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बलिया: दुबहड़ थानाध्यक्ष अजय पाल के ट्रांसफर पर नम हुईं सबकी आंखें; विदाई समारोह में उमड़ा जनसैलाब, जनता बोली— 'अफसर नहीं, परिवार के सदस्य थे सर'


 

हाईलाइट्स:

  • भावुक विदाई समारोह: दुबहड़ थाना परिसर में थानाध्यक्ष अजय पाल के स्थानांतरण पर आयोजित कार्यक्रम में रो पड़े पुलिसकर्मी और क्षेत्रीय जनता।
  • बदली पुलिसिंग की परिभाषा: सरलता, संवेदनशीलता और निष्पक्ष विधिक कार्रवाई से जनता के दिलों में बनाई थी अमिट जगह।
  • विदाई के भावुक शब्द: विदा होते समय थानाध्यक्ष बोले— "दुबहर की जनता ने मुझे अफसर नहीं, परिवार का सदस्य माना; स्टाफ की ताकत और जनता का भरोसा ही मेरी पूंजी।"

दुबहड़/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद का दुबहड़ थाना परिसर मंगलवार ३० जून २०२६ को एक बेहद भावुक और यादगार विधिक व सामाजिक आयोजन का साक्षी बना। दुबहड़ थानाध्यक्ष अजय पाल के स्थानांतरण (ट्रांसफर) पर आयोजित विदाई समारोह में पूरा थाना परिवार, मातहत पुलिसकर्मी और क्षेत्र की सम्मानित जनता नम आंखों के साथ उमड़ पड़ी। "सेवा, समर्पण और सुरक्षा" के मूलमंत्र को धरातल पर जीने वाले लोकप्रिय थानाध्यक्ष को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और पुष्प-मालाओं से विधिक रूप से सम्मानित कर विदा किया गया।

सरलता और संवेदनशीलता से जीती जनता की अदालत

​अपने दुबहड़ कार्यकाल के दौरान थानाध्यक्ष अजय पाल ने विधिक पुलिसिंग की परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया। सरलता, विनम्रता और पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता उनकी मुख्य विधिक पहचान बनी। थाने की चौखट पर आने वाले हर फरियादी की बात को पहले धीरज से सुनना, बिना किसी सामाजिक दबाव के निष्पक्ष और त्वरित विधिक कार्रवाई करना तथा गरीब-पीड़ितों को न्याय दिलाने में सबसे आगे रहना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा। यही वजह रही कि वह खाकी वर्दी के साथ-साथ आम जनता के दिलों में भी अपनी अमिट जगह बना गए।

बोलते-बोलते भावुक हुए मातहत पुलिसकर्मी और महिला आरक्षी

​थाना प्रांगण में आयोजित भव्य समारोह में महिला-पुरुष पुलिसकर्मी, होमगार्ड के जवान और क्षेत्र के तमाम गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इस विधिक विदाई समारोह को संबोधित करते हुए सब इंस्पेक्टर संजय कुमार ने कहा, "थानाध्यक्ष सर का मिलनसार व्यवहार और हर विधिक व व्यक्तिगत मुश्किल में स्टाफ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहना हमें हमेशा प्रेरित करेगा।" विदाई की बेला में कई पुलिसकर्मी बोलते-बोलते भावुक हो गए। वहीं उपस्थित महिला आरक्षी ने भरे गले से कहा, "सर ने कार्यकाल के दौरान कभी कोई भेदभाव नहीं किया और हम सबको हमेशा एक अभिभावक की तरह बराबर सम्मान दिया।"

मुकदमेबाजी से बचाया, छोटे-बड़े विवाद बातचीत से सुलझाए: ग्रामीण

​समारोह में उपस्थित स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी थानाध्यक्ष के जनहित कार्यों की खुलकर सराहना की। ग्रामीणों ने कहा कि अजय पाल ने इलाके के तमाम छोटे-बड़े विवादों को थाने के विधिक दायरे में रखते हुए दोनों पक्षों की आपसी बातचीत से सुलझाया और लोगों को लंबी व खर्चीली मुकदमेबाजी से बचाया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्ग की सुरक्षा के लिए वे हमेशा तत्पर रहते थे और रात-बिरात भी जनता का फोन उठाकर विधिक मदद पहुंचाते थे।

"जनता का भरोसा औरStaff की ताकत ही मेरी जीवनभर की पूंजी": अजय पाल

​विदाई के अंतिम और भावुक क्षणों में थानाध्यक्ष अजय पाल ने भारी मन से उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, "दुबहर क्षेत्र की महान जनता ने मुझे कभी एक अफसर नहीं, बल्कि अपने परिवार का सदस्य माना। यहां का निष्ठावान स्टाफ मेरी असली ताकत रहा और जनता का अटूट भरोसा मेरी मुख्य प्रेरणा। आज विदाई के वक्त जो विधिक सम्मान और प्यार मुझे मिला है, वह मेरे जीवनभर की सबसे बड़ी पूंजी है।" उनके इतना कहते ही पूरा थाना परिसर गगनभेदी तालियों और 'अजय पाल जिंदाबाद' के नारों से गूंज उठा।

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