हाईलाइट्स:
- अस्पताल परिसर बना अखाड़ा: दुबहड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट को ब्लॉक कर लगाया गया भव्य टेंट और कुर्सियां; लाउडस्पीकरों के शोर से बढ़े मरीज।
- विकास बनाम संवेदनशीलता: पीडब्ल्यूडी (PWD) की सड़क चौड़ीकरण योजना के शिलापट्ट अनावरण के लिए चुना गया अस्पताल का शांत क्षेत्र; उठे गंभीर सवाल।
- सोशल मीडिया पर किरकिरी: अस्पताल के वार्ड में इलाज कराते मरीजों और बाहर बजते डीजे-लाउडस्पीकर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से हो रहा वायरल।
दुबहड़/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत दुबहड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) परिसर से एक बेहद चौंकाने वाला और स्वास्थ्य सेवाओं की विधिक संवेदनशीलता को तार-तार करने वाला मामला प्रकाश में आया है। एक तरफ जहां अस्पताल के अंदरूनी वार्डों में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज शांति और इलाज की आस में तड़प रहे थे, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के मुख्य प्रशासनिक द्वार पर सूबे के परिवहन मंत्री के स्वागत में गगनभेदी लाउडस्पीकर और चुनावी अंदाज़ के नारे गूंज रहे थे। इस पूरे तमाशे और वीआईपी संस्कृति (VIP Culture) के आयोजन ने जिले की स्वास्थ्य विधिक गाइडलाइंस और मरीजों के अधिकारों पर बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल का मुख्य प्रवेश द्वार बना राजनीतिक मंच, एम्बुलेंस मार्ग हुआ ठप
प्राप्त जमीनी विवरण के अनुसार, सूबे के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह दुबहड़ क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा स्वीकृत दुबहड़ हॉस्पिटल से चंदवक होते हुए सोनवानी मार्ग से ढेलहवा बाबा स्थान तक मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुंदरीकरण कार्य का विधिक शिलान्यास करने पहुंचे थे। इस विधिक व सरकारी कार्यक्रम को भव्य रूप देने के चक्कर में स्थानीय आयोजकों ने दुबहड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट को ही पूरी तरह अवरुद्ध (जाम) कर दिया। अस्पताल परिसर के भीतर ही विशाल टेंट गाड़ दिया गया और सैकड़ों कुर्सियां बिछाकर उसे एक राजनीतिक जनसभा का स्वरूप दे दिया गया, जिसके चलते एम्बुलेंस और तीमारदारों के वाहनों को आने-जाने में भारी विधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
प्रतिदिन आते हैं २०० मरीज, लाउडस्पीकर की आवाज से मची खलबली
चौंकाने वाली बात यह है कि जिस 'साइलेंस जोन' (शांति क्षेत्र) में सुप्रीम कोर्ट के कड़े विधिक निर्देशानुसार हॉर्न बजाना भी वर्जित है, वहां बड़े-बड़े साउंड बॉक्स और लाउडस्पीकर पूरी क्षमता से बजाए जा रहे थे। इस संबंध में जब दुबहड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. एस. पी. कुशवाहा से बात की गई, तो उन्होंने कार्यक्रम के शोर पर सीधे बोलने से बचते हुए सड़क के विधिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस मार्ग के चौड़ीकरण से दुर्घटनाएं कम होंगी और मरीजों को अस्पताल लाने में एम्बुलेंस को आसानी होगी। उन्होंने यह भी विधिक जानकारी दी कि इस केंद्र पर प्रतिदिन १५० से २०० मरीज ओपीडी (OPD) सेवाओं के लिए आते हैं, जहां सुबह ८ से दोपहर २ बजे तक ओपीडी चलती है तथा २४ घंटे प्रसव (डिलीवरी) व आवश्यक विधिक मेडिकल जांचें उपलब्ध रहती हैं।
विकास तो ठीक, पर क्या जनसभा के लिए सिर्फ अस्पताल ही बचा था?
भले ही सड़कों का चौड़ीकरण और बुनियादी ढांचे का विकास एक सराहनीय और विधिक रूप से आवश्यक कार्य है, लेकिन जागरूक नागरिकों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का सवाल है कि क्या इस भारी-भरकम जनसभा को आयोजित करने के लिए पूरे दुबहड़ क्षेत्र में अस्पताल परिसर ही एकमात्र स्थान बचा था? स्वास्थ्य केंद्र जैसे अति-संवेदनशील स्थान पर जहां प्रसूता महिलाओं और गंभीर मरीजों को मानसिक शांति व आराम की सख्त जरूरत होती है, वहां इस तरह के कोलाहलपूर्ण आयोजन की विधिक अनुमति आखिर किस अधिकारी ने दी? इस प्रशासनिक लापरवाही को लेकर स्थानीय जनता में दबी जुबान से भारी आक्रोश व्याप्त है।
फिलहाल, अस्पताल के मुख्य गेट पर सजे इस भव्य राजसी मंच और अंदर वार्ड में शोर से परेशान मरीजों का एक विधिक व आंखें खोलने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या बलिया जिला प्रशासन भविष्य में स्वास्थ्य संस्थानों की विधिक गरिमा और मरीजों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ऐसे आयोजनों पर कोई सख्त विधिक प्रतिबंध या दिशा-निर्देश जारी करता है या नहीं।
