हाईलाइट्स:
- एनकाउंटर पर खड़े किए सवाल: सपा के युवा नेता भानु दुबे का बड़ा आरोप— सरेंडर करने के बाद भरत तिवारी को सोची-समझी साजिश के तहत मार दिया गया।
- प्रशासन को सख्त चेतावनी: भानु दुबे ने दो टूक कहा— सत्ता आती-जाती रहती है, यूपी हो या बिहार; पुलिस प्रशासन किसी एक समुदाय विशेष को टारगेट करना बंद करे।
- पीड़ित परिवार को समर्थन: सपा नेता का संकल्प— जीवन भर भरत तिवारी के पीड़ित परिवार के साथ खड़ा रहूंगा, हर संभव आर्थिक और कानूनी मदद का किया ऐलान।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): बिहार के बिलौटी गांव में पुलिस द्वारा किए गए भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर और मौत के मामले ने अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी भारी तूल पकड़ लिया है। बलिया जनपद के कद्दावर समाजवादी पार्टी (सपा) के युवा नेता भानु दुबे ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश की सत्ता व पुलिस प्रशासन पर बेहद तीखे और गंभीर प्रहार किए हैं। भानु दुबे ने इस एनकाउंटर को पूरी तरह से एक सोची-समझी साजिश और समाज के नौजवानों व हक की आवाज को बेरहमी से दबाने की कोशिश करार दिया है। मीडिया से रूबरू होने के बाद भानु दुबे भारी समर्थकों और काफिले के साथ मृतक भरत तिवारी के पैतृक गांव बिलौटी (बिहार) के लिए रवाना हो गए हैं।
"सेना के नियम भी सरेंडर करने वाले को मारने की इजाजत नहीं देते"— भानु दुबे
प्रेस वार्ता के दौरान अपने गुस्से का इजहार करते हुए सपा नेता भानु दुबे ने कहा कि भरत तिवारी कोई अपराधी नहीं, बल्कि समाज के शोषितों की लड़ाई लड़ने वाले एक सच्चे योद्धा थे। उन्होंने पुलिस की थ्योरी पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि, "अगर प्रशासन के कथनानुसार भरत तिवारी मानसिक रूप से विक्षिप्त थे, तो पुलिस को उन्हें मेंटल हॉस्पिटल (मानसिक चिकित्सालय) या फिर जेल भेजना चाहिए था, उनका सीधे एनकाउंटर क्यों कर दिया गया?"
भानु दुबे ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने पूरी तरह सरेंडर (आत्मसमर्पण) कर दिया था, लेकिन प्रशासन ने उन्हें हिरासत में लेकर मार डाला। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय थल सेना के कड़े नियमों के मुताबिक भी यदि कोई दुर्दांत आतंकवादी सरेंडर कर देता है, तो उसे भी जान से नहीं मारा जाता, फिर एक सामाजिक युवक के साथ ऐसा क्रूर व्यवहार क्यों किया गया?
यूपी-बिहार में एकपक्षीय कार्रवाई और दमन बंद करे पुलिस
सपा युवा नेता ने पुलिस प्रशासन को कड़े और चेतावनी भरे लहजे में आगाह करते हुए कहा कि, "नेता और सत्ता आज है, कल नहीं रहेगी, सरकारें आती-जाती रहती हैं; लेकिन पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को हमेशा यहीं रहकर अपनी सेवाएं देनी हैं।" उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि चाहे बिहार हो या उत्तर प्रदेश, प्रशासन किसी एक जाति या समुदाय (ब्राह्मण समाज) को दुर्भावनाग्रस्त होकर टारगेट करना तत्काल बंद करे। जो लोग गरीबों, मजलूमों और समाज के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्हें चिन्हित करके उनका प्रशासनिक दमन करना बेहद निंदनीय है और इसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पटना हॉस्पिटल कांड और चंदन मिश्रा हत्याकांड का किया जिक्र
अपने बयानों को तार्किक रूप से रखते हुए भानु दुबे ने पटना के चर्चित हॉस्पिटल कांड और चंदन मिश्रा हत्याकांड का भी प्रमुखता से हवाला दिया। उन्होंने व्यवस्था पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि, "सूबे का मोस्ट वांटेड किलर शेरू सिंह, जो जेल की सलाखों के पीछे सुरक्षित बैठकर सरेआम हत्याएं करवाता है, उसका तो एनकाउंटर नहीं होता; लेकिन समाज की बेबाक आवाज उठाने वाले सवर्ण युवाओं को चुन-चुनकर मार दिया जाता है।"
पीड़ित परिवार के साथ जीवन भर खड़ा रहने का लिया संकल्प
भानु दुबे ने भावुक और आक्रामक अंदाज में संकल्प लेते हुए घोषणा की कि जब तक उनके शरीर में प्राण हैं, वह मृतक भरत तिवारी के पीड़ित परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर प्रकार की आर्थिक मदद करने और इस लंबी कानूनी लड़ाई का पूरा खर्च उठाने का बड़ा ऐलान किया है। इस कथित एनकाउंटर घटना के बाद पूर्वांचल और बिहार के ब्राह्मण समाज में फैले भारी आक्रोश को देखते हुए क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में सियासी हलचल और चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म हो गया है।
