हाईलाइट्स:
• भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: सीयर ब्लॉक क्षेत्र में विकास कार्यों के भुगतान के एवज में कमीशन मांगने का ऑडियो वायरल होने पर पंचायत सचिव सस्पेंड।
• डीपीआरओ की बड़ी कार्रवाई: जिलाधिकारी (DM) के सख्त निर्देश पर डीपीआरओ अविनाश कुमार ने सचिव को किया निलंबित; रसड़ा ब्लॉक से किया संबद्ध।
• डोंगल किए गए निष्क्रिय: ससना बहादुरपुर के प्रधान बलदेव यादव व अन्य ने लगाया था २०% अग्रिम कमीशन मांगने का आरोप; संबंधित पंचायतों के डोंगल ब्लॉक।
बेल्थरा रोड/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत सीयर ब्लॉक क्षेत्र से इस वक्त की एक बेहद बड़ी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा देने वाली खबर सामने आ रही है। सीयर ब्लॉक में विकास कार्यों के सरकारी भुगतान में कथित रूप से मोटी कमीशनखोरी और रिश्वत मांगने से जुड़े एक ऑडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी के कड़े और स्पष्ट निर्देश पर त्वरित जांच कराते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) अविनाश कुमार ने आरोपी पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें रसड़ा ब्लॉक मुख्यालय से संबद्ध किया गया है।
क्या है पूरा मामला और वायरल ऑडियो का सच?
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह पूरी विधिक और दंडात्मक कार्रवाई स्थानीय स्तर पर प्रशासन को लिखित शिकायत मिलने के करीब दस दिन बाद अमल में लाई गई है। पीड़ित पक्षों का आरोप था कि पंचायत सचिव द्वारा नियमानुसार देय कमीशन की रकम न मिलने के कारण ग्राम पंचायत में कराए गए विभिन्न जरूरी विकास कार्यों के लगभग तीन लाख रुपये का सरकारी भुगतान जानबूझकर रोक दिया गया था।
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो तेजी से वायरल हो गया। यह वायरल ऑडियो संबंधित पंचायत सचिव और एक प्रधान प्रतिनिधि के बीच का बताया जा रहा है, जिसमें ग्राम पंचायतों में कराए गए फॉगिंग (मच्छर रोधी दवा का छिड़काव) और अन्य कीटनाशक दवा छिड़काव जैसे महत्वपूर्ण मदों के सरकारी बजट को पास करने के बदले में खुलेआम कमीशन की बात की जा रही थी।
ग्राम प्रधानों ने लगाए थे २० प्रतिशत एडवांस कमीशन के गंभीर आरोप
इस मामले में सीयर ब्लॉक के ससना बहादुरपुर ग्राम पंचायत के वर्तमान प्रधान बलदेव यादव सहित अन्य कई ग्राम प्रधानों और प्रधान प्रतिनिधियों ने मुख्य विकास अधिकारी और डीपीआरओ के समक्ष उपस्थित होकर लिखित रूप से बेहद गंभीर आरोप मढ़े थे। प्रधानों का सीधा आरोप था कि संबंधित सचिव द्वारा किसी भी फाइल को आगे बढ़ाने और डोंगल से भुगतान जारी करने के बदले कुल धनराशि का २० प्रतिशत अग्रिम (एडवांस) कमीशन के रूप में मांगा जा रहा था, जिससे गांवों के विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े थे।
एडीपीआरओ को सौंपी गई जांच, डोंगल किए गए फ्रीज
भ्रष्टाचार के इस संगीन मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष रुख अपनाते हुए डीपीआरओ अविनाश कुमार ने संबंधित पंचायत सचिव के विधिक कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी ग्राम पंचायतों के डोंगल (डिजिटल सिग्नेचर) को तत्काल प्रभाव से निष्क्रिय (ब्लॉक) कर दिया है, ताकि वित्तीय स्तर पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न की जा सके।
इस पूरे घूसखोरी प्रकरण की विस्तृत, गहन और तकनीकी जांच सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी (ADPRO) को सौंपी गई है, जिन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट जिला मुख्यालय को सौंपनी है। डीपीआरओ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि जांच में ऑडियो की सत्यता और भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित कर्मी के खिलाफ निलंबन के आगे बढ़ते हुए विभागीय एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई जाएगी।
रिपोर्ट :- रोहित सिंह , बलिया
