हाईलाइट्स:
- फर्जीवाड़े का आरोप: कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद नगर पालिका अभिलेखों से नाम हटाकर दूसरे के नाम नामांतरण करने का आरोप।
- भू-माफियाओं की नजर: 1 करोड़ में एग्रीमेंट कर 30 लाख एडवांस लेने का दावा, पीड़ितों ने 8 लोगों के खिलाफ कराया है मुकदमा दर्ज।
- ईओ का पक्ष: ईओ रविंद्र कुमार ने कहा—"मामला न्यायालय में विचाराधीन है, कोर्ट का फैसला आने के बाद ही होगी आगे की कार्रवाई।"
फतेहपुर (अज़हरुद्दीन): उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में नगर पालिका परिषद पर फर्जी तरीके से एक पुश्तैनी दुकान का नामांतरण (दाखिल-खारिज) करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में पीड़ित पक्ष ने जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात कर शिकायती पत्र सौंपा है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद हुआ नामांतरण
जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में पीड़ित चाँदबाबू (पुत्र स्वर्गीय सदाकत हुसैन) तथा लियाकत हुसैन (पुत्र मोहम्मद हुसैन) ने बताया कि छोटी बाजार चौक स्थित उनकी पुश्तैनी दुकान नगर पालिका के अभिलेखों में दर्ज है। पीड़ितों ने बताया कि वे शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और दुकान से जुड़ा विवाद सिविल जज (जूनियर डिवीजन) फतेहपुर की अदालत में (वाद संख्या 294/18) विचाराधीन है। कोर्ट में मामला पेंडिंग होने के कारण किसी भी प्रकार के नामांतरण पर रोक के निर्देश थे और स्वयं नगर पालिका ने भी वर्ष 2019 में इस संबंध में पत्र जारी किया था। इसके बावजूद आरोप है कि नगर पालिकाकर्मियों की सांठगांठ से अभिलेखों में प्रार्थियों का नाम काटकर मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद हुसैन के नाम दुकान का नामांतरण कर दिया गया और बाद में संपत्ति का विक्रय भी कर दिया गया।
1 करोड़ में एग्रीमेंट और 30 लाख एडवांस लेने का आरोप, 8 पर एफआईआर दर्ज
पीड़ितों का आरोप है कि नियमों के विपरीत जाकर नामांतरण कराने के बाद अब भू-माफिया इस जमीन पर जबरन कब्जा करना चाहते हैं। पीड़ितों ने बताया कि इस मामले में 4 जुलाई को ही कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर 8 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। आरोप है कि कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए फर्जी तथ्यों के आधार पर दुकान का सगीर अहमद, शिव बहादुर और दिलशाद अहमद खान ने 1 करोड़ रुपये में एग्रीमेंट कर 30 लाख रुपये एडवांस भी ले लिए थे। पीड़ितों ने डीएम से मांग की है कि 1993 के असिसमेंट रजिस्टर के आधार पर उनका नाम पुनः दर्ज किया जाए और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई हो।
नगर पालिका ईओ का बयान
इस पूरे मामले में नगर पालिका परिषद फतेहपुर के अधिशासी अधिकारी (EO) रविंद्र कुमार ने बताया कि मामला न्यायालय में पेंडिंग है। जब तक कोर्ट से कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक नगर पालिका स्तर से कुछ नहीं किया जा सकता। न्यायालय का फैसला आने के बाद ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
