हाईलाइट्स:
- सांस्कृतिक दीक्षांत का विधिक संकल्प: २९ जुलाई को आयोजित होने वाले जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के अष्टम दीक्षांत समारोह में भारतीय परिधान व परंपरा को दी गई विधिक प्राथमिकता।
- ड्रेस कोड हुआ निर्धारित: छात्र सफेद कुर्ता-पायजामा और छात्राएं पहनेंगी पीली साड़ी; विश्वविद्यालय द्वारा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाएगा विशिष्ट उत्तरीय और पगड़ी।
- पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार सिंह होंगे मुख्य अतिथि: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) नई दिल्ली के पूर्व निदेशक समारोह की बढ़ाएंगे विधिक गरिमा; कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार शुक्ल ने बताया अविस्मरणीय क्षण।
बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद स्थित जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय का अष्टम दीक्षांत समारोह इस बार पूर्णतः भारतीय संस्कृति, विधिक मर्यादा और सनातनी परंपरा के अनूठे रंग में रंगा नजर आएगा। आगामी २९ जुलाई को आयोजित होने वाले इस भव्य व विधिक समारोह में उपाधि एवं स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राएं, प्राध्यापक तथा विधिक अधिकारी पारंपरिक भारतीय परिधानों में समदर्शिता का संदेश देते नजर आएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का विधिक रूप से मानना है कि दीक्षांत समारोह वास्तव में विद्यार्थियों का 'समावर्तन संस्कार' है, जिसके लिए पाश्चात्य वेशभूषा के स्थान पर भारतीय परिधान ही समारोह की गरिमा को विधिक रूप से अक्षुण्ण रखेंगे।
विद्यार्थियों और प्राध्यापकों के लिए विधिक ड्रेस कोड तय, उत्तरीय-पगड़ी होगी अनिवार्य
प्राप्त आधिकारिक व विधिक विवरण के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुलसचिव एस एल पाल ने दीक्षांत समारोह के विधिक ड्रेस कोड की घोषणा करते हुए बताया कि समारोह में सम्मिलित होने वाले छात्र अनिवार्य रूप से सफेद कुर्ता और पायजामा धारण करेंगे, जबकि छात्राओं के लिए पीले रंग की साड़ी विधिक रूप से निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रत्येक उपाधि प्राप्तकर्ता मेधावी को एक विशिष्ट उत्तरीय और पारंपरिक पगड़ी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसे पहनना विधिक रूप से अनिवार्य होगा।
यही नहीं, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों के लिए भी विधिक परिधान नियमावली लागू की गई है। पुरुष प्राध्यापक सफेद या पीले कुर्ते-पायजामे के साथ पीले रंग की सदरी (जैकेट) पहनेंगे, जबकि महिला प्राध्यापिकाएं पीले रंग की साड़ी में विधिक शोभा यात्रा की गवाह बनेंगी।
कुलाधिपति की अगुवाई में निकलेगी भव्य शोभा यात्रा, पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार सिंह होंगे मुख्य अतिथि
कुलसचिव एस एल पाल ने आगे बताया कि समारोह की शुरुआत एक भव्य व विधिक शोभा यात्रा (Academic Procession) से होगी, जिसमें माननीय कुलाधिपति, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और कुलपति के साथ कार्य परिषद व विद्या परिषद के माननीय सदस्यगण और संकायाध्यक्ष पारंपरिक विधिक वेशभूषा में सम्मिलित होंगे। इस बार दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार सिंह (पूर्व निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान - IARI, नई दिल्ली) शिरकत कर मेधावियों को विधिक दीक्षोपदेश देंगे।
षोडश संस्कारों में शामिल है समावर्तन संस्कार: कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार शुक्ल
विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार शुक्ल ने टुडे९ उत्तरप्रदेश से विशेष वार्ता में बताया कि दीक्षांत समारोह किसी भी विश्वविद्यालय का सबसे महत्वपूर्ण और विधिक उत्सव होता है। अध्ययन समाप्ति के पश्चात् विद्यार्थियों को दिया जाने वाला दीक्षोपदेश उनके जीवन का अविस्मरणीय विधिक क्षण होता है। भारतीय परंपरा में इस विधिक अवसर का महत्व इतना अधिक है कि इसे मानव जीवन के पवित्र 'षोडश (16) संस्कारों' में समावर्तन संस्कार के रूप में विधिक व सामाजिक स्थान दिया गया है। इसी गौरवशाली अनुभूति को जीवंत करने के लिए विश्वविद्यालय ने इस बार भारतीय परिधानों को विधिक रूप से अंगीकार किया है।
रिपोर्ट :- रोहित सिंह , टुडे९ उत्तरप्रदेश, बलिया
