हाईलाइट्स:
- भव्य आयोजन: दुबहर के ओझा कछुआ स्थित लखन बाबा मठिया पर चल रहा नौ दिवसीय श्री अभिषेकात्मक रुद्र महायज्ञ।
- मार्मिक प्रसंग: प्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी आरती पाठक ने श्रद्धालुओं को कराया श्रीरामचरितमानस के महात्म्य का रसपान।
- संस्कृति की सीख: साध्वी आरती पाठक की अपील—"माताएं बच्चों को मोबाइल की जगह मानस थमाएं, अवसाद से दूर रहेगा युवा।"
दुबहर, बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): क्षेत्र के ओझा कछुआ स्थित सुप्रसिद्ध लखन बाबा मठिया पर चल रहे नौ दिवसीय श्री अभिषेकात्मक रुद्र महायज्ञ के चौथे दिन कथा पंडाल में भक्ति की अविरल धारा बही। देश की प्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी आरती पाठक ने व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को श्रीरामचरितमानस के महात्म्य का रसपान कराया। मानस की चौपाइयों और विभिन्न प्रसंगों की संगीतमयी व्याख्या सुनकर पंडाल में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
"कलियुग में मानस ही सबसे बड़ी संजीवनी"
कथा वाचिका साध्वी आरती पाठक ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना कलियुग के जीवों के कल्याण और उद्धार के लिए की है। उन्होंने कहा, "कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा" — यह चौपाई ही मानस का महात्म्य बताने के लिए काफी है। जिस घर में भी मानस का नियमित पाठ और आदर होता है, वहां कलह, मानसिक रोग और दरिद्रता कभी प्रवेश नहीं कर सकती। मानस केवल पढ़ने की नहीं, बल्कि जीवन में उतारने की पुस्तक है।
चारों कांडों को चार पुरुषार्थ से जोड़ा
व्यासपीठ से साध्वी ने मानस के विभिन्न कांडों की व्याख्या करते हुए उन्हें मानव जीवन के चार पुरुषार्थ से जोड़ा:
- बालकांड: मनुष्य को जीवन में धर्म सिखाता है।
- अयोध्या कांड: जीवन में अर्थ के सही महत्व और मर्यादा को बताता है।
- अरण्य कांड: विकारों और काम (वासना) पर नियंत्रण रखना सिखाता है।
- किष्किंधा से उत्तरकांड: मानव के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
- सुंदरकांड: यह साक्षात हनुमान जी का विग्रह है, जिसके नियमित पाठ से जीवन के सारे संकट और बाधाएं कट जाती हैं।
यज्ञ और मानस का अटूट संबंध
यज्ञ और मानस के अंतर्संबंध पर प्रकाश डालते हुए कथा वाचिका ने कहा कि यज्ञ में हम हवन सामग्री की आहुति देते हैं, जबकि मानस में भाव की आहुति दी जाती है। इस रुद्र महायज्ञ में दोनों का समन्वय हो रहा है, जिससे इसका फल कई गुना बढ़ गया है।
"राम नाम मनि दीप धरु जीह देहरी द्वार, तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर। यज्ञ के अनुष्ठान से जहां हमारा बाहरी वातावरण शुद्ध होता है, वहीं मानस के श्रवण और पाठ से हमारा आंतरिक मन शुद्ध होता है।"
— साध्वी आरती पाठक, कथा वाचिका
मातृशक्ति और युवाओं को विशेष संदेश
साध्वी ने विशेष रूप से माताएं और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज माताएं अपने बच्चों को बहलाने के लिए मोबाइल की जगह मानस थमाएं और प्रतिदिन एक दोहा याद कराने का नियम बनाएं। उन्होंने कहा कि आज का युवा डिप्रेशन और तनाव में है क्योंकि वह अपनी मूल संस्कृति से दूर हो गया है। मानस पढ़ने वाला युवा कभी अवसाद में नहीं जा सकता, क्योंकि उसे दृढ़ विश्वास होता है कि—'होइहि सोइ जो राम रचि राखा'।
9 जून तक चलेंगे धार्मिक अनुष्ठान
महायज्ञ के मुख्य आयोजक श्री श्री 108 दत्तात्रेय जी महाराज ने बताया कि 9 जून तक चलने वाले इस महायज्ञ में प्रतिदिन प्रातः 6 बजे से रुद्राभिषेक, 8 बजे से हवन और सायं 5 बजे से 8 बजे तक साध्वी आरती पाठक जी की कथा हो रही है। इसके पश्चात रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक शक्ति पुत्र जी महाराज द्वारा श्रद्धालुओं को ज्ञान की गंगा से सराबोर किया जा रहा है।
इस आध्यात्मिक अवसर पर अभय दुबे, अनूप यादव, अमित तिवारी, लालू सिंह, आनंद सिंह, मंटू यादव, दुर्गेश मिश्रा, निहाल सिंह, चंदन सिंह, लक्की बाबू, संदीप प्रजापति, शिव गुप्ता सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय श्रद्धालु और माताएं-बहनें उपस्थित रहीं।
