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बलिया: निर्भया के गांव मेड़वरा कलां में दम तोड़ रहा 'दामिनी अस्पताल'; सड़क के लिए बेटियों का ५ साल से संघर्ष, AAP सांसद संजय सिंह ने सीएम योगी को लिखा पत्र


 

हाईलाइट्स:

  • सिस्टम की विडंबना: देश को महिला सुरक्षा का कानून देने वाली 'निर्भया' के पैतृक गांव का अस्पताल खुद लाचार; मेड़वरा कलां में ५ साल से सड़क को तरस रही हैं बेटियां।
  • सांसद संजय सिंह का कड़ा रुख: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखा पत्र; कहा— फंड नहीं है तो बताएं, चंदा जुटाकर बनवाएंगे सड़क।
  • अस्पताल में उगा जंगल: 'बालिका बंधुता मंच' की छात्राओं ने खोला मोर्चा; आरोप— संडे टू संडे छुट्टी मनाने आते हैं डॉक्टर, बारिश में हफ्तों गायब।

बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन द्वारा विकास व बुनियादी सुविधाओं को लेकर किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों के बीच बलिया जनपद से एक बेहद झकझोर देने वाली जमीनी हकीकत सामने आई है। यह मामला किसी साधारण इलाके का नहीं, बल्कि देश में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की अलख जगाने वाली 'निर्भया' के पैतृक गांव मेड़वरा कलां का है। निर्भया के सम्मान और स्मृति में गांव में बना 'दामिनी अस्पताल' और वहां तक पहुंचने वाला मार्ग आज खुद प्रशासनिक उपेक्षा के आंसू बहा रहा है। इस गंभीर जनहित के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक बेहद कड़ा पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

"सड़क नहीं गड्ढा है, बरसात में मछली पालन कर लें"— छात्राओं का फूटा दर्द

​बलिया पहुंचे आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व सांसद संजय सिंह के प्रतिनिधि सर्वेश मिश्रा ने इस बदहाली को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान पिछले ५ वर्षों से गांव के विकास और सड़क निर्माण की जमीनी लड़ाई लड़ रही 'बालिका बंधुता मंच' की छात्राएं भी वहां मौजूद रहीं।

​मंच से जुड़ी एक छात्रा ने व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, "हम इसे सड़क नहीं, बल्कि जानलेवा गड्ढा कहते हैं। मार्ग के हालात इतने भयावह हैं कि बरसात के दिनों में वहां आसानी से मछली पालन किया जा सकता है। हम बेटियां पिछले ५ साल से पदयात्रा कर रही हैं, जिला अधिकारी (DM) से लेकर मुख्यमंत्री (CM) तक की चौखट पर पत्र भेज चुके हैं, लेकिन सिस्टम की बहरी दीवारों तक हमारी आवाज नहीं पहुंची। बारिश के दिनों में न तो कोई मरीज अस्पताल पहुंच पाता है और न ही बच्चे स्कूल जा पाते हैं।"

अस्पताल परिसर में उगा जंगल, 'संडे टू संडे' आते हैं डॉक्टर

​छात्राओं और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि दामिनी अस्पताल केवल कागजों पर चल रहा है। वर्तमान में पूरा अस्पताल परिसर झाड़ियों और घने जंगल में तब्दील हो चुका है। डॉक्टरों और स्टाफ के लिए बने सरकारी आवासों का ताला आज तक खुला ही नहीं। लाखों की लागत से बनी पानी की टंकी उद्घाटन के बाद से ही सूखी पड़ी है। ग्रामीणों ने संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टर यहाँ मरीजों का सुचारू इलाज करने नहीं, बल्कि 'संडे टू संडे' (रविवार से रविवार) केवल हाजिरी लगाने और छुट्टी मनाने आते हैं, और जैसे ही पहली बारिश होती है, वे हफ्तों के लिए मुख्यालय से गायब हो जाते हैं।

"पैसा नहीं है तो सरकार बताए, हम चंदा जुटाकर सड़क बनवाएंगे"

​इस पूरे संवेदनशील मामले पर 'आप' के राष्ट्रीय प्रवक्ता सर्वेश मिश्रा ने यूपी की वर्तमान और पूर्ववर्ती सरकारों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि हमारे सांसद संजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस बदहाली पर कड़ा विधिक और राजनीतिक रुख अपनाया है।

​सांसद ने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि उत्तर प्रदेश सरकार के पास इस ऐतिहासिक गांव की सड़क बनाने के लिए फंड की कमी है, तो प्रशासन लिखित में अपनी लाचारी व्यक्त करे। संजय सिंह ने घोषणा की कि भले ही वह दिल्ली से राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन बलिया की इन संघर्षशील बेटियों के हक के लिए वह खुद चंदा इकट्ठा करेंगे और जन सहयोग से इस सड़क का निर्माण करवा कर दिखाएंगे।

सिस्टम की बेरुखी बनाम बेटियों का हौसला

​जब मेड़वरा कलां के स्थानीय जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार नेता चुनाव जीतने के बाद वादे करके गायब हो गए, तब वहां की बेटियों ने हार मानने के बजाय 'बालिका बंधुता मंच' का गठन किया। ये ग्रामीण छात्राएं आज एक साथ दो मोर्चों पर लड़ रही हैं— एक तरफ अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर रही हैं, तो दूसरी तरफ अपने गांव और अस्पताल के हक के लिए सड़कों पर उतरकर व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। अब देखना यह है कि सांसद संजय सिंह के पत्र और बेटियों के इस ५ साल पुराने आंदोलन के बाद बलिया का जिला प्रशासन जागता है या फिर यह ऐतिहासिक गांव ऐसे ही उपेक्षा के अंधेरे में रहने को मजबूर रहेगा।

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