हाईलाइट्स:
• भव्य व्यास पीठ पूजन: सूबे के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने माता तेतरी देवी और भाई धर्मेंद्र सिंह संग किया पंडित प्रदीप मिश्रा का स्वागत व पूजन।
• शिव परिवार का रहस्य: कथा के पांचवें दिन सीहोर वाले महाराज ने समझाया कि क्यों सिर्फ महादेव के कुनबे को ही कहा जाता है 'परिवार'; शरणागति की महिमा का किया वर्णन।
• देर रात मंदिरों में दर्शन: कड़ी सुरक्षा के बीच बाबा बालेश्वर नाथ और महर्षि भृगु मंदिर पहुंचे पंडित प्रदीप मिश्रा; जल चढ़ाने को लेकर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत दिऊली स्थित बाबा बालखंडी नाथ धाम में चल रही भव्य नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सूबे के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा (सीहोर वाले) ने शरणागति, श्रेष्ठ संगति और 'शिव परिवार' की महिमा का अद्भुत वर्णन किया। कथा की शुरुआत से पूर्व मुख्य यजमान परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, उनकी पूज्य माता तेतरी देवी, अनुज धर्मेंद्र सिंह तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने विधि-विधान से व्यासपीठ का पूजन-अर्चन कर पंडित प्रदीप मिश्रा का भव्य स्वागत किया।
माता-पिता, गुरु और शिव की शरण में रहने वाला ही पाता है परम आनंद
अपने आध्यात्मिक प्रवचन में पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को जीवन की सार्थकता का दिव्य संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता, गुरु और देवाधिदेव महादेव की शरण में रहने वाला व्यक्ति ही जीवन में वास्तविक सुख, शांति और परम आनंद को प्राप्त करता है।
• मछली और जल का जीवंत उदाहरण: महाराज श्री ने उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार एक मछली जल के बिना जीवित नहीं रह सकती, ठीक उसी प्रकार मनुष्य भी ईश्वर की भक्ति और अपने उच्च संस्कारों की शरण में रहकर ही अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। शरणागति ही इंसान के जीवन की सही दिशा तय करती है।
• संगति से बढ़ता है मूल्य: उन्होंने बल देकर कहा कि भगवान शिव की शरण में पहुंचने वाला हर जीव 'शिवमय' हो जाता है। जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सोना बनता है, वैसे ही महादेव की संगति से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं।
द्रौपदी के स्मरण और माता पार्वती के बाल्यकाल का प्रसंग
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने महाभारत का बेहद मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि द्रौपदी के रोम-रोम में भगवान श्रीकृष्ण का वास था, इसीलिए संकट के समय उनकी एक पुकार पर द्वारकाधीश स्वयं सहायता के लिए दौड़ पड़े। इसके साथ ही उन्होंने माता पार्वती के बाल्यकाल का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि वे बाल्यावस्था से ही शिव के प्रति समर्पित थीं और पार्थिव शिवलिंग बनाकर आराधना करती थीं। दृढ़ विश्वास, अटूट भक्ति और पूर्ण समर्पण ही ईश्वर को पाने का सबसे सरल मार्ग है।
केवल शिव का ही क्यों कहलाता है 'परिवार'? उठाया रहस्य से पर्दा
श्रद्धालुओं की जिज्ञासा को शांत करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने इस बात का रहस्योद्घाटन किया कि आखिर संपूर्ण ब्रह्मांड में केवल महादेव के कुनबे को ही विशेष रूप से "शिव परिवार" की संज्ञा क्यों दी गई है। उन्होंने समझाया कि भगवान शिव का परिवार परस्पर विरोधी स्वभाव (जैसे- सिंह, बैल, चूहा, मयूर, सर्प) के बावजूद अद्वितीय प्रेम, त्याग, असीम समर्पण और स्वीकार्यता का सबसे बड़ा प्रतीक है। शिव परिवार पूरे विश्व को राष्ट्रीय एकता, सहिष्णुता, आपसी सामंजस्य और पारिवारिक मूल्यों का सबसे बड़ा संदेश देता है।
देर रात बाबा बालेश्वर और भृगु मंदिर पहुंचे महाराज, मच गई अफरा तफरी
कथा समाप्ति के उपरांत, देर रात को अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बलिया नगर के ऐतिहासिक बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर और सनातन संस्कृति के केंद्र महर्षि भृगु मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। उनके साथ परिवहन मंत्री के अनुज धर्मेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। जैसे ही श्रद्धालुओं को भोर और देर रात में पंडित प्रदीप मिश्रा के मंदिर पहुंचने की भनक लगी, कड़ाके की सुरक्षा के बावजूद लोगों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। स्थिति तब बेहद असहज और अफरा-तफरी वाली हो गई जब भावविभोर होकर लोग शिवलिंग के बजाय स्वयं पंडित प्रदीप मिश्रा पर ही जल अर्पित करने लगे। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को संभाला और पूजन संपन्न कराया।

