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​बलिया के सुरहा ताल को मिला अंतरराष्ट्रीय दर्जा, घोषित हुआ भारत का 100वां रामसर साइट, ₹5 करोड़ से संवरेगा रूप

 

हाईलाइट्स:

  • वैश्विक पहचान: जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) बना भारत का 100वां और यूपी का 13वां रामसर साइट।
  • बढ़ेगा पर्यटन: विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करेगा सुरहा ताल; मैरीटार गांव में 4.99 करोड़ की लागत से ईको टूरिज्म का विकास शुरू।
  • आधुनिक सुविधाएं: बर्ड वाचिंग टावर, ओपन एयर थिएटर, इंटरप्रिटेशन गैलरी और मल्टीपर्पज हॉल से लैस होगा पक्षी विहार।

बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के नाम आज एक और ऐतिहासिक और वैश्विक उपलब्धि दर्ज हो गई है। जिले में स्थित प्रसिद्ध जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को आधिकारिक तौर पर 'रामसर साइट' (Ramsar Site) घोषित कर दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से अब सुरहा ताल को वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी, जिससे यहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी उछाल आने की संभावना है।

भारत की 100वीं रामसर साइट बना बलिया का सुरहा ताल

​उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस उपलब्धि पर हर्ष जताते हुए बताया कि सुरहा ताल आर्द्रभूमि (Wetland) भारत की 100वीं और उत्तर प्रदेश की 13वीं रामसर साइट बनी है, जो पूरे प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात है। इस वर्ष फरवरी से अब तक यूपी की तीन आर्द्रभूमियों को यह दर्जा मिला है, जिसमें फरवरी में एटा का पटना पक्षी विहार, अप्रैल में अलीगढ़ का शेखा पक्षी विहार और अब जून में बलिया का सुरहा ताल शामिल है।

₹4.99 करोड़ से विकसित हो रहीं विश्वस्तरीय सुविधाएं

​सुरहा ताल आने वाले पर्यटकों के यादगार अनुभव के लिए उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड निरंतर प्रयासरत है। इसके तहत सुरहा ताल के निकट स्थित मैरीटार गांव में 4.99 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बड़े पैमाने पर विकास कार्य कराए जा रहे हैं।

सुरहा ताल पर मिलने वाली मुख्य सुविधाएं:

  • बर्ड वाचिंग टावर: सैलानी दूर-दराज से आने वाले प्रवासी पक्षियों को आसानी से देख सकेंगे।
  • ओपन एयर थिएटर व मल्टीपर्पज हॉल: सांस्कृतिक और विधिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए।
  • अन्य आकर्षण: आधुनिक पाथवे (पैदल पथ), हॉर्टिकल्चर (बागवानी), इंटरप्रिटेशन गैलरी, घाट विकास, चिल्ड्रेन प्ले एरिया, कियोस्क और बेंच।

विदेशी और प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा बसेरा

​सुरहा ताल अपनी समृद्ध पक्षी जैव विविधता के लिए पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है। यह अनेक दुर्लभ स्थानीय और सात समंदर पार से आने वाले प्रवासी पक्षियों का मुख्य आवास स्थल है। इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता के बाद वैश्विक स्तर पर इसकी ब्रांडिंग होगी, जिससे विदेशी पर्यटकों के आने का मार्ग प्रशस्त होगा।



रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान

​पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि नए रामसर स्थलों की अधिसूचना से इन क्षेत्रों में घरेलू और विदेशी पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे गाइड, नाविक, स्थानीय होटल, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगा। इसके साथ ही यह कदम जैव विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन को भी मजबूत करेगा।

क्या है रामसर कन्वेंशन?

​रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों (Wetlands) के संरक्षण एवं उनके सही उपयोग के लिए स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसकी शुरुआत वर्ष 1971 में ईरान के 'रामसर' शहर से हुई थी। इसके तहत वैश्विक महत्व की आर्द्रभूमियों की पहचान कर उनके संरक्षण को सुदृढ़ बनाया जाता है।


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