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बलिया: फेफना के एकवारी में ताजिया मार्ग को लेकर पुराना विवाद; हर साल प्रशासन के कड़े दखल के बाद ही बढ़ता है जुलूस, स्थायी समाधान की मांग


 

हाईलाइट्स:

  • हर साल गहराता है तनाव: फेफना थाना क्षेत्र के एकवारी गांव में पारंपरिक ताजिया जुलूस के मार्ग को लेकर वर्षों पुराना विवाद एक बार फिर आया चर्चा में।
  • एक ही परिवार पर व्यवधान का आरोप: ग्रामीणों का दावा— गांव का एक ही विशेष परिवार हर साल ऐन वक्त पर रास्ते को लेकर जताता है आपत्ति, रुकवाता है जुलूस।
  • अग्रिम पैमाइश की मांग: त्योहार से पहले राजस्व और पुलिस टीम भेजकर रास्ते के स्थायी सीमांकन (पैमाइश) तथा निरोधात्मक कार्रवाई की उठी मांग।

फेफना/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत फेफना थाना क्षेत्र के एकवारी गांव में पारंपरिक ताजिया जुलूस के मार्ग (रास्ते) को लेकर काफी दिनों से चला आ रहा पुराना विवाद इस बार त्योहार के सीजन से पहले ही फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है। स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध वर्ग के अनुसार, हर साल त्योहार के पावन मौके पर जुलूस के मार्ग को लेकर गांव में अचानक तनाव और गतिरोध की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। सबसे चौंकाने वाली विधिक व प्रशासनिक बात यह है कि हर साल जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस के कड़े दखल, हस्तक्षेप और मुस्तैदी के बाद ही ताजिया को आगे बढ़ने का रास्ता मिल पाता है।

एक ही परिवार पर हर साल रास्ता रोकने और आपत्ति का आरोप

​स्थानीय सूत्रों से प्राप्त विधिक और जमीनी जानकारी के मुताबिक, एकवारी गांव का एक ही विशेष परिवार हर साल ताजिया के पारंपरिक और पुराने रास्ते को लेकर अपनी विधिक आपत्ति जताता है और जुलूस को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास करता है। इस गतिरोध के कारण हर साल ऐन वक्त पर गांव में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भारी दलबल के साथ दौड़ लगानी पड़ती है। मौके पर पहुंचकर एसडीएम (SDM), क्षेत्राधिकारी (CO) और फेफना थाना पुलिस की मौजूदगी में अधिकारी दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामले को तात्कालिक रूप से शांत कराते हैं, जिसके बाद ही भारी पुलिस सुरक्षा के बीच ताजिया आगे बढ़ पाता है।

स्थायी समाधान न होने से ग्रामीणों में भारी असंतोष

​गांव के आम नागरिकों का कहना है कि यह विवाद बेहद संवेदनशील और पुराना है। प्रशासन हर साल तात्कालिक रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मामला तो शांत करा देता है, लेकिन इस गंभीर समस्या का अब तक कोई स्थायी विधिक समाधान (Permanent Solution) नहीं निकाला जा सका है। त्योहार के समय बार-बार अचानक उत्पन्न होने वाले इस बेवजह के तनाव के कारण गांव का आपसी सामाजिक सौहार्द, शांति व्यवस्था और भाईचारा बुरी तरह प्रभावित होता है, जिससे ग्रामीणों में अंदरूनी असंतोष व्याप्त है।

त्योहार से पहले राजस्व टीम से सीमांकन कराने की पुरजोर मांग

​आगामी त्योहारों के मद्देनजर एकवारी गांव के संभ्रांत नागरिकों और युवाओं ने जिला प्रशासन, उपजिलाधिकारी और फेफना थाना पुलिस से पुरजोर विधिक मांग की है कि इस संवेदनशील मामले को समय रहते अत्यंत गंभीरता से लिया जाए। ग्रामीणों ने सुझाव दिया है कि त्योहार की तिथि नजदीक आने से पहले ही राजस्व विभाग (कानूनगो और लेखपाल) की एक संयुक्त टीम गांव भेजकर पारंपरिक रास्ते का सरकारी विधिक सीमांकन (पैमाइश) करा दिया जाए।

​इसके साथ ही, ऐन वक्त पर शांति व्यवस्था में व्यवधान डालने वाले और अफवाह फैलाने वाले चिन्हित तत्वों के खिलाफ पहले ही विधिक निरोधात्मक कार्रवाई (पाबंदी) अमल में लाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद की पुनरावृत्ति न हो सके और एकवारी गांव में गंगा-जमुनी तहजीब व शांति व्यवस्था पूरी तरह कायम रहे।

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