हाईलाइट्स:
- प्रशासनिक शिथिलता पर सवाल: बेल्थरारोड उप जिलाधिकारी (एसडीएम) की पूर्व की विधिक कार्रवाइयों के दावों के बावजूद क्षेत्र में बेखौफ जारी है अवैध मिट्टी खनन।
- किसान की भूमि पर डाका: खैराखास निवासी हसनेन की निजी भूमि से दबंगों ने जेसीबी लगाकर विधिक नियमों के खिलाफ किया अवैध खनन; आर्थिक नुकसान का आरोप।
- दर-दर भटक रहा पीड़ित: तहसील से लेकर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) तक विधिक गुहार लगाने के बाद भी नहीं हुई कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई।
बेल्थरारोड/बलिया (टुडे९ उत्तरप्रदेश): उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद अंतर्गत उभांव थाना क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन का विधिक व प्रतिबंधित कारोबार प्रशासनिक दावों को ठेंगा दिखाते हुए धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। स्थानीय उप जिलाधिकारी (एसडीएम) द्वारा पूर्व में की गई कतिपय विधिक कार्रवाइयों के बावजूद खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे निजी पट्टों और किसानों की खेतों को भी अपना निशाना बनाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इससे स्थानीय पुलिस व तहसील प्रशासन की विधिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं, जो समूचे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
दबंगई के बल पर निजी भूमि से खोदी मिट्टी, लगाया हजारों का विधिक चूना
प्राप्त आधिकारिक व विधिक शिकायत विवरण के अनुसार, उभांव थाना क्षेत्र के ग्राम खैराखास निवासी हसनेन पुत्र अब्दुल रहमान ने अपनी पैतृक व विधिक भूमि से भू-माफियाओं द्वारा अवैध रूप से मिट्टी का अवैध खनन किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित हसनेन ने इस संबंध में साक्ष्यों के साथ माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित एक विधिक शिकायत पत्र सीधे ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रेषित किया है। शिकायत में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र के कुछ रसूखदार लोगों ने अपनी दबंगई और विधिक भय के बल पर उनकी निजी भूमि पर रातों-रात भारी जे.सी.बी. (JCB) मशीनें और ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाकर भारी मात्रा में मिट्टी का अवैध विधिक खनन करा लिया, जिससे पीड़ित को गहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
एसडीएम से लेकर डीएम तक लगाई विधिक गुहार, पर ढाक के तीन पात
पीड़ित भू-स्वामी का कहना है कि इस दुस्साहसिक विधिक चोरी और अवैध खनन के खिलाफ उन्होंने सबसे पहले उप जिलाधिकारी (एसडीएम) बेल्थरारोड को लिखित विधिक प्रार्थना पत्र दिया था। इसके बाद उन्होंने बलिया के जिलाधिकारी (डीएम) तथा मुख्यमंत्री के नाम जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर भी विधिक रूप से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। अत्यंत खेद का विषय है कि इतने उच्च विधिक स्तर पर शिकायत दर्ज होने के बावजूद स्थानीय उभांव पुलिस या तहसील की राजस्व टीम द्वारा धरातल पर अब तक कोई ठोस व प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई। इसके कारण पीड़ित किसान अपनी विधिक भूमि के हक और न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
निष्पक्ष विधिक जांच और दोषियों को जेल भेजने की उठी पुरजोर मांग
इस विधिक शिथिलता को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और कृषकों में भी गहरा असंतोष है। शिकायतकर्ता हसनेन ने जिला प्रशासन एवं आबकारी व खनन विभाग के उच्च विधिक अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष व स्थलीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि राजस्व अभिलेखों का विधिक मिलान कर बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के दोषियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में विधिक मुकदमा पंजीकृत किया जाए, अवैध खनन से हुए नुकसान की विधिक क्षतिपूर्ति दिलाई जाए, और क्षेत्र में चल रहे सभी अवैध खनन के विधिक सिंडिकेट को तत्काल ध्वस्त किया जाए।
