हाईलाइट्स:
- मजिस्ट्रियल जांच शुरू: एडीएम अनिल कुमार कर रहे हैं मामले की गहन जांच, 24 जुलाई तक आमजन से मांगे गए हैं साक्ष्य।
- प्रधान के भाई का पलटवार: आरोपी प्रधान के भाई अविनाश सिंह विक्की ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, कहा—"घटना के वक्त भाई गांव में थे ही नहीं, हमारे पास हैं 10 से अधिक सीसीटीवी फुटेज।"
- सपा का रुख सख्त: 17 जुलाई को ही सपा का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचा गायघाट, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग तेज।
रेवती/बलिया (सागर गुप्ता): जनपद बलिया के रेवती थाना क्षेत्र अंतर्गत गायघाट गांव निवासी कामजी गोंड की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब पूरी तरह से गर्मा गया है। पुलिस की कथित पिटाई से हुई मौत के आरोपों के बाद जहां प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं, वहीं इस संवेदनशील मामले में अब एक नया और बड़ा मोड़ सामने आया है। इस केस में नामजद आरोपी ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह उर्फ लालू के भाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीधे तौर पर इसे राजनीतिक द्वेष के तहत रची गई साजिश करार दिया है।
दरोगा, सिपाही और प्रधान सहित 6 लोगों पर दर्ज है हत्या का केस
उल्लेखनीय है कि 7 जुलाई को गांव की एक मीट की दुकान पर हुए विवाद के बाद 8 जुलाई को रेवती थाने के उपनिरीक्षक सचिन सरोज और आरक्षी अंकित सिंह कामजी गोंड को थाने ले गए थे। परिजनों का आरोप है कि थाने में बेरहमी से की गई पिटाई के कारण ही उनकी मौत हुई। हालांकि, शुरुआत में पुलिस ने इन आरोपों को नकारते हुए सीसीटीवी फुटेज का हवाला देकर सफाई दी थी कि पूछताछ के बाद उन्हें सही-सलामत छोड़ दिया गया था। लेकिन बढ़ते जन आक्रोश और राजनीतिक दबाव के बाद दरोगा व सिपाही को निलंबित कर दिया गया। मृतक के पुत्र विशाल गोंड की तहरीर पर पुलिसकर्मियों और ग्राम प्रधान सहित 6 लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
हमारे पास हैं 10 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज, निष्पक्ष जांच की मांग: अविनाश सिंह विक्की
मामले में नामजद आरोपी ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह के भाई अविनाश शंकर सिंह उर्फ विक्की ने मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, "मेरे भाई को राजनीतिक द्वेष के तहत साजिश का शिकार बनाया जा रहा है। कामजी गोंड के परिवार से हमारी कोई पुरानी रंजिश या दुश्मनी नहीं थी। हमारे पास 10 से अधिक ऐसे सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं जो यह साफ साबित करते हैं कि घटना के समय मेरे भाई गांव में मौजूद ही नहीं थे।" उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो; अगर उनका भाई दोषी है तो उसे सजा मिले, लेकिन निर्दोष होने पर न्याय भी मिलना चाहिए।
दूध का दूध और पानी का पानी करने में जुटा प्रशासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर अपर जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) अनिल कुमार ने मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी है। एडीएम ने सार्वजनिक अपील जारी कर कहा है कि इस घटना से जुड़े कोई भी साक्ष्य, वीडियो या बयान आगामी 24 जुलाई 2026 तक उनके न्यायालय कार्यालय में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। उधर, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए समाजवादी पार्टी का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इस मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की यह जांच क्या रुख अख्तियार करती है।
