हाईलाइट्स:
- ट्रामा सेंटर पर संगीन आरोप: माल्देपुर निवासी ३५ वर्षीय अविनाश प्रजापति की समय पर डॉक्टर न मिलने के कारण तड़प-तड़प कर मौत।
- परिजनों का फूटा गुस्सा: युवक की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में काटा भारी बवाल; लापरवाह डॉक्टरों पर विधिक कार्रवाई की मांग।
- पुलिस ने संभाला मोर्चा: सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस; शव को कब्जे में लेकर विधिक पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद स्थित मुख्य जिला अस्पताल के आपातकालीन व संवेदनशील विभाग 'ट्रामा सेंटर' की लचर और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर कटघरे में है। जनपद के माल्देपुर क्षेत्र के एक घायल युवक की ट्रामा सेंटर में समय पर इलाज और चिकित्सक न मिलने के कारण संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। युवक की मौत से भड़के और आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर के भीतर जमकर हंगामा और बवाल काटा। इस विधिक व प्रशासनिक गतिरोध की सूचना मिलते ही स्थानीय कोतवाली पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर विधिक रूप से शांत कराया।
ट्रैक्टर की चपेट में आने से हुए थे गंभीर रूप से घायल
प्राप्त विधिक व जमीनी विवरण के अनुसार, माल्देपुर निवासी अविनाश प्रजापति (उम्र ३५ वर्ष) पुत्र राज किशोर प्रजापति सड़क दुर्घटना में एक अनियंत्रित ट्रैक्टर की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना के तुरंत बाद बदहवास परिजन उन्हें जीवन रक्षा के लिए आनन-फानन में जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचे। परिजनों का सीधा और गंभीर आरोप है कि अविनाश की हालत अत्यंत नाजुक और विचलित करने वाली थी, इसके बावजूद ट्रामा सेंटर जैसे अति-संवेदनशील वेंटिलेज विभाग में समय पर कोई भी जिम्मेदार चिकित्सक (डॉक्टर) ड्यूटी पर उपलब्ध नहीं था। आरोप है कि प्राथमिक विधिक उपचार और इलाज मिलने में हुई अत्यधिक देरी के कारण अविनाश ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया।
परिजनों का कड़ा रुख, लापरवाह चिकित्सक पर एफआईआर की मांग
अविनाश की असामयिक मौत की खबर सुनते ही परिजनों का धैर्य टूट गया और उनका गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने जिला अस्पताल की संवेदनहीन कार्यप्रणाली के खिलाफ परिसर में ही मोर्चा खोल दिया और जमकर नारेबाजी व हंगामा किया। परिजन मौके पर ही दोषी व लापरवाह ऑन-ड्यूटी चिकित्सक के खिलाफ तत्काल विधिक निलंबन और नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग को लेकर अड़ गए।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और मामले में विधिक जांच कर न्याय दिलाने का ठोस भरोसा दिया, जिसके बाद हंगामा शांत हो सका। पुलिस ने विधिक पंचनामा भरकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए मर्चरी हाउस भेज दिया है।
जिला अस्पताल की लचर व्यवस्था पर फिर उठे विधिक सवाल
इस दर्दनाक घटना ने जिला अस्पताल प्रशासन के उन तमाम दावों की पोल खोल दी है, जिसमें २४ घंटे आपातकालीन विधिक सेवाएं देने की बात कही जाती है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बलिया जिला अस्पताल का ट्रामा सेंटर आए दिन डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण सफेद हाथी साबित हो रहा है, जिसकी विधिक मार गरीब और असहाय मरीजों को अपनी जान गंवाकर भुगतनी पड़ती है। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सड़क पर उतरकर विधिक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
रिपोर्ट रोहित सिंह
