हाईलाइट्स:
- नियमों की धज्जियां उठाने का आरोप: क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम फेफना में 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा पदों पर बैठाने का मामला।
- डीएम से शिकायत: डीके फाउंडेशन एंड फ्रीडम ह्यूमन राइट्स के संजीव कुमार बाबा की शिकायत पर जिलाधिकारी ने बैठाई जांच।
- वित्तीय लेन-देन पर सवाल: करोड़ों रुपये की देनदारियों, बैंक खातों, महिला कर्मचारियों से अन्याय और विशेष ऑडिट कराने की उठी मांग।
बलिया : जनपद बलिया के क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम, फेफना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महात्मा गांधी के आदर्शों और सिद्धांतों पर चलने का दावा करने वाली इस संस्था में 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुनर्नियुक्त कर महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियां सौंपने के आरोप लगे हैं। इस सनसनीखेज मामले में डीके फाउंडेशन एंड फ्रीडम ह्यूमन राइट्स के चीफ ऑब्जर्वर संजीव कुमार बाबा ने जिलाधिकारी से लिखित शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
सेवा नियमों की अनदेखी और अधिकारों का हनन
शिकायतकर्ता संजीव कुमार बाबा ने आरोप लगाया है कि संस्था के सेवा नियमावली के अनुसार 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर कर्मचारी की सेवा स्वतः समाप्त हो जाती है। इसके बावजूद कुछ चहेते सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त कर प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दे दिए गए हैं। शिकायत का कहना है कि इस मनमानी से न केवल संस्था के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि संस्था में कार्यरत अन्य योग्य कर्मचारियों के अधिकारों का भी हनन हो रहा है।
करोड़ों की देनदारियों और वित्तीय लेन-देन पर उठे सवाल
शिकायत में गांधी आश्रम के वित्तीय लेन-देन, संचालन प्रक्रिया, बैंक खातों और करोड़ों रुपये की देनदारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि वर्षों से संस्था का पूरा नियंत्रण कुछ खास लोगों के हाथों में केंद्रित है, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। शिकायतकर्ता ने संस्था के समस्त वित्तीय अभिलेखों का विशेष ऑडिट (Special Audit) कराने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
महिला कर्मचारियों से अन्याय और एफआईआर की मांग
संजीव कुमार बाबा ने संस्था में महिला कर्मचारियों के साथ कथित अन्याय होने और पारदर्शिता की जगह मनमानी का माहौल होने का भी गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
