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बलिया: नौरंगा में ₹25 करोड़ की कटानरोधी परियोजना की धीमी रफ्तार पर भड़के डीएम, 500 मजदूर लगाने के सख्त निर्देश


 

हाईलाइट्स:

  • कड़ा रुख: जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बैरिया के नौरंगा में किया औचक निरीक्षण, लापरवाही पर कार्यदायी संस्था को फटकारा।
  • युद्धस्तर पर काम: ग्रामीणों की शिकायत पर हरकत में आया प्रशासन; सुबह, शाम और देर रात तक शिफ्टों में काम कराने का आदेश।
  • आरोग्य मंदिर की जांच: अस्पताल परिसर में गंदगी और डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर डीएम नाराज, व्यवस्था सुधारने का दिया आश्वासन।

बैरिया, बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने शुक्रवार को बैरिया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नौरंगा में चल रहे बाढ़ नियंत्रण एवं कटानरोधी परियोजना का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान धरातल पर कार्य की बेहद धीमी प्रगति को देखकर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कार्यदायी संस्था (बाढ़ खंड बलिया) को युद्धस्तर पर काम करने के सख्त निर्देश दिए।

₹2497 लाख की है पूरी परियोजना, लापरवाही पर नपेगी संस्था

​निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी को विभागीय अधिकारियों द्वारा बताया गया कि इस पूरी बाढ़ नियंत्रण परियोजना की कुल लागत 2497.11 लाख रुपये है, जबकि वर्तमान कार्य की अनुबंधित लागत 1159.89 लाख रुपये है। नौरंगा गांव को नदी की मुख्य धारा से बचाने के लिए फिलहाल 100 से 110 मीटर के संवेदनशील क्षेत्र में कटानरोधी कार्य कराया जा रहा है।

ग्रामीणों ने खोली पोल, डीएम बोले— 500 मजदूर लगाकर रातभर कराएं काम

​मौके पर मौजूद नौरंगा के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से शिकायत की कि ठेकेदार और विभाग द्वारा कार्य अपेक्षित गति से नहीं कराया जा रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए डीएम ने निर्देश दिया कि:

  • ​अब सुबह, शाम और देर रात तक अलग-अलग टीमें बनाकर शिफ्टों में काम कराया जाए।
  • ​जियो बैग लगाने के लिए अलग से विशेष टीम नियुक्त की जाए।
  • ​आवश्यकता पड़ने पर तत्काल पोकलैंड मशीनों और श्रमिकों की संख्या बढ़ाई जाए। ठेकेदार को 400 से 500 मजदूर लगाकर काम समय से पूरा करने को कहा गया है।
  • ​"जियो बैग में केवल सिल्ट (मिट्टी) ही भरी जाए, इसमें बालू/रेत का उपयोग बिल्कुल न हो। नदी के निचले हिस्से को पहले सुरक्षित किया जाए ताकि कटान तुरंत रुक सके। इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"

    मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी (बलिया)


    बोर्ड पर लिखे जाएंगे एई-जेई के मोबाइल नंबर, बढ़ेगी पारदर्शिता

    ​कार्यस्थल पर पारदर्शिता बनाए रखने और अधिकारियों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए डीएम ने एक सहायक अभियंता (AE) और तीन अवर अभियंताओं (JE) को नामित किया। उन्होंने निर्देश दिया कि इन सभी अधिकारियों के साथ-साथ संबंधित ठेकेदार का नाम और मोबाइल नंबर कार्यस्थल पर बड़े सूचना बोर्ड (Signage Board) पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए, ताकि ग्रामीण सीधे संपर्क कर सकें।

    रेड जोन के मकान खाली करने की अपील, मिला है मुआवजा

    ​जिलाधिकारी ने नौरंगा के ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए अपील की कि जो मकान नदी के बिल्कुल मुहाने पर यानी 'रेड जोन' में स्थित हैं और पूर्व में आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, उन्हें सुरक्षा के लिहाज से तुरंत खाली कर दिया जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि ऐसे प्रभावित परिवारों को प्रशासन की ओर से मुआवजा और वैकल्पिक सुरक्षित स्थान पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है।

    आयुष्मान आरोग्य मंदिर में गंदगी और डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर भड़के डीएम

    ​कटानरोधी कार्य के निरीक्षण के साथ ही जिलाधिकारी अचानक गांव में स्थित 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' (स्वास्थ्य केंद्र) भी पहुंच गए। वहां परिसर में चारों तरफ गंदगी देखकर उन्होंने भारी नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने डीएम को यह भी बताया कि स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक (डॉक्टर) नियमित रूप से ड्यूटी पर नहीं आते हैं। इस पर जिलाधिकारी ने तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ स्तर से सुधारात्मक कदम उठाने और स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त करने का भरोसा दिया।

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