हाईलाइट्स:
- चुनावी तैयारियों का शंखनाद: जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की कलेक्ट्रेट सभागार में मतदेय स्थलों के संभाजन को लेकर मैराथन समीक्षा बैठक।
- १२०० वोटर्स का मानक: अधिकतम १२,०० मतदाताओं के मानक पर होगा पोलिंग बूथों का पुनर्गठन; विशेष परिस्थिति में ३०० से कम वोटर्स वाले बूथों का देना होगा विधिक कारण।
- डिजिटल विधिक सबूत: सभी एसडीएम (SDM) को खुद बूथों पर खड़े होकर फोटो के साथ देनी होगी रिपोर्ट; जर्जर भवनों और कनेक्टिविटी की होगी गहन जांच।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में आगामी विधिक व लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से रेस नजर आ रहा है। मंगलवार ३० जून २०२६ को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में मतदेय स्थलों (पोलिंग बूथों) के संभाजन (री-ऑर्गनाइजेशन) को लेकर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक अति-महत्वपूर्ण विधिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कड़ा विधिक रुख अख्तियार करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाताओं की सुविधा और बूथों के भौतिक सत्यापन में किसी भी स्तर पर रत्ती भर भी विधिक लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) को स्वयं धरातल पर उतरकर विधिक पड़ताल करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
राजनीतिक दलों की सहमति से तैयार होगा आलेख प्रस्ताव, आमंत्रित होंगी आपत्तियां
जिला निर्वाचन अधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने विधिक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि मतदेय स्थलों के पुनर्निर्धारण के संबंध में जिले के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के विधिक प्रतिनिधियों के साथ कलेक्ट्रेट में विधिवत बैठक की जाए और उनकी आपसी सहमति व सुझावों के आधार पर ही प्रस्ताव तैयार किया जाए। इसके बाद मतदेय स्थलों की प्रारूप (आलेख) सूची विधिक रूप से प्रकाशित कर आम जनता से आपत्तियां एवं रचनात्मक सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। इस सूची की एक-एक प्रमाणित प्रति सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। प्राप्त विधिक शिकायतों और सुझावों के ससमय निस्तारण के बाद ही अंतिम सूची तैयार कर भारत निर्वाचन आयोग के अनुमोदन हेतु मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को प्रेषित की जाएगी।
१२०० मतदाताओं का विधिक पैमाना, कोई भी बूथ बिना ठोस कारण के नहीं होगा समाप्त
विधानसभावार समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट विधिक निर्देश दिया कि मतदेय स्थलों का संभाजन अधिकतम १२०० मतदाताओं के मानक के आधार पर ही किया जाए। यदि किसी विशेष भौगोलिक या विधिक परिस्थिति में ३०० से कम मतदाताओं वाला मतदेय स्थल बनाए रखना बेहद आवश्यक हो, तो उसके विधिक व स्पष्ट कारण निर्धारित प्रारूप में दर्ज करने होंगे। डीएम ने सभी एसडीएम को कड़ाई से निर्देशित किया कि किसी भी दशा में पुराना स्थापित बूथ समाप्त न किया जाए, जिससे ग्रामीण और दूर-दराज के मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचने में कोई व्यावहारिक या विधिक असुविधा हो।
दिखानी होगी चार पहिया वाहन की पहुंच, ऑन-कैमरा हाजिरी देंगे अधिकारी
सत्यापन की विधिक प्रक्रिया को फुलप्रूफ बनाने के लिए डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने नया तकनीकी फरमान जारी किया है। उन्होंने कहा कि अब केवल कागजी रिपोर्ट मान्य नहीं होगी; प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के सभी बूथों का क्रमवार भौतिक सत्यापन करते समय संबंधित विधिक जांच अधिकारी को स्वयं बूथ पर खड़े होकर अपनी एक फोटोग्राफ तथा संबंधित विद्यालय/भवन के चार अलग-अलग कोणों (एंगल्स) से फोटोग्राफ विधिक रिपोर्ट के साथ संलग्न करनी होगी। अधिकारियों को मौके पर जाकर निम्नलिखित विधिक व बुनियादी बिंदुओं की गहन जांच करनी होगी:
- बूथ तक पहुंचने वाली सड़क की चौड़ाई और उसकी भौतिक स्थिति।
- मतदान केंद्र तक चार पहिया वाहनों (प्रशासनिक/सुरक्षा बलों) की विधिक पहुंच।
- भवन व विद्यालय की गुणवत्ता, उसकी क्षमता और भवन का जर्जर न होना।
- पेयजल, दरवाजे-खिड़कियां, प्रकाश व्यवस्था और वैध विद्युत कनेक्शन की विधिक उपलब्धता।
इस हाई-प्रोफाइल विधिक बैठक में अपर जिलाधिकारी (एडीएम) अनिल कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा, जिले के समस्त उपजिलाधिकारी (एसडीएम), तहसीलदार तथा विभिन्न राजनैतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधिगण मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
