हाईलाइट्स:
- खाकी को चकमा देकर विधिक सरेंडर: जिले के सबसे चर्चित दूल्हा हत्याकांड का मुख्य आरोपी और एक लाख रुपये का इनामी अपराधी प्रदीप बिंद पुलिस की गिरफ्त से पहले माननीय न्यायालय में हुआ हाजिर।
- शादी की खुशियां बनी थीं मातम: बीती १ मई २०२६ को खेतासराय के मानेछा गांव के पास बारात ले जा रहे दूल्हे आजाद बिंद की गोली मारकर की गई थी जघन्य हत्या।
- पीड़ित परिवार में निराशा: पुलिसिया मुठभेड़ या गिरफ्तारी न होने और आरोपी के सीधे विधिक सरेंडर करने से मृतक के परिजनों में मायूसी; कड़ी से कड़ी विधिक सजा की मांग दोहराई।
जौनपुर (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के सबसे सनसनीखेज और बहुचर्चित दूल्हा हत्याकांड में एक बहुत बड़ा विधिक घटनाक्रम सामने आया है। वारदात के बाद से ही लगातार फरार चल रहे और पुलिस प्रशासन की रडार पर मौजूद ₹१ लाख के इनामी मुख्य आरोपी प्रदीप बिंद ने खाकी को चकमा देते हुए माननीय न्यायालय के समक्ष विधिक आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया है। न्यायालय में आरोपी के सरेंडर करने की आधिकारिक विधिक सूचना मिलते ही मृतक दूल्हे आजाद बिंद के परिजनों में एक बार फिर मायूसी छा गई है। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे चाहते थे कि पुलिस इस खूंखार अपराधी को धरातल पर गिरफ्तार कर विधिक सबक सिखाए।
१ मई को मानेछा गांव के पास सरेराह हुआ था जघन्य हत्याकांड
प्राप्त आधिकारिक व विधिक विवरण के अनुसार, यह पूरा मामला बीती १ मई २०२६ का है, जब खेतासराय थाना क्षेत्र के अंतर्गत मानेछा गांव के समीप बारात लेकर जा रहे दूल्हे आजाद बिंद की सरेराह गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस दुस्साहसिक और सनसनीखेज वारदात से न केवल शादी की खुशियां पलभर में मातम में तब्दील हो गई थीं, बल्कि पूरे जौनपुर जनपद सहित प्रदेश के राजनीतिक व सामाजिक हलकों में हड़कंप मच गया था। घटना की विधिक गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले से जुड़े कई सह-आरोपियों को पहले ही विधिक रूप से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
₹१ लाख का इनामी था मुख्य आरोपी प्रदीप बिंद, पुलिस को दी विधिक मात
इस जघन्य हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार और शूटर प्रदीप बिंद वारदात के बाद से ही अपना ठिकाना बदल-बदल कर विधिक गिरफ्त से भाग रहा था। पुलिस महानिरीक्षक/पुलिस अधीक्षक द्वारा उसकी गिरफ्तारी पर ₹१ लाख का भारी-भरकम विधिक इनाम घोषित किया गया था। स्वाट (SWAT), सर्विलांस और खेतासराय थाने की संयुक्त पुलिस टीमें लगातार उसके संभावित विधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दे रही थीं। इसके बावजूद, शातिर अपराधी ने पुलिस मुठभेड़ या धरपकड़ के डर से खुद को बचाते हुए गुपचुप तरीके से माननीय न्यायालय में आत्मसमर्पण करने का विधिक रास्ता चुना।
न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया जेल, अब कोर्ट में चलेगी विधिक लड़ाई
न्यायालय परिसर में आत्मसमर्पण की विधिक प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत माननीय न्यायाधीश के आदेशानुसार आरोपी प्रदीप बिंद को सख्त सुरक्षा घेरे में न्यायिक अभिरक्षा के तहत जेल भेज दिया गया है। टुडे९ उत्तरप्रदेश से वार्ता करते हुए पीड़ित परिवार ने रोते हुए अपनी विधिक मांग को दोहराया। परिजनों ने कहा कि भले ही आरोपी ने चालाकी से कोर्ट में सरेंडर कर दिया हो, लेकिन वे हार नहीं मानेंगे। परिवार ने जिला प्रशासन और विधिक अभियोजन पक्ष से मांग की है कि इस मामले में त्वरित सुनवाई (Fast Track Trial) कराकर सभी दोषियों को विधिक रूप से फांसी या कठोरतम आजीवन कारावास की सजा दिलाई जाए।
रिपोर्टः :- पंकज राय जौनपुर
