दुबहर क्षेत्र के रामपुर टीढ़ी गांव निवासी विवेक कुमार यादव भारतीय सेना में बने लेफ्टिनेंट।
सेना में अधिकारी बनने के बाद पहली बार बलिया पहुंचे विवेक का रेलवे स्टेशन से भृगु मंदिर तक हुआ ऐतिहासिक स्वागत।
यूपी पुलिस में तैनात पिता का अधूरा सपना बेटे ने कड़ी मेहनत से किया साकार।
युवाओं को दिया संदेश: "दूसरों से शिकायत करने के बजाय खुद की कमियों को सुधारें, सफलता जरूर मिलेगी।"
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बलिया (टुडे 9 उत्तर प्रदेश)। क्रांति और जज्बे की धरती बलिया के एक और लाल ने राष्ट्रीय स्तर पर जिले का मान बढ़ाया है। जिले के दुबहर थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर टीढ़ी गांव निवासी विवेक कुमार यादव का चयन भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट हुआ है। सैन्य अधिकारी बनने के बाद जब वह पहली बार अपने गृह जनपद पहुंचे, तो रेलवे स्टेशन से लेकर ऐतिहासिक भृगु मंदिर तक उनका भव्य और अभूतपूर्व स्वागत किया गया।
स्टेशन से भृगु मंदिर तक निकला विजय जुलूस
विवेक कुमार यादव के बलिया रेलवे स्टेशन पहुंचते ही भारी संख्या में मौजूद परिजनों, ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं ने ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और देशभक्ति के नारों के साथ उनका अभिनंदन किया। इसके बाद गाजे-बाजे के साथ एक भव्य विजय जुलूस निकाला गया। काफिला सबसे पहले बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर पहुंचा, जहां दर्शन-पूजन के बाद जुलूस महर्षि भृगु मंदिर के प्रांगण में संपन्न हुआ। वहां उपस्थित लोगों ने नवनियुक्त अधिकारी और उनके माता-पिता का नागरिक अभिनंदन किया।
पिता का अधूरा सपना बेटे ने किया साकार
उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत विवेक के पिता राजेश कुमार यादव ने भावुक होकर बताया कि वह मूल रूप से दुबहर के रामपुर टीढ़ी गांव के निवासी हैं। उन्होंने कहा, "हमारा सपना था कि एनडीए या सीडीएस पास कर सेना में अफसर बनें। कई परीक्षाएं दीं लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। आज जो मेरा अधूरा सपना था, उसे मेरे बेटे ने पूरा कर दिखाया। एक पिता के लिए इससे बड़े गर्व का दिन कोई नहीं हो सकता।" वहीं मां सुनैना यादव ने इस सफलता को बाबा के आशीर्वाद और बेटे के कड़े परिश्रम का फल बताया।
'कर्मभूमि कहीं भी हो, पहचान इसी माटी से'
अपनी इस उपलब्धि और गृह जनपद में मिले अभूतपूर्व प्यार पर नवनियुक्त लेफ्टिनेंट विवेक कुमार यादव ने कहा कि लखनऊ से बी.टेक करने के बावजूद उनकी वास्तविक पहचान बलिया की माटी से ही है।
क्षेत्र के युवाओं को सफलता का मूलमंत्र देते हुए उन्होंने कहा, "परिस्थितियों से घबराकर कभी हार न मानें। निराशा हर किसी को मिलती है, लेकिन दूसरों से शिकायत करने के बजाय खुद की कमियों में सुधार करें और निरंतर मेहनत करें। अगर इरादा पक्का है, तो मंजिल जरूर मिलेगी।"
(रिपोर्ट: सागर गुप्ता, बलिया)

