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बलिया: परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का सपा पर बड़ा हमला; बोले— "पिता की विरासत नहीं संभाल पाए अखिलेश यादव, पार्टी में मची है भगदड़"


 हाईलाइट्स:

• बलिया में गरजे मंत्री: सूबे के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता पर खड़े किए तीखे सवाल।

• मुलायम के साथियों का अपमान: मंत्री का दावा— नेताजी के साथ संघर्ष करने वाले वफादार पुराने नेताओं की अनदेखी ही सपा के बिखराव का सबसे बड़ा कारण।

• राम मंदिर चंदा जांच पर बोले: अयोध्या राम मंदिर चंदा हेरफेर मामले की चल रही एसआईटी (SIT) जांच पर कहा— दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा।

बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बागी बलिया जनपद में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सूबे के कद्दावर नेता और प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर अब तक का सबसे तीखा राजनीतिक हमला बोला है। मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए मंत्री दयाशंकर सिंह ने बड़ा दावा किया कि समाजवादी पार्टी के भीतर इस समय सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और आंतरिक कलह व अंतर्विरोधों के कारण पार्टी लगातार तेजी से बिखराव और टूट की तरफ बढ़ रही है।

"सपा में अब पुराने और वफादार नेताओं का सम्मान नहीं"— दयाशंकर सिंह

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने सपा के वर्तमान सांगठनिक ढांचे पर चोट करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी से उन तमाम पुराने और वरिष्ठ नेताओं का मोह अब पूरी तरह भंग हो चुका है, जिन्होंने कभी पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव (नेताजी) के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संगठन को खड़ा किया था। मंत्री ने आरोप लगाया कि सपा के वर्तमान नेतृत्व में अब पुराने, जमीन से जुड़े और वफादार नेताओं के लिए कोई सम्मान या जगह नहीं रह गई है। लगातार हो रही घोर उपेक्षा और अनदेखी के चलते ही वरिष्ठ नेता घुटन महसूस कर रहे हैं और लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं, जो सपा में मची भगदड़ को साफ दर्शाता है।

अखिलेश यादव की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

अखिलेश यादव को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए दयाशंकर सिंह ने कहा कि वर्ष २०१२ में श्रद्धेय मुलायम सिंह यादव जी ने बड़े भरोसे और उम्मीदों के साथ अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश की सत्ता की बागडोर सौंपी थी। लेकिन उस ऐतिहासिक मोड़ के बाद से अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी लगातार एक के बाद एक चुनाव हार रही है। वे अपनी पार्टी को वैचारिक और सांगठनिक रूप से बिखरने से बचाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।

वहीं, विपक्षी नेताओं द्वारा अन्य दलों के बड़े नेताओं से उनकी (दयाशंकर सिंह की) मुलाकातों पर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र और राजनीति में अलग-अलग दलों के नेताओं का आपस में मिलना-जुलना एक बेहद सामान्य और शिष्टाचार प्रक्रिया है। इसे हमेशा किसी खास राजनीतिक चश्मे या दलीय भावना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

राम मंदिर चंदा विवाद और ब्राह्मणों के मुद्दे पर दिया बेबाक जवाब

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के दौरान कथित चंदा हेरफेर के आरोपों और इस संबंध में शासन द्वारा गठित एसआईटी (SIT) जांच से जुड़े एक अहम सवाल पर मंत्री दयाशंकर सिंह ने सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सरकार और कानून से जुड़ा बेहद गंभीर विषय है। मामले की निष्पक्ष जांच चल रही है और जांच पूरी होने के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, जिससे पूरा सच प्रदेश की जनता के सामने आ जाएगा।

वहीं, ब्राह्मण समाज और प्रबुद्ध वर्ग से जुड़े मीडिया के एक तीखे और घुमावदार प्रश्न का जवाब देते हुए उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा कि इस विषय को किस श्रेणी में रखना है और इसका क्या विश्लेषण करना है, यह तय करना मीडिया का काम है। बीजेपी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के मूल मंत्र पर बिना किसी भेदभाव के काम कर रही है।

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