हाईलाइट्स:
- श्रद्धालुओं का महासैलाब: परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के संयोजन में दिउली (बांसडीह रोड) में चल रही नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का छठा दिन रहा ऐतिहासिक।
- पंडित प्रदीप मिश्रा का दिव्य संदेश: 84 लाख योनियों में केवल मनुष्य को मिला है भोलेनाथ पर एक लोटा जल चढ़ाने का सौभाग्य; पशुपति व्रत और उपमन्यु प्रसंग पर झूमे भक्त।
- वीवीआईपी का जमावड़ा: राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह सहित सूबे के कई मंत्रियों और कद्दावर नेताओं ने उतारी महाकाल की आरती; सोमवार को होगा भव्य समापन।
बांसडीह रोड/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत दिउली स्थित बाबा बालखंडी नाथ धाम में इन दिनों आस्था का ऐसा समंदर उमड़ा है, जिसकी गूंज पूरे पूर्वांचल और बिहार में सुनाई दे रही है। सूबे के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के मुख्य आयोजकत्व में चल रही भव्य श्री शिव महापुराण कथा के छठे दिन रविवार को श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपनी दिव्य वाणी से पंडाल में मौजूद लाखों शिवभक्तों को निहाल करते हुए कहा कि अटूट गुरु भक्ति, दृढ़ संकल्प और महादेव की कृपा में मनुष्य का सोया हुआ भाग्य भी पलटने की अद्भुत क्षमता होती है।
मनुष्य जीवन अनमोल, सहजता से बरसती है भोलेनाथ की कृपा
कथा व्यास पीठ से भक्तों को ज्ञान की गंगा में सराबोर करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जब मनुष्य के जीवन से आडंबर, अहंकार और दिखावा समाप्त हो जाता है और उसके भीतर सहजता व सरलता आती है, तब भोलेनाथ की असीम कृपा स्वतः बरसने लगती है। उन्होंने मानव जन्म की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि 84 लाख योनियों के चक्र के बाद केवल मनुष्य योनि ही ऐसी है, जिसमें जीव को देवाधिदेव महादेव को एक लोटा जल अर्पित कर अपना कल्याण करने का परम सौभाग्य प्राप्त होता है।
उन्होंने स्वाति नक्षत्र की वर्षा की बूंद का उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे वह बूंद सीप में गिरकर अनमोल मोती बन जाती है, ठीक उसी प्रकार शिव के चरणों में समर्पित होकर साधारण मनुष्य का जीवन भी अनमोल बन जाता है। समुद्र से सीख लेने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार समुद्र कचरे को बाहर फेंक देता है और बहुमूल्य रत्नों को भीतर रखता है, वैसे ही इंसान को दूसरों के दुख-दर्द और विश्वास को अपने दिल में संजोना चाहिए।
मौन साधना, उपमन्यु भक्ति और पशुपति व्रत की महिमा
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा के दौरान भगवान शिव के दक्षिणामूर्ति स्वरूप का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि आदिगुरु शिव ने सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार ऋषियों की शंकाओं का समाधान बिना कुछ बोले, केवल 'मौन' रहकर किया था। इससे सिद्ध होता है कि आत्मज्ञान का मार्ग मौन और साधना से होकर गुजरता है।
इसके बाद उन्होंने बालक उपमन्यु की कथा और पशुपति व्रत के प्रसंग से पंडाल में भक्ति का रस घोल दिया। उन्होंने बताया कि उपमन्यु की निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें अक्षय संपदा दी थी। इसी क्रम में आगे चलकर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने भी उपमन्यु ऋषि के निर्देश पर पशुपति व्रत का विधि-विधान से पालन किया और संतान सुख की प्राप्ति की। कथा के उत्तरार्ध में ताड़कासुर के त्याग और भगवान गणेश व रिद्धि-सिद्धि के विवाह प्रसंग का जीवंत मंचन किया गया, जिसे देख श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
आरती में जुटे देश और प्रदेश के दिग्गज, सोमवार को महासमापन
कथा के मुख्य यजमान व परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के साथ महादेव की भव्य महाआरती करने के लिए देश और प्रदेश की कई शीर्ष राजनीतिक हस्तियां मंच पर मौजूद रहीं। मुख्य रूप से राज्यसभा के माननीय उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, खाद्य एवं रसद कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय, जिला प्रभारी मंत्री दयाशंकर मिश्र 'दयालु', पूर्व मंत्री नारद राय सहित अनेक जनप्रतिधियों ने सपरिवार आरती उतारकर बलिया के कल्याण की कामना की।
कथा का समापन आज:
आयोजन समिति के अनुसार, इस ऐतिहासिक शिव पुराण महाकथा का मुख्य समापन सोमवार (15 जून) को सुबह 8:00 बजे से 11:00 बजे तक विशेष आहुतियों के साथ होगा। कथा विश्राम के उपरांत विशाल भंडारे और महाप्रसाद वितरण का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।
