हाईलाइट्स:
- ससुराल में संदिग्ध मौत: नगरा थाना क्षेत्र के डुमरिया गांव में विवाहिता सोनम चौहान का मिला शव; मायके वालों ने लगाया दहेज हत्या का विधिक आरोप।
- गर्दन पर खून के निशान: भाई का दावा— "चींटी तक नहीं मार सकती थी बहन, आत्महत्या जैसा कोई साक्ष्य नहीं; साजिश के तहत मायके से बुलाकर उतारा मौत के घाट।"
- पुलिस व प्रधान पर गंभीर आरोप: पीड़ित परिवार का सनसनीखेज आरोप— नगरा पुलिस ने जबरन लिखवाई मनमाफिक तहरीर, ग्राम प्रधान बना रहा समझौते का विधिक दबाव।
नगरा/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत नगरा थाना क्षेत्र के डुमरिया गांव से नारी उत्पीड़न और संदिग्ध मौत का एक बेहद हृदयविदारक व सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक नवविवाहिता की ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने के बाद मायके पक्ष में कोहराम मच गया है। मृतका के भाई ने ससुराल पक्ष के लोगों पर दहेज के लिए बेरहमी से गला घोंटकर हत्या करने का संगीन विधिक आरोप लगाया है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार ने स्थानीय नगरा थाना पुलिस और गांव के प्रधान पर मिलीभगत करने तथा विधिक अधिकारों को दबाते हुए जबरन तहरीर लिखवाने का आरोप लगाकर प्रशासनिक अमले में सनसनी फैला दी है।
एक साल पहले हुई थी शादी, शुक्रवार को ही मायके से लौटी थी सोनम
प्राप्त विधिक व आधिकारिक विवरण के अनुसार, मृतका सोनम चौहान की शादी लगभग एक वर्ष पूर्व ५ मई २०२५ को डुमरिया गांव निवासी दिलीप चौहान (पुत्र सुरेंद्र चौहान) के साथ विधिक रूप से संपन्न हुई थी। मृतका के भाई सुनील चौहान ने टुडे९ उत्तरप्रदेश को रोते हुए बताया कि उनकी बहन पिछले कुछ दिनों से अपने मायके में रह रही थी। बीते गुरुवार को ससुराल पक्ष से फोन आया कि सोनम को ससुराल भेज दिया जाए, जिस पर शुक्रवार को ही भाई ने अपनी बहन को सकुशल उसके ससुराल डुमरिया पहुंचाया था। शनिवार को भी फोन पर बातचीत के दौरान सब कुछ सामान्य था, लेकिन रविवार २८ जून २०२६ की तड़के सुबह अचानक फोन आया कि सोनम ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है।
"मेरी बहन चींटी तक नहीं मार सकती, तो फांसी कैसे लगाएगी?"
विवाहिता की मौत की विधिक सूचना मिलते ही मायके पक्ष के लोग आनन-फानन में रोते-बिलखते डुमरिया गांव पहुंचे। भाई सुनील चौहान ने आरोप लगाया कि जब वे मौके पर पहुंचे, तो वहां का विधिक दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। शव को पहले ही फंदे से उतारकर नीचे जमीन पर रखा गया था और मृतका की गर्दन पर खून के गहरे निशान साफ दिखाई दे रहे थे। मौके पर दूर-दूर तक आत्महत्या जैसा कोई विधिक साक्ष्य मौजूद नहीं था। भाई ने बिलखते हुए कहा, "मेरी बहन इतनी कोमल थी कि वह एक चींटी तक नहीं मार सकती, वह खुद फांसी कैसे लगा सकती है?" उन्होंने आशंका जताई कि पूर्व में भी दहेज के लिए प्रताड़ित करने वाले ससुराल वालों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत उसे मायके से बुलवाया और फिर गला घोंटकर उसकी विधिक हत्या कर दी।
पुलिसिया कार्यप्रणाली और ग्राम प्रधान की भूमिका पर उठे संगीन सवाल
इस पूरे संवेदनशील मामले में स्थानीय नगरा थाना पुलिस की कार्यशैली भी गंभीर विधिक सवालों के घेरे में आ गई है। मृतका के भाई ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि नगरा पुलिस ने उनकी विधिक मर्जी के खिलाफ जाकर, अपने स्तर से मनमाफिक तरीके से तहरीर लिखवाई है। इसके अलावा, गांव के वर्तमान प्रधान पर भी आरोप है कि वह पुलिस से मिलीभगत कर पीड़ित परिवार पर इस गंभीर विधिक मामले को रफा-दफा करने और समझौते के लिए अनुचित मानसिक व सामाजिक दबाव बना रहा है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर होगी विधिक कार्रवाई: पुलिस
मामले की संवेदनशीलता और तनाव को देखते हुए मौके पर पहुंची नगरा थाना पुलिस ने विवाहिता के शव को अपने विधिक कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस प्रशासन का विधिक रूप से कहना है कि मायके पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को संज्ञान में लिया गया है। फिलहाल विधिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट के जरिए ही मौत के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक व विधिक खुलासा हो सकेगा। उसी विधिक रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में घटना को लेकर पूरे इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं।
