हाईलाइट्स:
- पुश्तैनी भूमि पर संकट: सदर तहसील के ग्राम चौकिया निवासी मु. रफीक ने आराजी संख्या ३९२ पर अवैध कब्जा कराने का लगाया गंभीर विधिक आरोप।
- राजस्व पैमाइश पर सवाल: पीड़ित का आरोप- राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से करीब ४ बिस्वा २ धुर पुश्तैनी जमीन विपक्षी परवेज व शाहिद के नाम करने का हुआ विधिक प्रयास।
- न्याय की मांग: मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद हुई गुप्त कार्रवाई; पीड़ित ने एसडीएम को पत्र सौंपकर यथास्थिति बनाए रखने की विधिक गुहार लगाई।
गाज़ीपुर (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर जनपद अंतर्गत सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम चौकिया में पुश्तैनी जमीन पर अवैध रूप से विधिक कब्जा कराने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। क्षेत्र के एक पीड़ित व्यक्ति ने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों पर विपक्षियों से सांठगांठ करने का संगीन विधिक आरोप लगाते हुए उप जिलाधिकारी (एसडीएम) सदर को एक विधिक शिकायती पत्र सौंपा है। पीड़ित ने मामले की निष्पक्ष विधिक जांच कराने और अपनी भूमि को भू-माफियाओं से सुरक्षित रखने की पुरजोर मांग की है।
राजस्व कर्मियों पर मिलीभगत का आरोप, विपक्षियों को लाभ पहुंचाने की विधिक कोशिश
प्राप्त आधिकारिक व शिकायती विवरण के अनुसार, चौकिया ग्राम निवासी पीड़ित शिकायतकर्ता मु. रफीक पुत्र मु. अय्यूब ने एसडीएम सदर को दिए पत्र में बताया कि ग्राम चौकिया स्थित आराजी संख्या ३९२ की भूमि उनकी पुश्तैनी जमीन है और इस पर उनका वर्षों से शांतिपूर्ण व विधिक कब्जा चला आ रहा है। उक्त स्थल पर पीड़ित का पक्का पिलर एवं पशुओं को बांधने का पगहा (पशुशाला) भी विधिक रूप से स्थापित है। आरोप है कि हाल ही में राजस्व विभाग द्वारा की गई एक पैमाइश के दौरान कुछ संबंधित विधिक अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से शिकायतकर्ता की लगभग ४ बिस्वा २ धुर पुश्तैनी भूमि को दुर्भावनापूर्ण तरीके से दूसरे पक्ष के नाम हस्तांतरित या दर्शाने का विधिक खेल रचा गया।
न्यायालय में विचाराधीन है मामला, बिना सूचना के की गई विधिक पैमाइश
शिकायतकर्ता मु. रफीक ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि विपक्षी परवेज अंसारी और शाहिद अली को अवैध रूप से लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पूरी विधिक पैमाइश को गलत और मनमाने ढंग से अंजाम दिया गया है, ताकि उनकी कीमती पुश्तैनी भूमि पर विपक्षियों का विधिक कब्जा कराया जा सके। पीड़ित का यह भी कहना है कि उक्त भूमि से संबंधित विधिक मामला पूर्व से ही सक्षम न्यायालय में विचाराधीन रहा है। इसके बावजूद, पीड़ित परिवार को बिना किसी पूर्व विधिक सूचना या जानकारी के, परोक्ष रूप से यह एकतरफा कार्रवाई की गई जो विधिक सिद्धांतों के पूर्णतः विपरीत है।
आजीविका का संकट, प्रशासनिक विधिक जांच के बाद साफ होगी स्थिति
न्याय की आस में तहसील मुख्यालय पहुंचे पीड़ित ने उप जिलाधिकारी सदर से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष विधिक जांच कराने, मौके पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने तथा दोषी राजस्व अधिकारियों एवं संबंधित विपक्षी पक्षों के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक व विधिक कार्रवाई करने की मांग की है। पीड़ित भावुक होते हुए कहा कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस विधिक अन्याय को नहीं रोका, तो उनके पूरे परिवार के सामने भरण-पोषण और आजीविका का घोर विधिक संकट उत्पन्न हो जाएगा।
फिलहाल, इस पूरे भू-विवाद प्रकरण पर गाज़ीपुर स्थानीय प्रशासन या संबंधित राजस्व विधिक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक व लिखित बयान सामने नहीं आया है। एसडीएम के विधिक आदेश पर होने वाली जांच रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक भू-विधिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट :- एकरार खान (संवाददाता) / टुडे९ उत्तरप्रदेश, गाज़ीपुर
