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बलिया: जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में कुलपति ने सपत्नीक कराया श्रीसत्यनारायण कथा व सुंदरकांड पाठ, भक्तिमय हुआ परिसर


 

हाईलाइट्स:

  • विश्वविद्यालय कल्याण की कामना: कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार शुक्ल ने अपनी अर्धांगिनी डॉ. वंदना शुक्ला के साथ सपत्नीक किया विधि-विधान से पूजन।
  • भक्ति रस में डूबा परिसर: सामूहिक सुंदरकांड पाठ और शंखध्वनि से गूंजा जेएनसीयू; कुलसचिव, वित्त अधिकारी समेत शिक्षक व छात्र रहे मौजूद।
  • कुलपति का संदेश: "भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराएं विद्यार्थियों व समाज में लाती हैं नैतिक मूल्य और सकारात्मक सोच।"

बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (JNCU) परिसर में रविवार २८ जून २०२६ को एक अद्भुत आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण देखने को मिला। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नरेन्द्र कुमार शुक्ल ने अपनी अर्धांगिनी डॉ. वंदना शुक्ला के संग विश्वविद्यालय परिवार के सर्वांगीण विधिक कल्याण, उन्नति और प्रगति के लिए श्रीसत्यनारायण भगवान की भव्य कथा एवं संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया। इस गरिमामयी और भक्तिमय धार्मिक अनुष्ठान में विश्वविद्यालय के कुलसचिव, वित्त अधिकारी सहित भारी संख्या में आचार्यगण, प्रशासनिक कर्मचारी तथा छात्र-छात्राओं ने पूरी श्रद्धा व विधिक निष्ठा के साथ सहभागिता की।

सुख, समृद्धि और ज्ञान के संवर्धन के लिए हुआ सामूहिक विधिक अनुष्ठान

​प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, अनुष्ठान की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्रीसत्यनारायण के पूजन से हुई। पूजन एवं कथा के दौरान कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार शुक्ल और उपस्थित विश्वविद्यालय परिवार ने संस्थान की निरंतर शैक्षणिक प्रगति, सुख, समृद्धि और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की विधिक कामना की। इसके पश्चात आयोजित हुए सुंदरकांड के सामूहिक पाठ की चौपाइयों से पूरा विश्वविद्यालय परिसर भक्तिमय ऊर्जा और सकारात्मक वातावरण से सराबोर हो उठा।

अनुष्ठान में प्रशासनिक अधिकारियों व प्राध्यापकों की रही गरिमामयी उपस्थिति

​इस पावन अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव एस. एल. पाल, वित्त अधिकारी आनंद दूबे सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विधिक रूप से कहा कि भारतीय संस्कृति और हमारी समृद्ध आध्यात्मिक परंपराएं समाज में नैतिक मूल्यों, कड़े अनुशासन और सकारात्मक सोच को सुदृढ़ करने का काम करती हैं। शिक्षण संस्थानों में ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में अपनी जड़ों के प्रति आदर और मानसिक शांति का विधिक विकास होता है।

आरती के बाद हुआ विशाल प्रसाद वितरण, पहल की हुई सराहना

​कार्यक्रम के विधिक समापन पर भगवान की महाआरती उतारी गई और उपस्थित समस्त भक्तों, संभ्रांत नागरिकों तथा छात्र-छात्राओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। विश्वविद्यालय में पहली बार इतने वृहद और सौहार्दपूर्ण स्तर पर आयोजित हुए इस आध्यात्मिक कार्यक्रम की उपस्थित सभी प्राध्यापकों और छात्र संघ से जुड़े लोगों ने भूरि-भूरि सराहना की। सभी ने इसे विश्वविद्यालय परिवार को एकजुट करने और एक सकारात्मक विधिक ऊर्जा का संचार करने वाली बेहद प्रेरणादायी पहल बताया।

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