हाईलाइट्स:
- खाकी की बदली तस्वीर: सीओ सदर परमानंद कुशवाहा की संवेदनशीलता से पुलिस कार्यालयों के प्रति जनता का हिचकिचाहट और संकोच का भाव हुआ दूर।
- सुलझ रहे हैं विधिक मामले: भूमि विवाद, पारिवारिक कलह और मारपीट जैसी गंभीर शिकायतों पर दोनों पक्षों को सुनकर निष्पक्ष विधिक कार्रवाई के सख्त निर्देश।
- कागजों तक सीमित नहीं कार्रवाई: फरियादियों को मिल रहा त्वरित न्याय; संबंधित थाना प्रभारियों और विवेचकों को विधिक समय सीमा के भीतर निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था।
जौनपुर (टुडे९ उत्तरप्रदेश): आमतौर पर पुलिस कार्यालयों और खाकी वर्दी को लेकर आम जनता के मन में एक अजीब सी झिझक, डर और संकोच का भाव देखा जाता है, लेकिन जौनपुर के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) सदर परमानंद कुशवाहा ने अपनी जनहितैषी कार्यशैली से इस पुरानी धारणा को विधिक रूप से बदलने का एक सराहनीय प्रयास किया है। यही कारण है कि आज उनके कार्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में पीड़ित और फरियादी बिना किसी भय के अपनी विधिक समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं और उन्हें यह पूरा विश्वास रहता है कि उनकी बात पूरी गंभीरता व न्यायोचित तरीके से सुनी जाएगी।
हर पीड़ित की बात पर गंभीर विधिक ध्यान, मौके पर ही दिए जा रहे निर्देश
प्राप्त स्थलीय और आधिकारिक विवरण के अनुसार, सीओ सदर परमानंद कुशवाहा रोजाना अपने कार्यालय में बैठकर सुदूर क्षेत्रों से आने वाले प्रत्येक आवेदक की समस्या को बेहद शांति और ध्यानपूर्वक सुनते हैं। पीड़ित चाहे किसी भी वर्ग का हो, मामला भूमि विवाद से जुड़ा हो, पारिवारिक कलह का हो, मारपीट का हो अथवा अन्य किसी प्रकार की विधिक शिकायत का, वे दोनों पक्षों की बातों को बारीकी से समझकर पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आवश्यक विधिक कार्रवाई के निर्देश देते हैं। उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह रहती है कि पीड़ितों की शिकायतों का समयबद्ध और त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके ताकि किसी को भी विधिक न्याय के लिए भटकना न पड़े।
फरियादियों को भय से मुक्ति, सहज और विनम्र व्यवहार की चौतरफा सराहना
सीओ सदर कार्यालय पहुंचे फरियादियों ने टुडे९ उत्तरप्रदेश की टीम को बताया कि क्षेत्राधिकारी के समक्ष अपनी बात रखने में उन्हें किसी प्रकार का भय या झिझक महसूस नहीं होती। अधिकारी का सहज और विनम्र विधिक व्यवहार आम लोगों को खुलकर अपनी समस्याएं बताने का एक सुरक्षित अवसर प्रदान करता है। शिकायत सुनने के तत्काल बाद सीओ सदर न केवल फाइलों पर विधिक आदेश जारी करते हैं, बल्कि संबंधित थाना प्रभारियों और विवेचकों (Investigating Officers) को फोन पर आवश्यक दिशा-निर्देश देकर मामलों के विधिक व धरातलीय निस्तारण की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं।
पुलिस और जनता के बीच मजबूत संवाद का केंद्र बना सीओ कार्यालय
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और कानूनविदों के अनुसार, सीओ सदर का यह विधिक कार्यालय आज के समय में जनता और पुलिस के बीच सीधे संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है। यहां आने वाले न्यायप्रिय लोगों को यह पक्का भरोसा रहता है कि उनकी शिकायत केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उस पर त्वरित विधिक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। पुलिस विभाग के जानकारों का भी मानना है कि जब उच्च अधिकारी ऐसी संवेदनशीलता दिखाते हैं, तो जनता का विश्वास पुलिसिंग और विधिक व्यवस्था पर और अधिक सुदृढ़ होता जाता है।
रिपोर्ट:- पंकज राय जौनपुर
