हाईलाइट्स:
- प्रदेशव्यापी बड़ी कार्रवाई: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने नियमों की अनदेखी करने वाले स्व-वित्त पोषित विद्यालयों पर कसा शिकंजा; पूरे यूपी में ४६५ स्कूलों की मान्यता समाप्त।
- गाजीपुर में बड़ा झटका: अकेले गाजीपुर जनपद के ४६ विद्यालयों पर गिरी गाज; जिला विद्यालय निरीक्षक प्रकाश सिंह ने विधिक रूप से की कार्रवाई की पुष्टि।
- नकल के सिंडिकेट पर चोट: बोर्ड परीक्षा में तिकड़म लगाकर केंद्र बनाने और धन उगाही करने वाले शिक्षा माफियाओं का विधिक नेक्सस ध्वस्त।
गाजीपुर (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने नियमों को ताक पर रखकर कागजों में संचालित होने वाले और बिना छात्र संख्या के चल रहे स्व-वित्त पोषित (प्राइवेट) विद्यालयों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी विधिक और दंडात्मक कार्रवाई की है। बोर्ड के कड़े रुख के कारण पिछले लगातार दो वर्षों से शून्य (जीरो) छात्र संख्या वाले प्रदेश भर के ४६५ विद्यालयों की मान्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की सबसे गाज पूर्वांचल क्षेत्र पर गिरी है, जहां के ११० विद्यालय इस जद में आए हैं। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह का आधिकारिक पत्र जारी होने के बाद गाजीपुर सहित पूरे पूर्वांचल के प्रबंधकों और शिक्षा माफियाओं के खेमे में हड़कंप मच गया है।
गाजीपुर के ४६ स्कूलों पर गिरी गाज, डीआईओएस ने दी विधिक जानकारी
इस पूरे मामले की जमीनी हकीकत और विधिक पुष्टि करते हुए गाजीपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) प्रकाश सिंह ने बताया कि बोर्ड के कड़े नियमानुसार यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि कोई हाईस्कूल नवीन (वनटाइम) या इंटरमीडिएट नवीन वर्ग की मान्यता प्राप्त संस्था लगातार दो वर्षों तक किसी भी छात्र को बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित नहीं कराती है या वहां भौतिक रूप से कक्षाएं संचालित नहीं पाई जाती हैं, तो उस विद्यालय की मान्यता स्वतः समाप्त समझी जाएगी।
इसी विधिक नियम और मानकों के तहत शैक्षिक सत्र २०२४-२५ और सत्र २०२५-२६ की सघन जांच में शून्य छात्र संख्या और शून्य उपस्थिति पाए जाने के कारण गाजीपुर जनपद के ४६ विद्यालयों सहित उत्तर प्रदेश के कुल ४६५ स्कूलों की मान्यता को विधिक रूप से विनिष्ट (समाप्त) घोषित कर दिया गया है।
फर्जीवाड़े और नकल के अवैध कारोबार पर प्रशासन का करारा प्रहार
गाजीपुर में इतनी बड़ी संख्या में स्व-वित्त पोषित विद्यालयों की मान्यता समाप्त होने के बाद उन तथाकथित शिक्षा माफियाओं के पैरों तले जमीन खिसक गई है, जो केवल कागजों पर इस तरह के डमी विद्यालयों का संचालन करते थे। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इन शून्य छात्र संख्या वाले विद्यालयों की आड़ में लंबे समय से बड़ा विधिक फर्जीवाड़ा चल रहा था।
अक्सर यह देखा जाता था कि यूपी बोर्ड की मुख्य परीक्षाओं के समय ये माफिया अपने राजनैतिक और प्रशासनिक तिकड़म व साठगांठ का इस्तेमाल कर इन बंद पड़े स्कूलों को भी परीक्षा केंद्र (Exam Center) अलॉट करवा लेते थे। इसके बाद अन्य जनपदों व क्षेत्रों के परीक्षार्थियों को यहां स्थानांतरित कर उनसे मोटी रकम (धन उगाही) वसूली जाती थी और सामूहिक नकल का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चलाया जाता था। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह और स्थानीय जिला प्रशासन के इस कड़े कदम ने नकल के इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ फेंका है।
जिला विद्यालय निरीक्षक प्रकाश सिंह ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि भविष्य में भी जिले के सभी निजी व सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों की विधिक व भौतिक चेकिंग का अभियान लगातार जारी रहेगा। मानकों में थोड़ी सी भी लापरवाही या फर्जीवाड़ा पाए जाने पर संबंधित संस्था के खिलाफ सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर कठोरतम कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
एकरार खान, टुडे९ उत्तरप्रदेश ब्यूरो, गाजीपुर
