वाराणसी: उत्तर प्रदेश की परिवहन व्यवस्था और कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए सरकारी तंत्र के नाम पर अवैध वसूली का एक बड़ा खेल सामने आया है। वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र में दर्ज एक एफआईआर ने सड़क पर दौड़ते ट्रकों और मालवाहक वाहनों से आरटीओ (RTO) अधिकारियों का नाम लेकर अवैध उगाही करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला कनेक्शन बलिया जनपद से जुड़ा है, जहां के 19 लोगों को इस सिंडिकेट में नामजद किया गया है।
ओवरलोडिंग को 'संरक्षण' देने का सुनियोजित नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, यह कोई सामान्य या छिटपुट उगाही का मामला नहीं है, बल्कि एक पूरी तरह से वेल-प्लांड और सुनियोजित नेटवर्क था। यह गिरोह सड़कों पर चलने वाले ओवरलोड और बिना कागजात वाले मालवाहक वाहनों को आरटीओ की कार्रवाई से बचाने और उन्हें सुरक्षित रास्ता (क्लियरेंस) देने के नाम पर कथित रूप से मोटी रकम वसूल रहा था।
हाईवे पर अवैध एंट्री और वसूली के इस खेल में आरटीओ अधिकारियों के नाम का खौफ और रसूख इस्तेमाल किया जा रहा था। इस खुलासे के बाद परिवहन व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बलिया के ये 19 लोग हुए नामजद
वाराणसी पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे में बलिया जनपद के जिन 19 आरोपियों को नामजद किया गया है, उनकी सूची इस प्रकार है:
• विपिन कुमार यादव उर्फ पातू चौधरी• आकाश चौधरी• राज कुमार• प्रदीप गुप्ता उर्फ विक्की गुप्ता• पिंकू सिंह उर्फ सुशील सिंह• मुनीम जी उर्फ संतोष• बुलबुल• सीबी सिंह• अशोक दुबे• रंजीत• बल्दू सिंह• दीपक• गुड्डू सिंह• सौरभ चौधरी• ललित सिंह• हृदय चौधरी• भोला नाथ चौधरी• दिनेश यादव• सतीश चौधरी उर्फ नागा
मोबाइल, आईडी कार्ड और नकदी बरामद पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान मौके से और आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन, चार कथित परिचय पत्र (आईडी कार्ड), दो वाहन और नकदी बरामद करने का दावा किया है। इन फर्जी या कथित परिचय पत्रों के जरिए यह गिरोह खुद को वैध दिखाने की कोशिश करता था, ताकि वाहन चालकों पर रौब जमाया जा सके।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा, जांच तेज
मामले की संवेदनशीलता और सरकारी विभाग के नाम का दुरुपयोग देखते हुए फूलपुर पुलिस ने एफआईआर में सामान्य धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धाराएं भी जोड़ी हैं।अब जांच एजेंसियों की रडार पर इस सिंडिकेट के 'स्लीपिंग पार्टनर्स' हैं। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि:
1. इस अवैध वसूली का पैसा आखिर किस-किस की जेब में जाता था?
2. क्या इस सिंडिकेट को परिवहन विभाग या स्थानीय स्तर पर किसी बड़े सफेदपोश या अधिकारी का संरक्षण प्राप्त था?
3. यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और अब तक कितने करोड़ की उगाही कर चुका है?
(Disclaimer): इस खबर में दिए गए सभी तथ्य और आरोप पुलिस विभाग द्वारा दर्ज एफआईआर (FIR) में शामिल विवरणों पर आधारित हैं। कानूनन, न्यायालय में सुनवाई और जांच पूरी होने के बाद ही किसी को दोषी माना जा सकता है।

