हाईलाइट्स:
- हाई अलर्ट पर प्रशासन: लखनऊ की दुखद घटना के बाद जिलाधिकारी के कड़े निर्देश पर पूरे बलिया जनपद में शुरू हुआ सघन फायर सेफ्टी ऑडिट।
- अस्पताल में मॉकड्रिल: जिला चिकित्सालय के सुरक्षा गार्डों और स्वास्थ्य कर्मियों को आग बुझाने और बचाव कार्य का दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण।
- इमरजेंसी के गुरुमंत्र: फायर विभाग के सेकंड ऑफिसर संजय कुमार ने बताया— हर १५ दिन पर उपकरणों की विधिक जांच है अनिवार्य।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड से सबक लेते हुए बलिया जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद और अलर्ट मोड पर नजर आ रहा है। भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना या विधिक लापरवाही को रोकने के लिए जिलाधिकारी (डीएम) के कड़े निर्देशों के अनुपालन में परिवहन और आपदा प्रबंधन विभागों द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार ३० जून २०२६ को फायर ब्रिगेड की टीम ने बलिया जिला चिकित्सालय (डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल) परिसर में एक सघन विधिक मॉकड्रिल और अग्निशमन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। इस दौरान अस्पताल के सुरक्षा गार्डों, विधिक कर्मचारियों और पैरामेडिकल स्टाफ को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लाइव गुर सिखाए गए।
फायर एक्सटिंग्विशर की तकनीकी बारिकियों से कराया अवगत
प्राप्त आधिकारिक व विधिक विवरण के अनुसार, जिला अस्पताल में आयोजित इस विधिक मॉकड्रिल के दौरान फायर ब्रिगेड के जवानों ने अस्पताल कर्मियों के सामने लाइव प्रदर्शन कर आग पर काबू पाने के तरीके प्रदर्शित किए। कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में मौजूद फायर विभाग के सेकंड ऑफिसर संजय कुमार ने वहां उपस्थित स्टाफ को संबोधित करते हुए उपकरणों के विधिक व तकनीकी संचालन की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राथमिक स्तर पर आग बुझाने वाले 'फायर एक्सटिंग्विशर सिलेंडर' के भीतर विशेष गैस और केमिकल पाउडर का विधिक मिश्रण होता है, जो ऑक्सीजन के प्रवाह को रोककर आग को तुरंत नियंत्रित करता है।
हर १५ दिन पर सिलेंडरों की विधिक चेकिंग बेहद जरूरी: सेकंड ऑफिसर
सेकंड ऑफिसर संजय कुमार ने अपनी आधिकारिक 'बाइट' (वक्तव्य) में इस बात पर विशेष जोर दिया कि केवल उपकरणों का लगा होना ही विधिक सुरक्षा की गारंटी नहीं है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और उपस्थित कर्मचारियों को कड़े विधिक निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक सरकारी व निजी भवन में लगे फायर सिलेंडरों की भौतिक व तकनीकी स्थिति को हर १५ दिन पर अनिवार्य रूप से चेक किया जाना चाहिए। ऐसा करने से यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी आकस्मिक आपातकाल या विधिक संकट के समय ये उपकरण पूरी क्षमता के साथ सही तरीके से काम कर सकें और जान-माल का नुकसान न हो।
जिले के सभी भीड़भाड़ वाले विधिक संस्थानों का होगा सेफ्टी ऑडिट
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिलाधिकारी के विधिक आदेश पर यह अभियान केवल जिला अस्पताल तक सीमित नहीं रहेगा। लखनऊ जैसी बड़ी विधिक दुर्घटना की पुनरावृत्ति बलिया जनपद में न हो, इसके लिए जिले के सभी सरकारी कार्यालयों, कलेक्ट्रेट, विकास भवन, बहुमंजिला इमारतों, सिनेमाघरों, मॉल और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले व्यापारिक व शैक्षणिक संस्थानों में भी सघन फायर सेफ्टी ऑडिट (Fire Safety Audit) और मॉकड्रिल कराई जा रही है। मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत कड़ी विधिक कार्रवाई करने की चेतावनी भी जारी की गई है।
