हाईलाइट्स:
- आंदोलन का पांचवां दिन: दुबहर क्षेत्र के ओझा कछुआ/कछुआ खास में अंडरपास की मांग को लेकर ग्रामीणों का क्रमिक अनशन जारी।
- बिगड़ी तबीयत: सोमवार से धरने पर बैठे आंदोलनकारी आजाद भोला पांडे की शुक्रवार को हालत नाजुक; समय पर एम्बुलेंस न मिलने पर बाइक से पहुंचाया गया अस्पताल।
- ग्रामीणों की मांग: एनएच-31 से पीडब्ल्यूडी रोड को जोड़ने वाले मार्ग पर अंडरपास न बनने से कटेगा गांव का संपर्क, किसानों और बच्चों को होगी भारी परेशानी।
कछुआ खास/दुबहर, बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): बलिया जनपद के दुबहर क्षेत्र अंतर्गत ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के विरोध और अंडरपास की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने अब गंभीर रूप ले लिया है। ओझा कछुआ और कछुआ खास गांव के पास चल रहे क्रमिक अनशन का आज (12 जून 2026, शुक्रवार) पांचवां दिन है। इसी बीच सोमवार 8 जून से लगातार धरने पर बैठे प्रमुख अनशनकारी आजाद भोला पांडे की शुक्रवार को अचानक तबीयत बेहद बिगड़ गई। इस घटना के बाद धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों और साथी प्रदर्शनकारियों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
समय पर नहीं मिली एम्बुलेंस, साथी बाइक पर बैठाकर भागे अस्पताल
प्रत्यक्षदर्शियों और साथी आंदोलनकारियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया कि कछुआ खास में पिछले 5 दिनों से शांतिपूर्ण क्रमिक अनशन चल रहा है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा मौके पर किसी एम्बुलेंस या मेडिकल टीम की व्यवस्था नहीं की गई थी। शुक्रवार को जब भोला पांडे अचानक अचेत होने लगे, तो आपातकालीन स्थिति में समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। मजबूरन साथी अनशनकारियों ने उन्हें अपनी मोटरसाइकिल पर बीच में बैठाकर किसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) दुबहर पहुंचाया।
सीएचसी दुबहर में तैनात चिकित्सकों ने भोला पांडे की प्राथमिक जांच की। डॉक्टरों ने उनके शरीर में आ रही गंभीर गिरावट और नाजुक स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार देकर तत्काल जिला अस्पताल बलिया के लिए रेफर कर दिया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है।
क्यों अड़े हैं ग्रामीण? क्या है अंडरपास का पूरा विवाद?
आंदोलन कर रहे कछुआ खास और आसपास के ग्रामीणों की मांग है कि नेशनल हाईवे-31 (NH-31) से होते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा जो मुख्य विलेज रोड बनाई गई है, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के चलते वह रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि:
- अगर पीडब्ल्यूडी की इस मुख्य सड़क पर अंडरपास (Underpass) नहीं बनाया गया, तो पूरे गांव का मुख्य मार्ग से संपर्क हमेशा के लिए कट जाएगा।
- अंडरपास न होने की स्थिति में स्थानीय ग्रामीणों, खेतों में जाने वाले किसानों, मवेशियों और रोज़ाना स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ेगा और आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का एलान
आंदोलनकारियों का आरोप है कि 5 दिन बीत जाने के बाद भी शासन या प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी सुध लेने धरना स्थल पर नहीं पहुंचा, जिससे मरीज की जान जोखिम में पड़ गई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और हंगामे पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या आश्वासन सामने नहीं आया है। दूसरी तरफ, अस्पताल में भर्ती साथी की गंभीर स्थिति के बावजूद आंदोलनकारी ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी अंडरपास की जायज मांग पूरी नहीं होती, तब तक यह क्रमिक अनशन और आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
