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बलिया: मालदह चट्टी में तालाब पर अवैध कब्जे और मंदिर विस्थापन को लेकर भारी बवाल; एमएलसी की चिट्ठी के बाद भी प्रधान बेपरवाह, ग्रामीणों की आर-पार की चेतावनी


 हाईलाइट्स:

• सार्वजनिक संपत्ति पर डाका: सिकंदरपुर तहसील के मालदह चट्टी में ग्राम सभा के बेशकीमती पोखरे की जमीन पर ५०×२० फीट में पक्के अवैध निर्माण का आरोप।

• प्रधान पर गंभीर आरोप: ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान छोटे लाल कनौजिया पर लगाया भू-माफिया को संरक्षण देने और स्वयं मंदिर की जमीन हड़पने का आरोप।

• आर-पार की लड़ाई: राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा (MLC) की चिट्ठी के बाद भी सुनवाई न होने से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा; बिना ठोस विकल्प मंदिर हटाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी।

सिकंदरपुर/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र की ग्राम सभा मालदह चट्टी में सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध अतिक्रमण व भू-माफियाओं के बढ़ते हौसलों को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सड़क चौड़ीकरण की जद में आए प्राचीन विश्वकर्मा मंदिर के विस्थापन और ग्राम सभा की बेशकीमती पोखरे की जमीन पर हो रहे पक्के अवैध निर्माण को लेकर गांव में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। आक्रोशित ग्रामीणों ने उप जिला अधिकारी (SDM) सिकंदरपुर को शिकायती पत्र सौंपकर तत्काल अवैध निर्माण गिराने और दोषियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है।

ग्राम प्रधान छोटे लाल कनौजिया की मिलीभगत से तालाब पर पक्का निर्माण!

तहसील मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने शिकायती पत्र के माध्यम से ग्राम प्रधान छोटे लाल कनौजिया पर बेहद संगीन और सीधे आरोप मढ़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के ही एक रसूखदार मंटू (पुत्र ननकू) द्वारा ग्राम सभा के सार्वजनिक पोखरे (तालाब) की जमीन के करीब ५०×२० फीट के बड़े हिस्से पर धड़ल्ले से पक्का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि जिस प्रधान का संवैधानिक दायित्व ग्राम समाज की जमीनों की रक्षा करना है, वही प्रधान अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भू-माफियाओं को मौन सहमति और खुला संरक्षण दे रहे हैं, जिससे सरकारी संपत्ति का वजूद खतरे में है।

विश्वकर्मा मंदिर शिफ्टिंग को लेकर खड़ा हुआ नया विवाद

यह पूरा मामला उस समय और अधिक संवेदनशील हो गया जब बलिया-बेल्थरा रोड के चौड़ीकरण की जद में आए प्राचीन विश्वकर्मा मंदिर को हटाने का मुद्दा सामने आया। ग्रामीणों के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग और प्रशासन ने पूर्व में मंदिर को सम्मानजनक तरीके से विस्थापित करने के लिए ग्राम समाज की ही ४०×४० फीट की एक जगह चिन्हित की थी।

आरोप है कि जब ग्रामीणों ने चिन्हित जमीन पर मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कराया, तो ग्राम प्रधान ने पद की धौंस दिखाते हुए काम रुकवा दिया और मंदिर को मात्र १० फीट की संकरी जगह में बनाने का तानाशाही दबाव बनाने लगे। ग्रामीणों का सीधा दावा है कि उस चिन्हित सरकारी जमीन पर खुद ग्राम प्रधान और उनके सगे भाई ने अवैध कब्जा कर रखा है, जिसके कारण वे भगवान के मंदिर के लिए नियमानुसार जगह छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

वाराणसी के एमएलसी व राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा की चिट्ठी भी बेअसर

ग्रामीणों ने प्रशासनिक उपेक्षा पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए बताया कि इस घोर अन्याय और धार्मिक आस्था के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री व एमएलसी (वाराणसी) हंसराज विश्वकर्मा से भी गुहार लगाई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय एमएलसी ने अपने शासकीय लेटर पैड पर बलिया जिला प्रशासन को त्वरित कार्रवाई व मंदिर संरक्षण के लिए कड़ा पत्र भी लिखा। लेकिन, दुर्भाग्यवश स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और ग्राम प्रधान की हठधर्मिता के आगे सरकार के मंत्री की चिट्ठी भी बेअसर साबित हो रही है।

प्रशासन ने की जबरन कार्रवाई तो सड़क पर उतरेगा पूरा समाज

मालदह चट्टी के आक्रोशित प्रबुद्ध जनों और विश्वकर्मा समाज ने दो टूक शब्दों में शासन-प्रशासन को आर-पार की अंतिम चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि तहसील प्रशासन ने ग्राम प्रधान के दबाव में आकर बिना किसी उचित, बड़े और ठोस विकल्प के प्राचीन विश्वकर्मा मंदिर को जबरन हटाने या जमींदोज करने की कोशिश की, तो इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई की तो पूरा समाज उग्र होकर कलेक्ट्रेट का घेराव करेगा और शासन-प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरकर चक्का जाम करने को मजबूर होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

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