हाईलाइट्स:
- गांधी पार्क में सत्याग्रह: नीट (NEET) परीक्षा में अनियमितताओं की जांच और निष्पक्षता की मांग को लेकर 48 घंटे का अनशन प्रारंभ।
- मान सिंह सेंगर का नेतृत्व: मधुबन महाविद्यालय व लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं ने एक सुर में उठाई एनटीए (NTA) में सुधार की मांग।
- पदयात्रा का ऐलान: 23 से 25 जुलाई तक चलने वाले अनशन के बाद गांधी पार्क से तहसील परिसर तक निकाली जाएगी शांतिपूर्ण पदयात्रा।
रसड़ा (सुमित गुप्ता): राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में पारदर्शिता, निष्पक्षता और परीक्षार्थियों के अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर गुरुवार से नगर के ऐतिहासिक गांधी पार्क में 48 घंटे का शांतिपूर्ण अनशन शुरू हो गया है। इस सत्याग्रह का नेतृत्व छात्र नेता मान सिंह सेंगर कर रहे हैं। अनशन के माध्यम से छात्र नेताओं ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, कथित धांधली की निष्पक्ष जांच और देश के लाखों मेधावी छात्रों के भविष्य की सुरक्षा की पुरजोर मांग उठाई है।
प्रमुख छात्र नेता अनशन में शामिल, एनटीए पर उठाए सवाल
इस आंदोलन में मान सिंह सेंगर के साथ दिलीप सिंह सेंगर (पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, मधुबन महाविद्यालय), प्रकाश भारती (पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, मधुबन महाविद्यालय), राहुल पाण्डेय (छात्र नेता, मधुबन महाविद्यालय), अजीत तिवारी (छात्र नेता, मधुबन महाविद्यालय) तथा सतवंत सिंह (छात्र नेता, लखनऊ विश्वविद्यालय) सहयोगी अनशनकारी के रूप में डटे हुए हैं। अनशनकारियों का कहना है कि नीट परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों की समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार कर पूर्ण पारदर्शी व जवाबदेह व्यवस्था लागू हो।
25 जुलाई को तहसील परिसर तक निकाली जाएगी पदयात्रा
छात्र नेताओं ने बताया कि यह अनशन 23 जुलाई को दोपहर 12 बजे से प्रारंभ होकर 25 जुलाई को दोपहर 12 बजे तक चलेगा। अनशन के सफल समापन के बाद गांधी पार्क से लेकर तहसील परिसर तक एक शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक पदयात्रा निकाली जाएगी। आंदोलनकारियों ने इसे विशुद्ध रूप से अहिंसात्मक और छात्रों के हित का संघर्ष बताते हुए स्थानीय अभिभावकों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों से समर्थन देने की अपील की है।
छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम रखने के लिए लड़ा जा रहा है।
