हाईलाइट्स:
- सगे परिवार पर गंभीर आरोप: बांसडीह निवासी धनजी वर्मा ने माता-पिता, भाई-बहन और पत्नी पर प्रताड़ना और 35 लाख रुपये हड़पने का लगाया आरोप।
- हाथों में पोस्टर ले पहुंचे कलेक्ट्रेट: पीड़ित ने आरोप लगाया कि साजिश के तहत उसकी शादी कराई गई और जीवन बर्बाद कर दिया गया।
- पुलिस की कार्यशैली पर सवाल: दो साल बीतने के बाद भी अभियुक्तों की गिरफ्तारी न होने से परेशान पीड़ित पहले चढ़ चुका है मोबाइल टावर पर।
बांसडीह/बलिया : जनपद बलिया के बांसडीह क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और रिश्तों को तार-तार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पीड़ित युवक ने अपने ही सगे माता-पिता, भाई-बहन और पत्नी के खिलाफ न्याय के लिए मोर्चा खोल दिया है। हाथ में पोस्टर लेकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े धनजी वर्मा को देख हर कोई हैरान रह गया। पीड़ित ने अपने परिवार और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बचपन, पढ़ाई और 35 लाख रुपये हड़पने का आरोप
पीड़ित धनजी वर्मा का आरोप है कि उनके माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी और पड़ोसी मंजू देवी ने मिलकर प्रताड़ना की सभी हदें पार कर दी हैं। मीडिया से बातचीत में पीड़ित ने बताया कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए पढ़ाई और नौकरी छीन ली गई। आरोप है कि पिता ने साजिश के तहत उनकी जबरन शादी कराई, जिसके कारण उनका जीवन तबाह हो गया। धनजी का कहना है कि खेत व गहने बेचकर शादी कराने के नाम पर और उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई के लगभग 30 से 35 लाख रुपये हड़प कर अन्य भाइयों में बांट दिए गए। इतना ही नहीं, बिना वैध तलाक के दूसरी शादी का दबाव बनाने, पैतृक संपत्ति में हिस्सा न देने और भोजन-पानी तक से वंचित करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
पुलिस की लचर कार्यशैली से तंग आकर टावर पर चढ़ चुका है पीड़ित
पीड़ित युवक ने बताया कि उसने बांसडीह थाने से लेकर क्षेत्राधिकारी तक कई बार चक्कर लगाए, लेकिन पुलिस ने मामले में फर्जी रिपोर्ट लगा दी और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। घटना के दो वर्ष बीत जाने और मुकदमा दर्ज होने के बावजूद पुलिस नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है। प्रशासन की इसी उदासीनता से क्षुब्ध होकर उसे पूर्व में मोबाइल टॉवर पर चढ़ने और विषाक्त पदार्थ खाने जैसा आत्मघाती कदम उठाने को विवश होना पड़ा था। पीड़ित पिछले चार सालों से न्याय के लिए अदालत और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहा है।
"अधिकार लेकर रहूंगा, हार नहीं मानूंगा"
हाथों में पोस्टर लेकर दर-दर भटक रहे धनजी वर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं बल्कि पुलिस की लापरवाही और अपने हक के लिए है। उन्होंने कहा, "मुझे मेरा जायज हक चाहिए, मैं हार नहीं मानूंगा और न्याय लेकर ही रहूंगा।"
इस घटना ने एक बार फिर बलिया पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और पीड़ितों को न्याय दिलाने के दावों पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। देखना यह होगा कि कलेक्ट्रेट पहुंचे इस पीड़ित युवक को प्रशासन कब तक निष्पक्ष न्याय दिला पाता है।
