सरकारी सिस्टम की पोल: बहरियाबाद के चकफरीद स्थित राजकीय यूनानी चिकित्सालय में चिकित्सक की अनुपस्थिति में बांटी जा रही दवाएं।
चपरासी का कबूलनामा: अस्पताल में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) ने खुद माना कि वही मरीजों को देता है दवा।
जांच की मांग: बिना डॉक्टर के परामर्श के दवा वितरण से मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़; ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की।
गाजीपुर (एकरार खान): जनपद गाजीपुर के बहरियाबाद क्षेत्र अंतर्गत चकफरीद स्थित राजकीय यूनानी चिकित्सालय में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। अस्पताल में चिकित्सक की मौजूदगी न रहने और मरीजों को इलाज के नाम पर रामभरोसे छोड़े जाने से स्थानीय लोगों में गहरा असंतोष है।
चपरासी खुद बांट रहा दवाइयां
अस्पताल में मरीजों को दवा दिए जाने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि अस्पताल में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) ने स्वयं मीडिया के सामने स्वीकार किया कि वह मरीजों को दवा देता है। वहीं, दूर-दराज के गांवों से इलाज कराने आ रहे मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में अक्सर डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते, जिसके कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ क्यों?
इस स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
1. यदि चिकित्सक अस्पताल में मौजूद नहीं रहते, तो मरीजों को दवाएं किसके परामर्श और निर्देश पर दी जा रही हैं?
2. क्या किसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को मरीजों की जांच करने और दवा वितरण करने का कानूनी अधिकार है?
3. यदि गलत दवा के सेवन से किसी मरीज के साथ कोई अनहोनी हो जाए, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने इस पूरे ढर्रे पर कड़ा आक्रोश जताते हुए मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी चिकित्सालयों में आने वाले गरीब व असहाय मरीजों को योग्य चिकित्सक से उचित परामर्श और इलाज मिलना चाहिए। अब देखना यह होगा कि आयुष एवं स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी इस मामले पर संज्ञान लेकर संबंधित लापरवाहों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

