हाईलाइट्स:
- हरियाली महा-अभियान: वन विभाग द्वारा १ से ७ जुलाई तक मनाए जा रहे विशेष 'वन महोत्सव' का जनपद की सभी वन रेंजों में विधिक व उत्साहपूर्वक आगाज।
- डीएम की खास पहल: श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय (टीडी कॉलेज) परिसर में जिलाधिकारी ने रोपा अपने नाम का 'पीपल' का पौधा।
- सुरक्षा का विधिक संकल्प: डीएम ने छात्र-छात्राओं और प्रबुद्धजनों से की अपील— केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं, उसे पेड़ बनने तक सुरक्षित रखना सभी की विधिक जिम्मेदारी।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश शासन के विधिक और पर्यावरण संरक्षण निर्देशों के अनुक्रम में बलिया जनपद को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए वन विभाग के तत्वावधान में सात दिवसीय 'वन महोत्सव' (१ जुलाई से ७ जुलाई २०२६) का विधिक व भव्य शुभारंभ बुधवार को किया गया। अभियान के प्रथम दिन जनपद की समस्त वन रेंजों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्ध नागरिकों और ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता से व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी कड़ी में मुख्य जिला स्तरीय विधिक कार्यक्रम शहर के प्रतिष्ठित श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय (टीडी कॉलेज) के प्रांगण में संपन्न हुआ, जहां जिला प्रशासन और वन विभाग के आला अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कलेक्ट्रेट और वन विभाग के अधिकारियों ने रोपे अपने नाम के पौधे
मुख्य कार्यक्रम का विधिक उद्घाटन करते हुए जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने टीडी कॉलेज परिसर में अपने नाम का एक 'पीपल' का पौधा विधिक रूप से रोपित कर जनपदवासियों को पर्यावरण चेतना का संदेश दिया। इस विधिक शुरुआत के दौरान कलेक्ट्रेट व वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी नेमप्लेट के साथ अलग-अलग पौधों का रोपण किया। पहले दिन प्रतीकात्मक रूप से मुख्य मंच के समीप कुल पांच विशिष्ट औषधीय व छायादार पौधों का रोपण कर इस सप्ताहव्यापी वन महोत्सव की विधिक रूपरेखा की शुरुआत की गई। इस अवसर पर कॉलेज के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को पौधों की सुरक्षा की विधिक शपथ भी दिलाई गई।
पौधों की सुरक्षा एवं देखभाल सबसे बड़ी विधिक जिम्मेदारी: डीएम
उपस्थित जनसमूह, प्राध्यापकों और भारी संख्या में जुटे छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बेहद मार्मिक और विधिक अपील की। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में केवल औपचारिकता के लिए पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए उन पौधों को विधिक रूप से सुरक्षित रखना और उनके पेड़ बनने तक नियमित देखभाल करना हम सभी का परम विधिक कर्तव्य है। हरित आवरण (ग्रीन कवर) बढ़ाने में जनसहभागिता को उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण विधिक स्तंभ बताया।
विभिन्न विभागों के विधिक समन्वय से जीवित रहेंगे पौधे: डीएफओ
इस भव्य कार्यक्रम का विधिक संयोजन प्रभागीय निदेशक (डीएफओ), सामाजिक वानिकी प्रभाग बलिया द्वारा किया गया। प्रभागीय वनाधिकारी ने टुडे९ उत्तरप्रदेश से बात करते हुए आमजन से अपील की कि प्रत्येक नागरिक को इस मानसूनी सीजन में स्वयं वृक्षारोपण करना चाहिए। साथ ही, विभिन्न सरकारी और विधिक विभागों द्वारा जो पौधे सड़कों व सार्वजनिक जमीनों पर लगाए जा रहे हैं, उनकी सुरक्षा में स्थानीय ग्रामीण भी सहयोग करें ताकि पौधों के जीवित रहने की विधिक दर (सप्राइव रेट) को अधिकतम किया जा सके। इस विधिक शुभारंभ के अवसर पर टीडी कॉलेज के प्राचार्य, समस्त प्राध्यापक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, उप प्रभागीय वनाधिकारी, क्षेत्रीय वनाधिकारी बलिया तथा वन विभाग के तमाम विधिक अधिकारी व कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।