हाईलाइट्स:
सड़क उखाड़कर छोड़ी: बेरूआरबारी ब्लॉक के हरिपुर सुखपुरा में 45 दिनों से नाली का निर्माण अधूरा, मुख्य मार्ग उखड़ने से 2 हजार की आबादी बेबस।
भ्रष्टाचार का आरोप: ग्रामीणों ने घटिया ईंट, सीमेंट व बालू के इस्तेमाल का लगाया आरोप; मौके से गायब रहते हैं ठेकेदार व जेई।
हादसों का सबब: दो मासूम बच्चों समेत आधा दर्जन लोग गिरकर घायल; स्कूल बंद, कलेक्ट्रेट घेराव व चुनाव बहिष्कार की दी चेतावनी।
सुखपुरा/बलिया : जनपद बलिया के विकास खंड बेरूआरबारी अंतर्गत ग्राम हरिपुर सुखपुरा में विकास कार्य का दावा ग्रामीणों के लिए आफत बन गया है। गांव के मुख्य मार्ग को जेसीबी मशीन लगाकर पूरी तरह उखाड़ दिया गया है और पिछले लगभग 45 दिनों से नाली का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। कार्यदायी संस्था की इस धीमी रफ्तार और घोर लापरवाही के कारण लगभग 2 हजार की आबादी वाला यह पूरा गांव मुख्य धारा से अलग-थलग पड़ गया है।
घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नाली निर्माण में शासकीय मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कार्य में अत्यंत घटिया स्तर की दो नंबर ईंटें, नाममात्र का सीमेंट और खराब बालू-गिट्टी का प्रयोग किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर न तो ठेकेदार मौजूद रहते हैं और न ही संबंधित विभाग के जेई। जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति में मनमाने ढंग से गुणवत्ताविहीन कार्य कराया जा रहा है।
स्कूल जाना बंद, मरीज बेबस, मासूम हुए चुटैल
सड़क पर गहरे गड्ढे और मलबे का ढेर होने से पिछले डेढ़ महीने से गांव के छोटे-छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा गांव के प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. गिरीश सिंह के पास पहुंचने वाले मरीज भी रास्ते की बदहाली के कारण लौट रहे हैं। आपात स्थिति में गांव में एंबुलेंस का प्रवेश भी बंद है।
समुचित बैरिकेडिंग न होने से अब तक आधा दर्जन से अधिक लोग गिरकर चोटिल हो चुके हैं, जिनमें दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं जो गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
कलेक्ट्रेट घेराव और चुनाव बहिष्कार का ऐलान
प्रशासनिक उपेक्षा से आक्रोशित ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर एकत्र होकर शासन और कार्यदायी संस्था के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी ठेकेदार व जेई के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे और आगामी चुनावों में पूरे गांव के साथ मतदान का बहिष्कार करेंगे।

