हाईलाइट्स:
- डिजिटल राजस्व क्रांति: गाजीपुर जनपद में जमीनी विवादों के परमानेंट खात्मे के लिए आज १ जुलाई से लागू हो रही है अत्याधुनिक ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित पैमाइश।
- सटीकता की गारंटी: नई रोवर तकनीक में गड़बड़ी की गुंजाइश शून्य; केवल ३ सेंटीमीटर का ही हो सकेगा प्लस-माइनस का विधिक अंतर।
- हर तहसील को मिले उपकरण: जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने प्रेस वार्ता कर दी जानकारी— सभी तहसीलों को सौंपे गए आधुनिक रोवर, पुराने और नए तरीकों का होगा तुलनात्मक विधिक आकलन।
गाजीपुर (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद में दशकों पुराने जमीनी विवादों को जड़ से खत्म करने और भू-राजस्व व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी व डिजिटल बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक विधिक कदम उठाया है। जनपद में खेतों और जमीनों की नापी (पैमाइश) का सदियों पुराना पारंपरिक तरीका आज यानी बुधवार १ जुलाई २०२६ से पूरी तरह विधिक रूप से बदलने जा रहा है। अब जिले में जमीनों की पैमाइश फीते या जरीब के बजाय अंतरिक्ष में घूम रहे उपग्रहों यानी ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) और आधुनिक 'रोवर तकनीक' के जरिए की जाएगी। मंगलवार ३० जून को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी (डीएम) अनुपम शुक्ला ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इस युगांतकारी विधिक बदलाव की विस्तृत जानकारी दी।
जमीनी विवादों का होगा स्थाई निस्तारण, धारा २४ की पैमाइश में मिलेगी गति
प्रेस वार्ता के दौरान जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने बताया कि गाजीपुर जनपद में वर्तमान में जमीनों और खेतों की मेढ़ से जुड़े विधिक विवादों की संख्या काफी अधिक है। किसान और आम जनता अपनी जमीनों की सही विधिक सीमा तय कराने के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा २४ के तहत पैमाइश के मुकदमे दर्ज कराती है। अभी तक राजस्व कर्मी (लेखपाल व कानूनगो) पारंपरिक तरीकों से नापी करते थे, जिसमें अक्सर मानवीय त्रुटि या पक्षपात के आरोप लगते थे और विवाद खत्म होने के बजाय और बढ़ जाता था। उत्तर प्रदेश सरकार के विधिक निर्देशानुसार अब इस विधिक समस्या के स्थाई समाधान के लिए जिले में रोवर तकनीक को अनिवार्य रूप से धरातल पर उतारा जा रहा है।
मात्र ३ सेंटीमीटर की एक्यूरेसी; सभी तहसीलों को रोवर मशीनें आवंटित
डीएम अनुपम शुक्ला ने टुडे९ उत्तरप्रदेश को इस आधुनिक तकनीक के तकनीकी व विधिक पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि सैटेलाइट आधारित इस रोवर प्रणाली में शुद्धता और एक्यूरेसी का स्तर अत्यंत उच्च होगा। इस तकनीक से नापी करने पर जमीन के क्षेत्रफल में महज ३ सेंटीमीटर (+/-) का ही सूक्ष्म अंतर आ सकता है, जिसे विधिक रूप से त्रुटिहीन माना जाता है। इस महा-अभियान के विधिक क्रियान्वयन के लिए गाजीपुर की सभी तहसीलों को एक-एक अत्याधुनिक रोवर मशीन उपलब्ध करा दी गई है। आज १ जुलाई से ही सभी तहसीलों में इसके जरिए लाइव पैमाइश शुरू कर दी जाएगी। शुरुआती दौर में सुरक्षा और तुलनात्मक विधिक अध्ययन के लिए पारंपरिक नॉर्मल प्रोसेस और रोवर तकनीक दोनों से नापी कर आंकड़ों का सटीक आकलन भी किया जाएगा।
खेतों की सही नापी से घटेगा क्राइम ग्राफ: जिलाधिकारी
इस क्रांतिकारी राजस्व सुधार को लेकर जिलाधिकारी गाजीपुर श्री अनुपम शुक्ला ने अपनी आधिकारिक 'बाइट' (वक्तव्य) में स्पष्ट किया कि इस तकनीक के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले छोटे-मोटे फौजदारी और खूनी विवादों में भारी कमी आएगी। खेतों की सीमाएं सैटेलाइट के जरिए हमेशा के लिए डिजिटल नक्शे पर विधिक रूप से लॉक हो जाएंगी, जिससे कोई भी दबंग किसी की जमीन पर अवैध विधिक कब्जा नहीं कर पाएगा। किसानों को अपनी जमीन की वास्तविक और विधिक स्थिति जानने के लिए अब महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा और राजस्व न्यायालयों में लंबित मुकदमों का भी त्वरित विधिक निस्तारण संभव हो सकेगा।
