हाईलाइट्स:
- स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार: महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में 10 अतिरिक्त डायलिसिस बेडों का हुआ भव्य शुभारंभ।
- बढ़ी अस्पताल की क्षमता: डायलिसिस यूनिट में बेडों की कुल संख्या 15 से बढ़कर अब हुई 25; लंबी वेटिंग लिस्ट से किडनी रोगियों को मिलेगी बड़ी राहत।
- रोजाना 75 मरीजों का होगा इलाज: डीएम अनुपम शुक्ला और प्रधानाचार्य डॉ. आनंद मिश्रा के अनुसार, अब प्रतिदिन 45 की जगह 75 गंभीर मरीजों को मिल सकेगी सुलभ चिकित्सा।
गाजीपुर (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद और आस-पास के सीमावर्ती जिलों के किडनी (वृक्क) रोग से पीड़ित गंभीर मरीजों के लिए राहत की एक बहुत बड़ी और सुखद खबर सामने आ रही है। जिला मुख्यालय पर स्थित महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय (मेडिकल कॉलेज) में डायलिसिस सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। मरीजों के बढ़ते दबाव और लंबी प्रतीक्षा सूची को देखते हुए शनिवार 20 जून 2026 को अस्पताल के डायलिसिस वार्ड में 10 नए और अत्याधुनिक डायलिसिस बेडों का विधिवत शुभारंभ किया गया है। इस विस्तार के बाद अब गरीब मरीजों को डायलिसिस के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर या बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
10 बेड से शुरू हुआ था सफर, अब 25 बेड की हुई विशाल यूनिट
प्राप्त विवरण के अनुसार, गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस यूनिट की शुरुआत जुलाई 2022 में महज 10 बेडों के साथ की गई थी। पूर्वांचल और गाजीपुर क्षेत्र में किडनी रोगियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए बाद में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के माध्यम से 5 अतिरिक्त बेडों की व्यवस्था कराई गई थी, जिससे यूनिट की क्षमता 15 बेड की हो गई थी।
इसके बावजूद, निशुल्क और बेहतर इलाज होने के कारण अस्पताल में मरीजों की आमद लगातार बढ़ती रही, जिसके चलते गंभीर मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए कई-कई दिनों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था। इसी समस्या के स्थाई समाधान के लिए जिला प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन के प्रयासों से अब 10 अतिरिक्त नए डायलिसिस बेडों की सुविधा को बढ़ा दिया गया है, जिससे मेडिकल कॉलेज की कुल क्षमता अब बढ़कर 25 बेड की हो गई है।
प्रतीक्षा सूची होगी खत्म, प्रतिदिन 75 मरीजों का होगा मुफ्त डायलिसिस
इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विस्तार की रूपरेखा साझा करते हुए गाजीपुर के जिलाधिकारी (DM) अनुपम शुक्ला ने बताया कि वर्तमान समय में चिकित्सालय में संसाधनों की सीमा के कारण प्रतिदिन लगभग 45 मरीजों का ही डायलिसिस किया जा रहा था। लेकिन आज से 25 बेड पूरी तरह क्रियाशील हो जाने के बाद, अब प्रतिदिन लगभग 75 मरीजों को डायलिसिस की सुलभ सुविधा सीधे उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शामिल मरीजों को तात्कालिक और बड़ी राहत मिलेगी तथा समय पर विधिक उपचार सुनिश्चित हो सकेगा।
आसपास के जिलों के किडनी रोगियों को भी मिलेगा सीधा लाभ: प्रधानाचार्य
वहीं, मेडिकल कॉलेज गाज़ीपुर के प्रधानाचार्य डॉ. आनंद मिश्रा ने बताया कि डायलिसिस यूनिट का यह विस्तार न केवल गाजीपुर जनपद के स्थानीय निवासियों के लिए, बल्कि पड़ोसी जिलों (जैसे बलिया, मऊ, और चंदौली) से आने वाले किडनी रोगियों के लिए भी वरदान साबित होगा। अब मरीजों को डायलिसिस के लिए हफ़्तों लंबे और जानलेवा इंतजार का सामना बिल्कुल नहीं करना पड़ेगा। उन्हें अपने ही नजदीकी क्षेत्र में पूर्णतः सुरक्षित, बेहतर एवं सुलभ उपचार निशुल्क और पारदर्शी व्यवस्था के तहत उपलब्ध हो सकेगा। प्रशासन का लक्ष्य अस्पताल की सुविधाओं को कॉरपोरेट स्तर का बनाना है।
