हाईलाइट्स:
• आर-पार की जंग: ई-रजिस्ट्री के निजीकरण के विरोध में रसड़ा उपनिबंधक कार्यालय (रजिस्ट्री दफ्तर) में दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं ने किया पूर्ण कार्य बहिष्कार।
• रोजगार पर संकट: प्रदर्शनकारियों ने सरकार के इस फैसले को जनविरोधी और दमनकारी नीति बताया; कहा— निजीकरण से छिन जाएगी रोजी-रोटी।
• नेतृत्व और एकजुटता: दस्तावेज लेखक संगठन के जिला अध्यक्ष भगवान पांडे के नेतृत्व में शुरू हुई हड़ताल; फैसला वापस होने तक काम ठप रखने की चेतावनी।
रसड़ा/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत रसड़ा तहसील क्षेत्र से इस वक्त की एक बड़ी और प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित करने वाली खबर सामने आ रही है। सरकार द्वारा ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के कथित निजीकरण (प्राइवेटाइजेशन) के फैसले के विरोध में गुरुवार से उपनिबंधक कार्यालय रसड़ा में दस्तावेज लेखकों (वसीका नवीस) और स्टांप विक्रेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। अपनी रोजी-रोटी पर मंडराते संकट को देखते हुए सभी लेखकों और विक्रेताओं ने बेमियादी (अनिश्चितकालीन) हड़ताल और जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे तहसील का रजिस्ट्री संबंधी कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है।
सरकार के फैसले को बताया दमनकारी और जनविरोधी
रजिस्ट्री कार्यालय परिसर में एकत्रित हुए प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार की इस नई नीति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दस्तावेज लेखक संगठन के जिला अध्यक्ष भगवान पांडे ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि सरकार की यह नीतियां पूरी तरह से जनविरोधी और दमनकारी हैं। ई-रजिस्ट्री को निजी हाथों में सौंपने से न केवल जमीन की खरीद-बिक्री करने वाली आम जनता का आर्थिक शोषण बढ़ेगा, बल्कि सालों से इस पेशे से जुड़े हजारों परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी।
जिला और तहसील कार्यकारिणी ने उपनिबंधक कार्यालय में डाला डेरा
इस अनिश्चितकालीन हड़ताल को सफल बनाने और अपनी मांगों को मजबूती से उठाने के लिए संगठन के पदाधिकारी पूरी तरह मुस्तैद दिखे। जिला अध्यक्ष भगवान पांडे के साथ संगठन के महामंत्री संजय कुमार पांडे, कोषाध्यक्ष प्रतीक सिंह हैप्पी, उपाध्यक्ष सुभाष राजभर और वरिष्ठ सलाहकार सुरेश पांडे सहित भारी संख्या में स्थानीय लेखक व स्टांप विक्रेता उपनिबंधक कार्यालय परिसर में ही दरी बिछाकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।
कामकाज पूरी तरह ठप, जब तक फैसला वापसी नहीं, तब तक हड़ताल जारी
हड़ताल के पहले ही दिन रसड़ा सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में सन्नाटा पसरा नजर आया। दूर-दराज के गांवों से जमीन की रजिस्ट्री, पावर ऑफ अटॉर्नी या अन्य विधिक कागजात तैयार कराने आए फरियादियों को बिना काम कराए ही मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। स्टांपों की बिक्री पूरी तरह बंद रहने से राजस्व को भी बड़ा झटका लगा है।
प्रदर्शनकारी पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यह उनके अस्तित्व और रोजगार की लड़ाई है। जब तक सरकार ई-रजिस्ट्री के निजीकरण के इस अव्यवहारिक और आत्मघाती फैसले को पूर्ण रूप से वापस नहीं लेती, तब तक रसड़ा तहसील में उपनिबंधक कार्यालय का कामकाज पूरी तरह ठप रखा जाएगा और यह आंदोलन दिन-प्रतिदिन और उग्र रूप धारण करेगा।
रिपोर्ट :- सुमित कुमार टुडे९ उत्तरप्रदेश, रसड़ा बलिया

