उग्र प्रदर्शन: इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ महामंत्री राहुल मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं ने कलेक्ट्रेट का किया घेराव।
अनोखा विरोध: कलेक्ट्रेट परिसर में शंख बजाकर और हनुमान चालीसा का पाठ कर दर्ज कराया विरोध, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन।
नेताओं को चेतावनी: यूजीसी नियमों, एससी-एसटी एक्ट व जातिगत आरक्षण पर चुप्पी साधने वाले मंत्रियों-सांसदों को चूड़ी और सिंदूर भेंट करने का ऐलान।
बलिया (सागर गुप्ता): विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों, एससी-एसटी एक्ट और जातिगत आरक्षण प्रणाली के विरोध में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में युवाओं का आक्रोश फूट पड़ा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय स्थित ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ महामंत्री राहुल मिश्रा के नेतृत्व में भारी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में शंखनाद और हनुमान चालीसा का पाठ कर अपना विरोध दर्ज कराया तथा जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
जाति नहीं, आर्थिक आधार पर मिले आरक्षण: राहुल मिश्रा
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता राहुल मिश्रा ने कहा कि सरकार एक ओर विकसित भारत के निर्माण का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाली संस्था यूजीसी नियमों को जातिगत आधार पर थोप रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में मांग की कि आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए और इसका आधार जाति न होकर आर्थिक स्थिति होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने एससी-एसटी एक्ट को कड़ा कानून बताते हुए इसके हो रहे दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की।
चुप बैठे सांसदों-मंत्रियों को भेंट करेंगे चूड़ी और सिंदूर
राहुल मिश्रा ने जनप्रतिनिधियों और सवर्ण समाज के नेताओं पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज बड़े-बड़े नेता युवाओं के हक और भविष्य पर चुप्पी साधे बैठे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "यदि जनप्रतिनिधियों ने इन मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद नहीं की, तो युवा जिले के हर गांव, गली और घर में जाकर लोगों को जागरूक करेंगे और ऐसे शांत बैठे मंत्रियों व सांसदों को चूड़ी और सिंदूर भेंट करेंगे।" उन्होंने मीडिया कर्मियों से भी अपील की कि वे जिले में आने वाले जनप्रतिनिधियों से आरक्षण व यूजीसी नियमों पर सवाल पूछें।
शंखनाद व हनुमान चालीसा से किया आगाह
कलेक्ट्रेट परिसर में शंखनाद और हनुमान चालीसा के पाठ पर छात्र नेता ने स्पष्ट किया कि हर लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञापन केवल कागजों तक सीमित न रह जाए, इसलिए युवाओं ने अपने बौद्धिक व सांस्कृतिक स्वरूप को सामने रखते हुए इस स्वाभिमानी अभियान की शुरुआत की है। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय युवा और छात्र उपस्थित रहे।

