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बलिया जिला अस्पताल बवाल: सीएमओ का सीसीटीवी फुटेज से बड़ा खुलासा; 'ब्रॉट डेड' लाया गया था युवक, डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप निराधार


 

हाईलाइट्स:

  • लापरवाही के आरोप खारिज: मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) ने परिजनों के आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार; कहा— ४ डॉक्टरों ने देखा था मरीज, अस्पताल आने से पहले हो चुकी थी मौत।
  • सीसीटीवी फुटेज से खुलासा: ई-रिक्शा से आने, डॉक्टरों के दौड़ने और इमरजेंसी के घटनाक्रम की पल-पल की टाइमलाइन सीसीटीवी (CCTV) साक्ष्यों से हुई साफ।
  • अस्पताल में तोड़फोड़: ऑन-ड्यूटी डॉक्टर मनोज कुमार ने लिखित बयान में कहा— 'ट्रॉमा सेंटर में की गई हिंसक तोड़फोड़, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर को भी आई चोटें।'

बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत २५ जून २०२६ को हुए एक सड़क हादसे में घायल युवक की जिला अस्पताल में मौत के बाद उपजा विवाद अब पूरी तरह गरमा गया है। परिजनों द्वारा इलाज में लापरवाही और ४० मिनट तक किसी डॉक्टर के न मिलने के लगाए गए गंभीर आरोपों पर मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) बलिया ने आधिकारिक और विधिक सफाई जारी की है। सीएमओ ने जिला अस्पताल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और ऑन-ड्यूटी चिकित्सकों के लिखित बयानों के आधार पर पल-पल की विधिक टाइमलाइन जारी करते हुए परिजनों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज और निराधार घोषित कर दिया है।

सीएमओ द्वारा जारी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज की विधिक टाइमलाइन

​मुख्य चिकित्साधिकारी ने विधिक साक्ष्यों के आधार पर बताया कि २५ जून की सुबह सड़क दुर्घटना में घायल अविनाश कुमार (पुत्र स्वर्गीय राज किशोर) को अत्यंत गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल लाया गया था। सीसीटीवी कैमरों की विधिक जांच में निम्नलिखित तथ्य सामने आए हैं:

  • सुबह ०8:०9 बजे: मृतक अविनाश कुमार को एक ई-रिक्शा के माध्यम से जिला चिकित्सालय परिसर के मुख्य गेट से अंदर लाते हुए देखा गया। परिजनों का आरोप था कि उन्हें पहले इमरजेंसी ले जाया गया, लेकिन सीसीटीवी में उनके इमरजेंसी आने की कोई विधिक पुष्टि नहीं हुई।
  • सुबह ०8:१६ बजे: इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार सिंह, मृतक के साथ आए एक तीमारदार के बुलाने पर तुरंत दौड़ते हुए इमरजेंसी से ट्रॉमा सेंटर की तरफ जाते विधिक रूप से दिखाई दे रहे हैं।

चार डॉक्टरों ने किया था विधिक परीक्षण, डॉक्टर के साथ मारपीट का आरोप

​डॉ. संतोष कुमार सिंह ने अपने लिखित विधिक बयान में स्पष्ट किया है कि उन्होंने तुरंत ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर अविनाश कुमार का गहन परीक्षण किया था और उनके 'मृत' (ब्रॉट डेड) होने की विधिक पुष्टि की थी। इसके बाद उन्होंने वहां तैनात डॉ. मनोज कुमार को अग्रिम विधिक व पंचनामा कार्रवाई समझाने के बाद अपनी ड्यूटी पर लौट गए।

​वहीं, रात की शिफ्ट में तैनात डॉ. मनोज कुमार के बयान के अनुसार, सुबह उनके रिलीवर डॉ. रजनीश भी अस्पताल आ चुके थे और दोनों डॉक्टरों ने मिलकर मरीज को देखा था। इसी दौरान ऑन-कॉल कंसलटेंट सर्जन डॉ. अनिल सिंह ने भी मौके पर पहुंचकर मरीज का विधिक परीक्षण किया था। इस प्रकार, तत्समय ड्यूटी पर तैनात कुल ०४ डॉक्टरों ने मरीज को देखा था, जिससे डॉक्टरों के न होने का दावा पूरी तरह झूठ साबित होता है। डॉ. मनोज कुमार सुबह ०8:३० बजे तक ट्रॉमा सेंटर में ही मुस्तैद थे, जिसके बाद वे बाहर जाते दिखे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौत की खबर मिलते ही कुछ असामाजिक तत्वों और परिजनों ने ट्रॉमा सेंटर में हिंसक तोड़फोड़ शुरू कर दी, जिसमें खुद डॉक्टर को भी चोटें आई हैं।

आरोप पूर्णतया निराधार, अग्रिम विधिक जांच जारी: सीएमओ

​मुख्य चिकित्साधिकारी ने टुडे९ उत्तरप्रदेश से बात करते हुए साफ तौर पर कहा कि सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर फैलाई जा रही यह बात पूरी तरह भ्रामक है कि घायल को इलाज नहीं मिला। वस्तुतः मरीज को अस्पताल मृत अवस्था में ही लाया गया था। चिकित्सकों ने अपनी विधिक और नैतिक जिम्मेदारी पूरी की। अस्पताल की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और ऑन-ड्यूटी सरकारी डॉक्टर के साथ मारपीट करने के मामले को प्रशासन ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। सीएमओ ने बताया कि इस पूरे संवेदनशील प्रकरण की गहनता से विधिक जांच चल रही है और कूट-रचित व हिंसक तत्वों के खिलाफ विधिक कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया जा रहा है।

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