हाईलाइट्स:
- त्वरित पुलिसिया एक्शन: ३० जून को गलती से अनजान खाते में भेजे गए थे ३०,००० रुपये; उभांव पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पीड़ित को दिलाई बड़ी राहत।
- साइबर टीम का कमाल: प्रभारी उपनिरीक्षक सूर्य प्रकाश दूबे ने बैंक अधिकारियों से विधिक व तकनीकी समन्वय स्थापित कर सेंट्रल बैंक के खाते में वापस कराई रकम।
- अपराध नहीं, मानवीय भूल: बैंकिंग हेल्प डेस्क के माध्यम से सुलझाया गया प्रकरण; मेहनत की कमाई वापस पाकर मो. तौसिफ ने पुलिस प्रशासन का जताया आभार।
बेल्थरारोड/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत उभांव थाना की साइबर सेल और हेल्प डेस्क टीम ने त्वरित एवं सराहनीय कार्रवाई करते हुए एक पीड़ित नागरिक की गाढ़ी कमाई के हजारों रुपये सुरक्षित वापस कराकर बलिया पुलिस की मित्र पुलिसिंग और तकनीकी कार्यकुशलता की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। ऑनलाइन डिजिटल ट्रांजैक्शन के दौरान हुई एक मानवीय भूल को उभांव पुलिस ने महज कुछ ही दिनों के भीतर सुलझाते हुए पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में रिवर्स करा दी है।
३० जून को अनजान खाते में चले गए थे ₹३०,००० नकद
प्राप्त आधिकारिक व तकनीकी विवरण के अनुसार, उभांव थाना क्षेत्र के ग्राम बासपार बहोरवा निवासी मो. तौसिफ पुत्र मनौवर ने बीते ३० जून को मोबाइल बैंकिंग के जरिए कुछ पैसे ट्रांसफर करने का प्रयास किया था। इसी दौरान एक अंक की त्रुटि या तकनीकी मानवीय भूल के कारण उनके खाते से ३०,००० रुपये किसी अज्ञात व्यक्ति के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर हो गए। अपनी गाढ़ी कमाई अचानक गलत खाते में चले जाने से परेशान तौसिफ ने तत्काल इसकी लिखित शिकायत उभांव थाने के साइबर हेल्प डेस्क में दर्ज कराई।
साइबर प्रभारी सूर्य प्रकाश दूबे ने स्थापित किया विधिक व बैंकिंग समन्वय
शिकायत पत्र प्राप्त होते ही उभांव थाना प्रभारी के निर्देशन में साइबर प्रभारी/उपनिरीक्षक सूर्य प्रकाश दूबे ने अपनी टीम के साथ तत्काल विधिक व तकनीकी अनुसंधान शुरू किया। साइबर टीम ने बिना समय गंवाए संबंधित बैंक के नोडल अधिकारियों और उस अज्ञात खाताधारक से संपर्क साधा जिसके खाते में राशि गई थी। पुलिस के विधिक हस्तक्षेप और तकनीकी समन्वय के बाद, उस अज्ञात व्यक्ति ने पैसे वापस करने पर सहमति जताई, जिसके बाद पूरी ३०,००० रुपये की धनराशि मो. तौसिफ के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India) में स्थित मूल खाते में सुरक्षित रूप से वापस (क्रेडिट) करा दी गई।
मामले का कानूनी पक्ष: नहीं लागू हुई बीएनएस या आईटी एक्ट की धाराएं
टुडे९ उत्तरप्रदेश को इस मामले का विधिक व कानूनी पक्ष समझाते हुए विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में किसी भी प्रकार की कोई साइबर धोखाधड़ी, फिशिंग या आपराधिक षड्यंत्र घटित नहीं हुआ था। चूंकि यह राशि विशुद्ध रूप से एक मानवीय भूल और तकनीकी गलती के कारण ट्रांसफर हुई थी, इसलिए इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) अथवा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की किसी भी दंडात्मक धारा के तहत मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। यह पूरी सफलता साइबर हेल्प डेस्क के विधिक व बैंकिंग समन्वय और त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली के तहत हासिल हुई है।
इस अत्यंत सराहनीय और जनहितैषी कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में मुख्य रूप से साइबर प्रभारी उपनिरीक्षक सूर्य प्रकाश दूबे, कांस्टेबल राकेश यादव एवं रिक्रूट कांस्टेबल विजय नारायण सिंह शामिल रहे, जिनकी इस मुस्तैदी की चारों तरफ प्रशंसा हो रही है।
