दोषी हैं।"
- चौतरफा हमला: एनकाउंटर के साथ-साथ लखनऊ कोचिंग अग्निकांड, बदहाल परिवहन और पेपर लीक मुद्दों पर सरकार की विधिक व प्रशासनिक विफलता को रेखांकित किया।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है और अब इस पर सूबे की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। इस संवेदनशील मामले को लेकर समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद गिरी ने बलिया पहुंचकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था के नाम पर एनकाउंटर को एक 'खिलवाड़' बना दिया गया है। शोषितों और वंचितों की मुखर आवाज बनने वाले भरत तिवारी जैसे युवाओं को सोची-समझी रणनीति के तहत निशाना बनाया जा रहा है।
"भगत सिंह और लोहिया की राह पर थे भरत तिवारी"
प्रेस को संबोधित करते हुए सपा के फायरब्रांड युवा नेता अरविंद गिरी ने भरत तिवारी की तुलना देश के महान क्रांतिकारी शहीदों से की। उन्होंने कहा, "भरत तिवारी कोई सामान्य व्यक्ति नहीं बल्कि एक क्रांतिकारी थे, जो डॉक्टर राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण (जेपी) और धरतीपुत्र श्रद्धेय मुलायम सिंह यादव की समाजवादी विचारधारा को जीने वाले थे। उन्होंने हमेशा गांव के गरीब, शोषित और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज उठाई। यही सच बोलना और हक मांगना भाजपा और उनकी गोलवलकर-सावरकर वाली विचारधारा को खटकने लगा, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें विधिक प्रक्रिया को ताक पर रखकर मौत के घाट उतार दिया गया।"
पुलिस ही नहीं, सीएम और डीजीपी भी ३०२ के मुजरिम — अरविंद गिरी
एनकाउंटर की विधिक वैधता और पुलिसिंग पर गंभीर सवाल उठाते हुए अरविंद गिरी ने कहा, "अगर पुलिस अपनी गोली से किसी बेगुनाह को मारती है, तो क्या देश की कानून व्यवस्था उसे दोबारा जिंदा कर सकती है? अगर नहीं, तो फिर किसी की जान लेने का विधिक अधिकार पुलिस को किसने दिया? यह पूरी तरह विधिक व सामाजिक ताना-बाने के खिलाफ घोर अन्याय है।"
उन्होंने सीधे सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा कि इस फर्जी एनकाउंटर संस्कृति के लिए सिर्फ धरातल पर काम करने वाली पुलिस ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि प्रदेश के मुख्यमंत्री और डीजीपी भी सीधे तौर पर धारा ३०२ (हत्या) के मुजरिम हैं। इन्हीं के संरक्षण में ऐसी दमनकारी पुलिसिंग व्यवस्था तैयार की गई है, जहां कानून की विधिक प्रक्रिया का पालन किए बिना एनकाउंटर के नाम पर किसी को भी मार दिया जाता है।
पेपर लीक और लखनऊ कोचिंग हादसे पर भी घेरा
प्रेस वार्ता के दौरान अरविंद गिरी ने लखनऊ कोचिंग अग्निकांड और परिवहन व्यवस्था की बदहाली का जिक्र करते हुए सरकार को चौतरफा घेरा। उन्होंने कहा कि आज सरकार की प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्रदेश के छात्रों का भविष्य पूरी तरह अंधकार में डूब चुका है। पेपर लीक कराने वाले माफिया और बड़ी मछलियां खुलेआम विधिक शिकंजे से बाहर घूम रही हैं, जबकि दिन-रात मेहनत करने वाले होनहार छात्र सड़कों पर भटकने और हादसों का शिकार होने को मजबूर हैं। उन्होंने मांग की कि प्रदेश के सभी कोचिंग और शिक्षण संस्थानों की अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) और अन्य विधिक मानकों की सघन जांच हो और लापरवाही बरतने वाले संस्थानों को तुरंत सील किया जाए।
अंत में समाजवादी युवा नेता ने हुंकार भरते हुए कहा कि भरत तिवारी के इस मामले ने पूरे देश के जनमानस को झकझोर कर रख दिया है और अब प्रदेश की जनता चुप बैठने वाली नहीं है। जब तक सावरकर-गोलवलकर की दमनकारी विचारधारा वाली सरकार को सत्ता से बाहर नहीं कर दिया जाता, तब तक समाजवादी युवा अन्याय के खिलाफ इस विधिक और जमीनी संघर्ष को मजबूती से जारी रखेंगे।
