हाईलाइट्स:
- न्यायालय का कड़ा विधिक हंटर: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट बलिया ने नगरा ब्लॉक की खारी ग्राम पंचायत के प्रधान व सचिव पर मुकदमा दर्ज करने का दिया विधिक आदेश।
- बिना कनेक्शन के उठा ली रकम: प्राथमिक विद्यालय में बिजली का कनेक्शन न होने के बावजूद विधिक वाउचरों के जरिए ₹१,१९,४१९ के सरकारी धन के गबन का सनसनीखेज पटाक्षेप।
- तीन दिन का विधिक अल्टीमेटम: सीजेएम कोर्ट ने नगरा पुलिस को ३ कार्यदिवस के भीतर मुकदमा पंजीकृत कर विधिक प्रगति रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के दिए सख्त निर्देश।
नगरा/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत पंचायती राज व्यवस्था में "विकास" के नाम पर सरकारी धन के विधिक दुरुपयोग और गबन का एक बेहद शर्मनाक व गंभीर विधिक मामला प्रकाश में आया है। जनपद के नगरा विकास खंड की ग्राम पंचायत खारी में बिना बिजली कनेक्शन वाले एक प्राथमिक विद्यालय के नाम पर फर्जी तरीके से १ लाख १९ हजार रुपये से अधिक का बिजली बिल भुगतान दिखाकर सरकारी खजाने में डाका डाला गया। इस विधिक धांधली पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय बलिया ने आरोपी वर्तमान/तत्कालीन ग्राम प्रधान और सचिव के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में विधिक मुकदमा दर्ज करने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया है।
तीन विधिक तिथियों में खेला गया किश्तों में सरकारी धन की निकासी का खेल
प्राप्त विधिक व न्यायिक विवरण के अनुसार, खारी ग्राम पंचायत के स्थानीय निवासी रविंद्र तिवारी ने न्यायालय में धारा १५६(३) के तहत विधिक प्रार्थना पत्र देकर इस पूरे घोटाले को उजागर किया था। पीड़ित ने साक्ष्यों के साथ आरोप लगाया कि गांव के प्राथमिक विद्यालय में आज तक विद्युत विभाग का कोई कनेक्शन ही नहीं हुआ है। इसके बावजूद वित्तीय वर्ष २०२२-२३ के दौरान विधिक बिल-वाउचरों का कूटरचित जाल बुनकर कुल १ लाख १९ हजार ४१९ रुपये की विधिक निकासी कर ली गई।
न्यायालय में प्रस्तुत विधिक अभिलेखों के अनुसार:
- १२ अप्रैल २०२२ को प्रथम किश्त के रूप में १०,००० रुपये आहरित किए गए।
- २७ अप्रैल २०२२ को द्वितीय किश्त के रूप में २५,००० रुपये की विधिक निकासी हुई।
- २४ मई २०२२ को अंतिम व बड़ी किश्त के रूप में ८४,४१९ रुपये का फर्जी विधिक भुगतान तत्कालीन ग्राम प्रधान दिनेश कुमार भारती और तत्कालीन सचिव प्रदीप शर्मा ने मिलीभगत कर सरकारी खाते से उड़ा दिए।
बिजली विभाग के विधिक पत्र ने खोली पोल, करीब डेढ़ वर्ष चली अदालती सुनवाई
शिकायतकर्ता रविंद्र तिवारी ने अपने दावों को विधिक रूप से पुख्ता करने के लिए विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता द्वारा जारी एक आधिकारिक व विधिक पत्र भी न्यायालय के समक्ष साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि उक्त प्राथमिक विद्यालय पर कोई भी वैध विधिक विद्युत कनेक्शन अस्तित्व में नहीं है। न्यायालय में करीब डेढ़ वर्ष तक चले सघन विधिक परीक्षण और उपलब्ध साक्ष्यों के परिशीलन के बाद, २९ जून २०२६ को सीजेएम बलिया ने इस घोर वित्तीय विधिक अपराध पर नगरा पुलिस को विधिक चाबुक चलाया।
न्यायालय का आदेश प्राप्त, विधिक अन्वेषण में जुटी नगरा पुलिस
न्यायालय ने नगरा पुलिस को ३ कार्यदिवस के भीतर हर हाल में विधिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर प्रगति आख्या प्रस्तुत करने को कहा है। मामले में थानाध्यक्ष नगरा संजय कुमार मिश्र ने टुडे९ उत्तरप्रदेश को बताया कि माननीय न्यायालय का विधिक आदेश पत्र थाने को प्राप्त हो चुका है। आदेश के अनुपालन में नामजद आरोपियों के खिलाफ सुसंगत विधिक धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और मामले की गहन विधिक व विवेचनात्मक जांच की जा रही है। निर्धारित समयावधि के भीतर विधिक आख्या माननीय न्यायालय को प्रेषित कर दी जाएगी। इस कार्रवाई से ब्लॉक के अन्य भ्रष्ट विधिक कारिंदों और बिचौलियों में हड़कंप व्याप्त है।
